आधुनिक कीट विज्ञान अनुसंधान में जैव सुरक्षा और जैव नैतिकता पर तीन दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ!
नई दिल्ली,- भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-आईएआरआई), नई दिल्ली के कीट विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित “आधुनिक कीट विज्ञान अनुसंधान में उत्कृष्टता के लिए जैव सुरक्षा और जैव नैतिकता” विषयक तीन दिवसीय कार्यशाला का बुधवार को एनआरएल ऑडिटोरियम में शुभारंभ हुआ। कार्यशाला का उद्देश्य आधुनिक अनुसंधान में जैव सुरक्षा, जैव नैतिकता और जिम्मेदार वैज्ञानिक कार्यप्रणालियों के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा शोधकर्ताओं की क्षमता का विकास करना है।
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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आईसीएआर-आईएआरआई के निदेशक डॉ. चि. श्रीनिवास राव थे। इस अवसर पर संयुक्त निदेशक (अनुसंधान) डॉ. सी. विश्वनाथन, डीन एवं संयुक्त निदेशक (शिक्षा) डॉ. अनुपमा सिंह, वरिष्ठ वैज्ञानिक, विशेषज्ञ, शोधार्थी और विभिन्न संस्थानों से आए प्रतिभागी उपस्थित रहे।
अपने उद्घाटन संबोधन में डॉ. श्रीनिवास राव ने कहा कि आधुनिक कृषि अनुसंधान में जैव सुरक्षा और जैव नैतिकता की भूमिका लगातार बढ़ रही है। उन्होंने छात्रों और युवा वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि कार्यशाला से प्राप्त ज्ञान को अपने-अपने संस्थानों और महाविद्यालयों में भी साझा करें, ताकि सुरक्षित और नैतिक अनुसंधान संस्कृति को व्यापक स्तर पर बढ़ावा मिल सके।
नई तकनीकों के साथ बढ़ी जिम्मेदारी
विशेषज्ञों के अनुसार, कीट विज्ञान के क्षेत्र में आणविक जीवविज्ञान, आरएनए इंटरफेरेंस (RNAi), CRISPR आधारित जीन संपादन, कीट ट्रांसजेनिक्स, सिंथेटिक बायोलॉजी, सूक्ष्मजीवी जैव-नियंत्रण और कीट कोशिका संवर्धन जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में अनुसंधान को सुरक्षित, नैतिक और पर्यावरण के अनुकूल तरीके से संचालित करना अत्यंत आवश्यक हो गया है।
जैव सुरक्षा से लेकर प्रकाशन नैतिकता तक होगी चर्चा
तीन दिवसीय कार्यक्रम में देश के विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञ व्याख्यान देंगे। इसके साथ ही प्रयोगशाला आधारित व्यावहारिक प्रदर्शन और प्रशिक्षण सत्र भी आयोजित किए जाएंगे। कार्यशाला के प्रमुख विषयों में जैव सुरक्षा नियम, बीएसएल/आईबीएसएल सुविधाएं, जैविक सामग्री का सुरक्षित उपयोग, आनुवंशिक रूप से परिवर्तित जीव (GMOs), कीट रोगजनक एवं सूक्ष्मजीव, खतरनाक रसायनों का प्रबंधन, प्रयोगशाला अपशिष्ट निपटान, आपदा तैयारी, पर्यावरणीय सुरक्षा, अनुसंधान की सत्यनिष्ठा, प्रकाशन नैतिकता और जिम्मेदार अनुसंधान पद्धतियां शामिल हैं।
युवा वैज्ञानिकों को मिलेगा विशेष लाभ
कार्यशाला में कुल 31 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें प्रारंभिक करियर के वैज्ञानिक, शोधार्थी, तकनीकी विशेषज्ञ और अनुसंधान कर्मी शामिल हैं। आयोजकों का मानना है कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम भविष्य के वैज्ञानिकों को वैश्विक मानकों के अनुरूप सुरक्षित और जिम्मेदार अनुसंधान करने में मदद करेगा।
कृषि अनुसंधान के लिए क्यों महत्वपूर्ण है जैव सुरक्षा?
विशेषज्ञों का कहना है कि नई जैव प्रौद्योगिकियों के बढ़ते उपयोग के साथ अनुसंधान प्रयोगशालाओं में सुरक्षा मानकों का पालन और नैतिक दिशा-निर्देशों का अनुपालन अनिवार्य हो गया है। इससे न केवल वैज्ञानिक अनुसंधान की गुणवत्ता बढ़ती है, बल्कि पर्यावरण, मानव स्वास्थ्य और कृषि पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा भी सुनिश्चित होती है।
