September 18, 2026 2:15 PM

Krishi Times

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ग्रामीणों को मिला संपत्ति का अधिकार, बांटे SVAMITVA कार्ड!

आनंद में SVAMITVA और मत्स्य योजनाओं के लाभार्थियों से संवाद, ग्रामीणों को बांटे गए प्रॉपर्टी कार्ड

आनंद, गुजरात | 18 सितंबर 2026 -केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय और मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के संयुक्त तत्वावधान में गुजरात के आनंद में SVAMITVA योजना और मत्स्य योजनाओं के लाभार्थियों के साथ विशेष संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में ग्रामीण संपत्ति के स्वामित्व, वित्तीय पहुंच, मत्स्य क्षेत्र की संभावनाओं और सरकारी योजनाओं के जमीनी प्रभाव पर चर्चा हुई। कार्यक्रम के दौरान SVAMITVA योजना के तहत ग्रामीण लाभार्थियों को प्रॉपर्टी कार्ड भी वितरित किए गए।

कार्यक्रम में केंद्रीय पंचायती राज, मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल विशेष अतिथि के तौर पर मौजूद रहे।

ग्रामीण संपत्ति के स्वामित्व को मजबूत करने पर जोर

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति से जुड़े विवादों और स्वामित्व के स्पष्ट दस्तावेजों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण इलाकों में जमीन और संपत्ति से जुड़े विवाद कई बार लंबे समय तक चलते हैं और इससे परिवारों तथा समुदायों के बीच तनाव की स्थिति पैदा होती है।

उन्होंने कहा कि इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए SVAMITVA योजना के माध्यम से ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए संपत्तियों का सर्वेक्षण किया जा रहा है। ड्रोन आधारित सर्वेक्षण के माध्यम से संपत्तियों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार कर पात्र ग्रामीणों को प्रॉपर्टी कार्ड उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि देश में अब तक 3 करोड़ से अधिक SVAMITVA कार्ड वितरित किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि संपत्ति का वैध दस्तावेज ग्रामीण परिवारों के लिए केवल स्वामित्व का प्रमाण नहीं है, बल्कि यह उन्हें औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से जोड़ने में भी मदद कर सकता है।

प्रॉपर्टी कार्ड से बैंक ऋण तक पहुंच आसान होने की उम्मीद

राजीव रंजन सिंह ने कहा कि जब ग्रामीणों के पास अपनी संपत्ति से संबंधित स्पष्ट दस्तावेज उपलब्ध होते हैं तो वे बैंकिंग संस्थानों के सामने अपनी संपत्ति को वित्तीय आधार के रूप में प्रस्तुत कर सकते हैं। इससे जरूरत के समय संस्थागत ऋण प्राप्त करने के अवसर बढ़ सकते हैं और ग्रामीणों को अनौपचारिक ऋणदाताओं पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

उन्होंने कहा कि गुजरात सहित देश के विभिन्न हिस्सों में SVAMITVA योजना के दूसरे चरण का कार्य अंतिम चरण में है। सरकार के अनुसार, योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति के रिकॉर्ड को मजबूत करना, विवादों को कम करना और ग्रामीण परिवारों को आर्थिक गतिविधियों के लिए अपनी संपत्ति का बेहतर उपयोग करने में सक्षम बनाना है।

ग्रामीण विकास में तकनीक की बढ़ती भूमिका

SVAMITVA योजना में ड्रोन सर्वेक्षण और डिजिटल मैपिंग जैसी तकनीकों के इस्तेमाल को ग्रामीण प्रशासन में तकनीकी बदलाव के उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है। इससे गांवों में संपत्तियों की स्थिति का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने और स्थानीय स्तर पर बेहतर योजना बनाने में मदद मिल सकती है।

कार्यक्रम में इस बात पर भी जोर दिया गया कि ग्रामीण विकास को केवल बुनियादी सुविधाओं तक सीमित रखने के बजाय संपत्ति अधिकार, वित्तीय समावेशन, आजीविका और तकनीकी पहुंच को भी विकास की प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जाना जरूरी है।

मत्स्य क्षेत्र से करीब 6 करोड़ लोगों की आजीविका जुड़ी

केंद्रीय मंत्री ने देश के मत्स्य क्षेत्र की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि लगभग 6 करोड़ लोगों की आजीविका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मत्स्य पालन क्षेत्र से जुड़ी हुई है। ऐसे में मछुआरा समुदायों की आय और आजीविका को मजबूत करने के लिए उत्पादन के साथ-साथ बुनियादी ढांचे, प्रसंस्करण, बाजार और निर्यात पर भी ध्यान देना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 के बाद मत्स्य क्षेत्र के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की गई हैं। इनमें ब्लू रिवोल्यूशन, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) और अलग मत्स्य पालन मंत्रालय की स्थापना प्रमुख हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार मत्स्य क्षेत्र में आधुनिक तकनीक, गहरे समुद्र में मछली पकड़ने, बेहतर बाजार संपर्क और निर्यात क्षमता बढ़ाने की दिशा में भी काम कर रही है। वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और टैरिफ से जुड़ी चुनौतियों के बीच भी क्षेत्र के लिए नए बाजार और व्यापारिक अवसर तलाशने पर जोर दिया जा रहा है।

उत्पादन से आगे बढ़कर मूल्यवर्धन जरूरी

कार्यक्रम में मत्स्य क्षेत्र की संभावनाओं को केवल मछली उत्पादन तक सीमित नहीं रखने की जरूरत पर भी जोर दिया गया। मछली पकड़ने के बाद कोल्ड-चेन, भंडारण, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, मूल्यवर्धन और बाजार तक पहुंच बेहतर होने से मछुआरों और संबंधित उद्यमों के लिए अतिरिक्त आर्थिक अवसर पैदा हो सकते हैं।

PMMSY जैसी योजनाओं के माध्यम से मत्स्य क्षेत्र में बुनियादी ढांचे और उद्यमिता को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। इससे छोटे मछुआरों, मत्स्य किसानों और इस क्षेत्र से जुड़े अन्य लोगों को अपनी गतिविधियों को अधिक व्यवस्थित और बाजारोन्मुख बनाने में मदद मिल सकती है।

प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने ग्रामीण बदलाव को बताया महत्वपूर्ण

केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष देश में विकास और परिवर्तन से जुड़े रहे हैं। उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल और बाद में केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण और गरीब परिवारों तक आवास, बिजली, शौचालय, आयुष्मान कार्ड, मुद्रा योजना और PM-KISAN जैसी योजनाओं की पहुंच बढ़ाने के प्रयास किए गए हैं। उनके अनुसार, सरकार की विभिन्न योजनाओं का उद्देश्य जरूरतमंद वर्गों तक सीधे लाभ पहुंचाना है।

SVAMITVA और ब्लू रिवोल्यूशन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को जोड़ने की कोशिश

प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने SVAMITVA योजना और ब्लू रिवोल्यूशन को ग्रामीण भारत के आर्थिक बदलाव से जोड़ते हुए कहा कि प्रॉपर्टी कार्ड मिलने से ग्रामीणों को अपनी संपत्ति के स्वामित्व का औपचारिक दस्तावेज प्राप्त होता है। इसके माध्यम से बैंकिंग और वित्तीय सहायता तक पहुंच के नए रास्ते खुल सकते हैं।

उन्होंने कहा कि संपत्ति से संबंधित स्पष्ट रिकॉर्ड ग्रामीण परिवारों के लिए कई स्तरों पर उपयोगी साबित हो सकता है। इससे संपत्ति संबंधी विवादों को कम करने, वित्तीय संस्थानों तक पहुंच बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जोड़ने में मदद मिल सकती है।

लाभार्थियों ने साझा किए अपने अनुभव

कार्यक्रम का एक प्रमुख हिस्सा लाभार्थियों के साथ सीधा संवाद रहा। SVAMITVA योजना के लाभार्थियों ने प्रॉपर्टी कार्ड मिलने के बाद अपनी स्थिति और योजना से जुड़े अनुभव साझा किए। वहीं PM Matsya Sampada Yojana से जुड़े लाभार्थियों ने मत्स्य पालन गतिविधियों में सरकारी सहायता से मिले लाभों की जानकारी दी।

इस दौरान अधिकारियों और लाभार्थियों के बीच योजनाओं के क्रियान्वयन, प्राप्त सहायता और ग्रामीण स्तर पर उनके प्रभाव को लेकर बातचीत हुई। इस तरह के संवाद कार्यक्रमों के माध्यम से योजनाओं के जमीनी अनुभवों को नीति और प्रशासनिक स्तर तक पहुंचाने का अवसर भी मिलता है।

NDDB और जिला प्रशासन के अधिकारी रहे मौजूद

कार्यक्रम में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के अध्यक्ष डॉ. मीनेश शाह, पंचायती राज विभाग के संयुक्त सचिव अमित अग्रवाल, निदेशक धर्मेंद्र, जिला विकास अधिकारी देवाहुति सहित जिला प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहे।

इसके अलावा बड़ी संख्या में SVAMITVA योजना और मत्स्य योजनाओं के लाभार्थियों ने कार्यक्रम में भाग लिया।

गांवों में संपत्ति अधिकार और आजीविका दोनों पर फोकस

आनंद में आयोजित यह कार्यक्रम ग्रामीण विकास के दो महत्वपूर्ण पहलुओं को एक साथ सामने लाता है। एक ओर SVAMITVA योजना के माध्यम से ग्रामीण संपत्तियों के स्वामित्व और रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने का प्रयास किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर मत्स्य योजनाओं के जरिए मछुआरा समुदायों की आजीविका और आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करने पर जोर है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था में संपत्ति का स्पष्ट रिकॉर्ड, संस्थागत ऋण तक पहुंच, आधुनिक तकनीक, आजीविका के अवसर और बाजार से जुड़ाव आने वाले समय में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। आनंद का यह कार्यक्रम इन योजनाओं के लाभार्थियों को सीधे मंच पर लाकर सरकारी योजनाओं के जमीनी अनुभवों को साझा करने का माध्यम भी बना।