भारी बारिश का अलर्ट: पशुपालकों, मुर्गी पालकों और मछली किसानों के लिए अगले 7 दिन चुनौतीपूर्ण, IMD ने जारी की विशेष सलाह!
नई दिल्ली। देश के कई हिस्सों में अगले एक सप्ताह तक मौसम का मिजाज बदला हुआ रहने वाला है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि 19 सितंबर 2026 के आसपास उत्तरी अंडमान सागर में एक नया कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है, जो धीरे-धीरे मजबूत होकर दक्षिण ओडिशा और उत्तरी आंध्र प्रदेश के तटों की ओर बढ़ सकता है। इसके प्रभाव से पूर्वी, मध्य, पश्चिमी और दक्षिणी भारत के कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश, तेज हवाएं, आंधी और बिजली गिरने की घटनाएं देखने को मिल सकती हैं।
मौसम विभाग की यह चेतावनी केवल फसलों तक सीमित नहीं है। पशुधन, पोल्ट्री और मत्स्य पालन से जुड़े किसानों के लिए भी यह समय बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बारिश, नमी और जलभराव की स्थिति पशुओं में बीमारियों का खतरा बढ़ा सकती है, जबकि तालाबों और जलाशयों में मछली उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है।
राजस्थान से मानसून वापसी की तैयारी, लेकिन कई राज्यों में जारी रहेगा बारिश का दौर
मौसम विभाग के अनुसार पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों में 19 सितंबर के आसपास दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल हो रही हैं। हालांकि देश के पूर्वी, मध्य और दक्षिणी हिस्सों में सक्रिय मौसम प्रणालियों के कारण बारिश का सिलसिला जारी रहेगा।
वर्तमान में सौराष्ट्र और उससे सटे उत्तर-पूर्वी अरब सागर के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। वहीं उत्तरी थाईलैंड के ऊपर ऊपरी वायुमंडलीय चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय है, जिसके प्रभाव से अंडमान सागर में नई मौसम प्रणाली विकसित होने की संभावना है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल से ओडिशा तक निम्न दबाव की रेखा (ट्रफ) तथा असम, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक क्षेत्रों में भी चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय हैं।
इन राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना
मौसम विभाग के अनुसार 16 से 22 सितंबर के दौरान बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, महाराष्ट्र, कोंकण-गोवा, केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में अलग-अलग दिनों में भारी बारिश हो सकती है।
बिहार, झारखंड, ओडिशा और पूर्वोत्तर राज्यों में बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की आशंका भी जताई गई है। कुछ क्षेत्रों में हवा की गति 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है।
पशुपालकों के लिए क्यों बढ़ी चिंता?
बारिश का मौसम पशुधन के लिए कई तरह की चुनौतियां लेकर आता है। लगातार नमी और गंदगी के कारण पशुओं में खुरपका-मुंहपका, गलघोंटू, त्वचा रोग, परजीवी संक्रमण और श्वसन संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि डेयरी किसानों को इस समय अपने पशुओं के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना चाहिए। पशुशालाओं में पानी भरने से संक्रमण तेजी से फैल सकता है। ऐसे में पशुओं को सूखे और साफ स्थान पर रखना जरूरी है।
डेयरी किसानों के लिए सलाह
पशुओं को खुले स्थान के बजाय सुरक्षित शेड में रखें। पशुशालाओं में जल निकासी की उचित व्यवस्था करें, पशुओं को साफ और ताजा पानी उपलब्ध कराएं।
गीले या सड़े हुए चारे का उपयोग न करें। दूध देने वाले पशुओं की नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं। बिजली चमकने के दौरान पशुओं को खुले पेड़ों के नीचे न बांधें।
पशुपालन विशेषज्ञों के अनुसार यदि बारिश लंबे समय तक जारी रहती है तो दूध उत्पादन में भी गिरावट देखने को मिल सकती है। इसलिए पशुओं को संतुलित आहार देना और तनावमुक्त रखना आवश्यक है।
मुर्गी पालन पर भी मंडरा रहा खतरा
देश के कई हिस्सों में तेजी से बढ़ रहे पोल्ट्री उद्योग के लिए भी यह मौसम चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। अत्यधिक नमी और तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण पोल्ट्री फार्मों में बैक्टीरिया और वायरस तेजी से पनप सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश के दौरान पोल्ट्री शेड में नमी बढ़ने से पक्षियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है, जिससे संक्रमण और मृत्यु दर बढ़ सकती है।
पोल्ट्री किसानों को क्या करना चाहिए?
शेड को सूखा और हवादार बनाए रखें। बारिश का पानी अंदर प्रवेश न करने दें। पक्षियों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराएं। नियमित रूप से कीटाणुनाशक का छिड़काव करें।
बीमार पक्षियों को तुरंत अलग करें। चारे को नमी से बचाकर रखें। पोल्ट्री विशेषज्ञों के अनुसार इस मौसम में बायो-सिक्योरिटी उपायों को मजबूत करना सबसे जरूरी है।
मछली पालन क्षेत्र के लिए विशेष चेतावनी
मौसम विभाग ने अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर के कई हिस्सों में समुद्री गतिविधियों के लिए चेतावनी जारी की है। मछुआरों को सलाह दी गई है कि वे समुद्र में जाने से पहले स्थानीय मौसम बुलेटिन अवश्य देखें।
विशेष रूप से दक्षिण-पूर्व और दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी, अंडमान सागर तथा अरब सागर के कुछ हिस्सों में समुद्र उग्र रहने की संभावना है।
मौसम विभाग के अनुसार भारी बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव, छोटे पुलों और ग्रामीण सड़कों को नुकसान, पेड़ों के गिरने और कच्चे मकानों पर असर पड़ने की संभावना है। कुछ क्षेत्रों में भूस्खलन और मिट्टी खिसकने की घटनाएं भी हो सकती हैं।
आने वाले दिनों में मौसम तेजी से बदल सकता है। पशुपालक, मुर्गी पालक और मछली किसान स्थानीय मौसम पूर्वानुमान पर लगातार नजर रखें। किसी भी आपात स्थिति में पशुओं, पक्षियों और मत्स्य इकाइयों को सुरक्षित रखने के लिए पहले से तैयारी करना ही नुकसान से बचने का सबसे प्रभावी उपाय होगा।

























