नकली बीजों पर सख्ती की तैयारी: नए सीड बिल पर किसान संगठनों से मंथन, किसानों के अधिकार रहेंगे सुरक्षित!
नई दिल्ली। देश में नकली और घटिया बीजों की समस्या से किसानों को राहत दिलाने के लिए केंद्र सरकार नए सीड बिल (Seed Bill) को लेकर व्यापक विचार-विमर्श कर रही है। इसी कड़ी में कृषि भवन, नई दिल्ली में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने देशभर के किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत बैठक कर प्रस्तावित कानून के विभिन्न प्रावधानों पर चर्चा की। बैठक में किसानों के सुझावों और अनुभवों को प्राथमिकता देते हुए सरकार ने स्पष्ट किया कि बिना व्यापक सहमति और गहन विचार-विमर्श के कोई फैसला नहीं लिया जाएगा।
बैठक में भारतीय किसान संघ, भारतीय किसान यूनियन (विभिन्न गुट), किसान महापंचायत, भारतीय कृषक समाज, कर्नाटक रैयत संघ, तेलंगाना रैयत संघ, महाराष्ट्र के शेतकारी संगठन, गुजरात खेदुत समाज समेत देश के कई राज्यों के किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। कृषि सचिव अतीश चंद्रा और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
1966 का कानून बदलती कृषि व्यवस्था के लिए पर्याप्त नहीं
बैठक के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि वर्तमान बीज अधिनियम 1966 और बीज नियंत्रण आदेश 1983 के समय कृषि क्षेत्र की परिस्थितियां अलग थीं। पिछले छह दशकों में कृषि तकनीक, बीज उत्पादन और बाजार व्यवस्था में बड़े बदलाव आए हैं, लेकिन मौजूदा कानून उसी अनुपात में अपडेट नहीं हो सका है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में खराब या नकली बीज से नुकसान होने पर जिम्मेदारी तय करना कठिन होता है, जिससे किसान आर्थिक नुकसान झेलते हैं। ऐसे में एक मजबूत और जवाबदेह कानूनी ढांचे की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
18 हजार से अधिक सुझावों का अध्ययन
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि वर्ष 2025 के नवंबर-दिसंबर में प्रस्तावित सीड बिल पर सार्वजनिक सुझाव आमंत्रित किए गए थे, जिन पर किसानों, कृषि विशेषज्ञों और किसान संगठनों की ओर से लगभग 18,000 सुझाव प्राप्त हुए।
अब सरकार इन सुझावों के साथ-साथ किसान संगठनों से प्रत्यक्ष संवाद कर रही है ताकि कानून का अंतिम मसौदा जमीनी जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी किसी प्रकार की समय सीमा तय नहीं की गई है और सुझाव लेने की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।
70 प्रतिशत बीज मौजूदा कानून के दायरे से बाहर
बैठक में यह चिंता भी सामने आई कि वर्तमान में उपयोग किए जा रहे लगभग 70 प्रतिशत बीज मौजूदा बीज अधिनियम के प्रभावी दायरे से बाहर हैं। विभिन्न राज्यों में अलग-अलग व्यवस्थाएं होने के कारण निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नकली और निम्न गुणवत्ता वाले बीज किसानों की लागत बढ़ाने के साथ-साथ उत्पादन और आय दोनों पर प्रतिकूल असर डालते हैं। ऐसे में नया कानून बीज गुणवत्ता नियंत्रण को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
किसानों के पारंपरिक अधिकारों पर नहीं पड़ेगा असर
सरकार ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित कानून किसानों के पारंपरिक अधिकारों को प्रभावित नहीं करेगा। किसान अपनी पारंपरिक या कृषक किस्मों के बीजों का उत्पादन, आदान-प्रदान और विक्रय पहले की तरह कर सकेंगे।
साथ ही, किसानों के लिए किसी प्रकार का अनिवार्य डिजिटल पंजीकरण प्रस्तावित नहीं है। यदि कोई किसान अपनी विकसित किस्म का पंजीकरण कराना चाहता है तो उसके लिए स्वैच्छिक व्यवस्था उपलब्ध होगी।
नकली बीज बेचने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई
प्रस्तावित सीड बिल में दंड व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने का प्रस्ताव है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार अपराधों को अलग-अलग श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाएगा। छोटी चूक पर चेतावनी और बाद में अधिक जुर्माने का प्रावधान रखा जा सकता है, जबकि गंभीर मामलों में कड़ी कार्रवाई का रास्ता भी खुला रहेगा।
कृषि क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यदि बीज कंपनियों और विक्रेताओं की जवाबदेही स्पष्ट रूप से तय होती है तो किसानों को होने वाले नुकसान में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।
किसान होंगे नीति निर्माण के केंद्र में
बैठक के दौरान किसान संगठनों ने बीज गुणवत्ता जांच, मुआवजा व्यवस्था, पारदर्शी प्रमाणन प्रणाली और राज्यों की भूमिका जैसे विषयों पर अपने सुझाव दिए। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि किसानों के सुझाव अंतिम मसौदे को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
उन्होंने दोहराया कि खेती का आधार किसान है और सरकार किसी भी नीति को किसानों के हितों और सहमति को ध्यान में रखकर ही आगे बढ़ाएगी। साथ ही बीज उद्योग, वैज्ञानिक संस्थानों और अन्य संबंधित पक्षों से भी चर्चा जारी रहेगी।
कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकता है नया कानून
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यदि नया सीड बिल प्रभावी रूप से लागू होता है तो नकली बीजों की बिक्री पर अंकुश लगेगा, बीज गुणवत्ता में सुधार होगा और किसानों का भरोसा मजबूत होगा। इससे उत्पादकता बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने में भी मदद मिल सकती है।
सरकार का उद्देश्य ऐसा कानून तैयार करना है जो किसानों को सुरक्षित, प्रमाणित और गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने के साथ-साथ कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करे। नया सीड बिल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

























