September 2, 2026 12:51 AM

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खदान का अपशिष्ट बनेगा खेतों की ताकत!

कृषि में उपयोग होगा आयरन अयस्क अपशिष्ट! ICAR-IARI और AM/NS इंडिया के बीच हुआ अहम समझौता

नई दिल्ली, 1 सितंबर 2026। कृषि क्षेत्र में संसाधनों के सतत उपयोग और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए आईसीएआर-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR-IARI), नई दिल्ली और आर्सेलर मित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया (AM/NS India) ने आयरन अयस्क टेलिंग्स (Iron Ore Tailings-IOTs) के कृषि उपयोग पर उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।

यह साझेदारी खनन उद्योग से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थों को कृषि के लिए उपयोगी संसाधन में बदलने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और पर्यावरण-अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

वैज्ञानिकों और अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ समझौता

समझौते पर ICAR-IARI के संयुक्त निदेशक (अनुसंधान) डॉ. सी. विश्वनाथन और AM/NS इंडिया के अनुसंधान एवं विकास प्रमुख डॉ. विश्वनाथन एन. ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर ICAR-IARI के प्रधान वैज्ञानिक एवं परियोजना प्रमुख डॉ. भूपिंदर सिंह सहित दोनों संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

2024 से चल रहे अध्ययन को मिला नया विस्तार

ICAR-IARI और AM/NS इंडिया ने वर्ष 2024 में आयरन अयस्क प्रसंस्करण (Beneficiation) के दौरान उत्पन्न होने वाले टेलिंग्स के कृषि उपयोग की संभावनाओं का अध्ययन शुरू किया था। प्रारंभिक शोध में पाया गया कि इन टेलिंग्स में सिलिका, आयरन ऑक्साइड, एल्युमिना, कैल्शियम, मैग्नीशियम सहित कई प्राकृतिक खनिज तत्व मौजूद हैं, जो उचित वैज्ञानिक परीक्षण और सुरक्षा मूल्यांकन के बाद फसलों तथा मिट्टी के लिए लाभकारी साबित हो सकते हैं।

धान, गेहूं और सब्जियों पर मिले उत्साहजनक परिणाम

ICAR-IARI, नई दिल्ली तथा छत्तीसगढ़ के किरंदुल स्थित AM/NS इंडिया की बेनिफिसिएशन इकाई के आसपास किए गए प्रारंभिक प्रयोगों में सकारात्मक संकेत मिले हैं। अध्ययन के अनुसार, वैज्ञानिक रूप से जांचे गए आयरन अयस्क टेलिंग्स धान, गेहूं और विभिन्न सब्जी फसलों के लिए खनिज पोषक तत्वों के स्रोत के रूप में उपयोगी हो सकते हैं।

कई मौसमों तक होगा विस्तृत अनुसंधान

नए समझौते के तहत नई दिल्ली और किरंदुल में बहु-मौसमी एवं दीर्घकालिक अध्ययन किए जाएंगे। शोध के दौरान फसल प्रतिक्रिया, पोषक तत्वों की उपलब्धता, फाइटो-टॉक्सिसिटी (पौधों पर विषाक्त प्रभाव), पोषक तत्वों की गतिशीलता, लीचिंग व्यवहार और संभावित पर्यावरणीय प्रभावों का विस्तृत मूल्यांकन किया जाएगा।

वैज्ञानिकों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आयरन अयस्क टेलिंग्स का कृषि उपयोग पूरी तरह सुरक्षित, लाभकारी और पर्यावरण के अनुकूल हो।

बंजर और पोषक तत्वों की कमी वाली मिट्टी के लिए बन सकता है समाधान

विशेषज्ञों के अनुसार यह शोध आयरन-समृद्ध टेलिंग्स की मदद से मिट्टी में लौह तत्व की कमी को दूर करने की संभावनाओं का भी आकलन करेगा। यदि परिणाम सफल रहे तो यह तकनीक पोषक तत्वों की कमी वाली और क्षरणग्रस्त भूमि की उत्पादकता बढ़ाने में मदद कर सकती है। साथ ही फसलों में लौह तत्व की मात्रा बढ़ाकर बायोफोर्टिफिकेशन कार्यक्रमों को भी मजबूती मिल सकती है।

सर्कुलर इकोनॉमी और टिकाऊ कृषि को मिलेगा बढ़ावा

इस पहल का प्रमुख उद्देश्य खनन उद्योग से निकलने वाले ऐसे अपशिष्ट पदार्थों को, जिनके दीर्घकालिक भंडारण की आवश्यकता होती है, कृषि के लिए मूल्यवर्धित संसाधन में बदलना है। इससे अपशिष्ट संचय कम होगा, संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और बाहरी खनिज उर्वरक स्रोतों पर निर्भरता घटाने में भी मदद मिल सकती है।

AM/NS इंडिया की स्थिरता रणनीति का हिस्सा

AM/NS इंडिया पहले से ही संसाधन दक्षता और अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में कई पहल कर रही है। कंपनी स्टील स्क्रैप रीसाइक्लिंग, स्टील स्लैग से निर्मित ‘आकार’ (Aakar) एग्रीगेट उत्पाद, जीरो लिक्विड डिस्चार्ज आधारित जल पुनर्चक्रण प्रणाली तथा अपने औद्योगिक उप-उत्पादों के 90 प्रतिशत से अधिक पुनः उपयोग एवं पुनर्चक्रण जैसे कार्यक्रम चला रही है।

इस नए अनुसंधान सहयोग से कृषि और खनन क्षेत्र के बीच एक अभिनव मॉडल विकसित होने की उम्मीद है, जो भविष्य में टिकाऊ कृषि, मिट्टी स्वास्थ्य सुधार और संसाधन संरक्षण के लिए नई संभावनाएं खोल सकता है।