पुडुचेरी में ब्लू इकोनॉमी को मिली नई रफ्तार: 36.49 करोड़ रुपये की मत्स्य परियोजनाओं का लोकार्पण, समुद्री शैवाल खेती बनेगी तटीय महिलाओं की नई ताकत!
पुडुचेरी, 1 सितंबर। देश में मत्स्य क्षेत्र को आधुनिक बनाने और तटीय समुदायों की आय बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मत्स्य पालन विभाग, भारत सरकार ने पुडुचेरी में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत मत्स्य अवसंरचना परियोजनाओं का शुभारंभ किया। इसके साथ ही सहकारी समितियों के माध्यम से समुद्री शैवाल (सीवीड) खेती को बढ़ावा देने के लिए बहुआयामी क्षमता निर्माण सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य मत्स्य क्षेत्र की पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत करना, तटीय क्षेत्रों में रोजगार सृजन करना तथा ब्लू इकोनॉमी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है।
कार्यक्रम में केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह, केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल, पुडुचेरी के उपराज्यपाल के. कैलाशनाथन, मुख्यमंत्री एन. रंगासामी सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मछुआरे, महिला मत्स्य किसान, सहकारी समितियों के प्रतिनिधि तथा मत्स्य क्षेत्र से जुड़े हितधारकों ने भी भाग लिया।
36.49 करोड़ रुपये की परियोजनाओं से बदलेगी मत्स्य क्षेत्र की तस्वीर
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ने कुल 36.49 करोड़ रुपये की तीन महत्वपूर्ण परियोजनाओं का उद्घाटन किया। इनमें नल्लावाडु फिश लैंडिंग सेंटर, पुडुचेरी फिशिंग हार्बर का उन्नयन और कराईकल में समुद्री शैवाल नवाचार एवं क्षमता विकास केंद्र शामिल हैं। इन परियोजनाओं से मछलियों के सुरक्षित उतारने, भंडारण, विपणन और प्रसंस्करण की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे मछुआरों को बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी।
राजीव रंजन सिंह ने कहा कि ये परियोजनाएं केवल भवन या ढांचागत निर्माण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आने वाले वर्षों में हजारों मछुआरा परिवारों की आय बढ़ाने वाली स्थायी परिसंपत्तियां साबित होंगी।
11 वर्षों में दोगुना हुआ देश का मछली उत्पादन
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना, मत्स्य एवं जलकृषि अवसंरचना विकास कोष (FIDF) और अन्य योजनाओं के कारण भारत का मत्स्य क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2013-14 में जहां देश का कुल मछली उत्पादन 95.7 लाख टन था, वहीं 2024-25 में यह बढ़कर 197.7 लाख टन तक पहुंच गया। इस दौरान समुद्री उत्पादों के निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
उन्होंने कहा कि भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) और गहरे समुद्री क्षेत्रों में मत्स्य संसाधनों की विशाल संभावनाएं मौजूद हैं, जिनका उपयोग करके देश वैश्विक समुद्री खाद्य बाजार में और मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है।
डीप-सी फिशिंग को मिलेगा बढ़ावा
राजीव रंजन सिंह ने मछुआरों को गहरे समुद्र में मत्स्यन गतिविधियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने बताया कि सरकार ने हाई-सी फिशिंग के लिए आवश्यक लेटर ऑफ ऑथराइजेशन (LoA) शुल्क को 25,000 रुपये से घटाकर मात्र 5,000 रुपये कर दिया है। इससे सहकारी समितियों, महिला समूहों और स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी बढ़ेगी।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि EEZ और हाई-सी फिशिंग से जुड़े नए प्रावधान किसी कॉरपोरेट हित के लिए नहीं बल्कि पारंपरिक मछुआरा समुदायों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से लागू किए गए हैं।
समुद्री शैवाल खेती बनेगी महिलाओं की आय का नया स्रोत

कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण सहकारी मॉडल पर आधारित समुद्री शैवाल खेती को बढ़ावा देना रहा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सीवीड खेती तटीय क्षेत्रों की महिलाओं के लिए कम लागत वाला, पर्यावरण अनुकूल और अधिक आय देने वाला व्यवसाय बन सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार समुद्री शैवाल से खाद्य पदार्थ, औषधियां, कॉस्मेटिक उत्पाद, जैव उर्वरक और औद्योगिक सामग्री तैयार की जाती है। वैश्विक बाजार में इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है। सरकार इस क्षेत्र में प्रशिक्षण, तकनीक और बाजार उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दे रही है।
पुडुचेरी बन रहा मत्स्य विकास का मॉडल
पुडुचेरी में पिछले कुछ वर्षों के दौरान मत्स्य क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश हुआ है। थेंगैथिट्टु फिशिंग हार्बर के उन्नयन और नल्लावाडु में अत्याधुनिक फिश लैंडिंग सेंटर की स्थापना से हजारों मछुआरों को सीधा लाभ मिल रहा है। इन सुविधाओं ने मछली की गुणवत्ता बनाए रखने, सुरक्षित नौका संचालन और बेहतर विपणन व्यवस्था सुनिश्चित की है।
उपराज्यपाल के. कैलाशनाथन ने बताया कि वर्ष 2021 से 2025 के बीच पुडुचेरी में मत्स्य क्षेत्र की 350.26 करोड़ रुपये की परियोजनाएं लागू की गई हैं, जिनमें केंद्र सरकार की सहायता का बड़ा योगदान रहा है। अगले पांच वर्षों में 349.14 करोड़ रुपये की अतिरिक्त परियोजनाओं पर कार्य करने की योजना है।
कराईकल बनेगा स्मार्ट फिशिंग हार्बर हब
केंद्र सरकार ने कराईकल को फिशिंग हार्बर क्लस्टर के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। यहां 119.94 करोड़ रुपये की लागत से स्मार्ट एवं एकीकृत फिशिंग हार्बर विकसित किया जा रहा है। यह परियोजना सुरक्षित जहाज ठहराव, आधुनिक मछली हैंडलिंग, स्वच्छ विपणन सुविधाओं और बेहतर कोल्ड चेन व्यवस्था से लैस होगी।
इस क्लस्टर मॉडल से फिश फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन (FFPOs) और मत्स्य सहकारी समितियों को तकनीक, वित्त, मूल्य संवर्धन और बाजार तक पहुंच आसान होगी।
मछुआरों के बच्चों की शिक्षा का पूरा खर्च उठाएगी सरकार
मुख्यमंत्री एन. रंगासामी ने कहा कि राज्य सरकार मछुआरों के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने घोषणा की कि मछुआरा परिवारों के बच्चों की शिक्षा का खर्च स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा तक सरकार वहन करेगी। इसके अलावा डीजल सब्सिडी, नौका सहायता, मत्स्य प्रतिबंध अवधि सहायता और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ भी मछुआरों को दिया जा रहा है।
ब्लू इकोनॉमी में नई संभावनाएं
विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक मत्स्य बंदरगाह, फिश लैंडिंग सेंटर, डीप-सी फिशिंग और समुद्री शैवाल खेती जैसी पहलें न केवल मत्स्य उत्पादन बढ़ाएंगी बल्कि ग्रामीण रोजगार, निर्यात और महिला सशक्तिकरण को भी गति देंगी। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत अपनाया गया क्लस्टर आधारित मॉडल देश के तटीय राज्यों के लिए एक नई विकास रणनीति के रूप में उभर रहा है।
पुडुचेरी में शुरू हुई ये नई परियोजनाएं इस बात का संकेत हैं कि आने वाले वर्षों में भारत की ब्लू इकोनॉमी केवल समुद्री संसाधनों के दोहन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि टिकाऊ विकास, महिला सशक्तिकरण और तटीय समृद्धि का आधार भी बनेगी।

























