रक्षाबंधन पर महिला गन्ना किसानों को मिला विशेष उपहार!
लखनऊ, 27 अगस्त 2026। उत्तर प्रदेश सरकार ने पेराई सत्र 2026-27 के लिए नई गन्ना आपूर्ति एवं कैलेण्डरिंग नीति जारी करते हुए गन्ना किसानों के हित में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। नई नीति में महिला किसानों, दिव्यांग किसानों, छोटे एवं सीमांत गन्ना उत्पादकों, पूर्व सैनिकों तथा यंत्रीकरण अपनाने वाले किसानों को विशेष सुविधाएं प्रदान की गई हैं। सरकार का दावा है कि इन फैसलों से गन्ना आपूर्ति व्यवस्था अधिक पारदर्शी, समयबद्ध और किसान हितैषी बनेगी।
रक्षाबंधन पर महिला गन्ना किसानों को विशेष उपहार
नई नीति के तहत लघु एवं अति लघु महिला गन्ना किसानों को गन्ना आपूर्ति में विशेष प्राथमिकता दी गई है। उनकी 100 प्रतिशत पेड़ी गन्ने की पर्चियां पहले और दूसरे पक्ष में तथा पौधा गन्ने की पर्चियां सातवें और आठवें पक्ष में जारी की जाएंगी। इससे महिला किसानों को अधिकतम एक माह के भीतर गन्ना आपूर्ति का अवसर मिल सकेगा।
पहली बार दिव्यांग किसानों के लिए विशेष व्यवस्था
प्रदेश में पहली बार दिव्यांग लघु गन्ना किसानों (90 कुंतल तक सट्टाधारक) को विशेष सुविधा प्रदान की गई है। इन किसानों को सामान्य अनुपात व्यवस्था से मुक्त रखते हुए पेड़ी गन्ने की पर्चियां प्रथम पक्ष में तथा पौधा गन्ने की पर्चियां सातवें पक्ष में जारी की जाएंगी। इससे उनका गन्ना लगभग 15 दिनों के भीतर मिलों तक पहुंच सकेगा।
छोटे किसानों की परिभाषा में विस्तार
सरकार ने छोटे गन्ना किसानों की श्रेणी का दायरा बढ़ा दिया है। अब 90 कुंतल तक सट्टा धारक किसानों को भी लघु किसान माना जाएगा। पहले बेसिक मोड की 9 पर्चियां निर्धारित थीं, जिन्हें बढ़ाकर 10 पर्चियां कर दिया गया है। ऐसे किसानों को पेड़ी गन्ने की आपूर्ति पहले से तीसरे पक्ष तथा पौधा गन्ने की आपूर्ति सातवें से नौवें पक्ष तक उपलब्ध कराई जाएगी।
यंत्रीकरण को मिलेगा बढ़ावा
गन्ना खेती की लागत कम करने और श्रम संकट से निपटने के लिए सरकार ने यंत्रीकरण को नई नीति का प्रमुख आधार बनाया है। ट्रेंच प्लांटिंग या दोहरी पंक्ति विधि अपनाने वाले किसानों को गन्ना आपूर्ति में प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अलावा ट्रेंच विधि से बुवाई करने वाले किसानों को सामान्य किसानों की तुलना में 15 दिन पहले गन्ना आपूर्ति का अवसर मिलेगा।
सरकार ने सभी गन्ना बाहुल्य जिलों में केन हार्वेस्टर सेंटर स्थापित करने का निर्णय लिया है। केन हार्वेस्टर से कटाई कराने के इच्छुक किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार 9 के गुणांक में विशेष हार्वेस्टर मोड की पर्चियां जारी की जाएंगी। इससे कटाई, छिलाई और लदाई की प्रक्रिया अधिक तेज और कम खर्चीली हो सकेगी।
नए गन्ना सदस्यों को भी मिलेगा लाभ
30 सितंबर 2026 तक सदस्य बने नए किसानों को भी समयबद्ध गन्ना आपूर्ति का लाभ मिलेगा। जिन किसानों के पास पेड़ी या शरदकालीन पौधा गन्ना है, उनकी पर्चियां चौथे पक्ष से जारी होंगी, जबकि केवल पौधा गन्ना रखने वाले किसानों को छठे पक्ष से आपूर्ति का अवसर मिलेगा।
20 प्रतिशत अतिरिक्त गन्ना तौलने की अनुमति
किसानों की परिवहन लागत कम करने और अतिरिक्त गन्ने की समस्या दूर करने के लिए मिलों को पर्ची पर निर्धारित वजन से 20 प्रतिशत तक अधिक गन्ना तौलने की अनुमति दी गई है। इसके अलावा अतिरिक्त उपलब्ध गन्ने की आपूर्ति के लिए निशुल्क अतिरिक्त सट्टा व्यवस्था भी लागू की जाएगी।
संयुक्त गन्ना कैलेंडर की सुविधा
ऐसे परिवार जिनकी कृषि भूमि परिवार के एक से अधिक सदस्यों के नाम दर्ज है, वे आपसी सहमति से किसी एक सदस्य के माध्यम से गन्ना आपूर्ति कर सकेंगे। इसके लिए 50 रुपये के स्टाम्प पेपर पर सहमति पत्र प्रस्तुत करना होगा। इससे पारिवारिक स्तर पर गन्ना प्रबंधन आसान होगा।
सैनिकों और पूर्व सैनिकों को 20 प्रतिशत प्राथमिकता
नई नीति में सैनिकों, अर्धसैनिक बलों, भूतपूर्व सैनिकों, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और उनके आश्रितों के सम्मान में गन्ना आपूर्ति में 20 प्रतिशत अतिरिक्त प्राथमिकता देने का प्रावधान किया गया है।
डिजिटल होगी पूरी गन्ना आपूर्ति व्यवस्था
प्रदेश के सभी गन्ना किसानों को गन्ना सर्वेक्षण, बेसिक कोटा, सट्टा निर्धारण, कैलेंडरिंग, पर्ची निर्गमन और गन्ना आपूर्ति की जानकारी एसएमएस पोर्टल और ई-गन्ना ऐप के माध्यम से घर बैठे उपलब्ध होगी। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और किसानों को कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
शिकायतों का होगा त्वरित निस्तारण
गन्ना किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रत्येक गन्ना समिति क्षेत्र में शिकायत अधिकारी नामित किए जाएंगे। किसान ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने के साथ-साथ टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 पर भी अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे।
चीनी उद्योग और किसानों दोनों को मिलेगा लाभ
विशेषज्ञों के अनुसार नई गन्ना आपूर्ति एवं कैलेण्डरिंग नीति से गन्ने की समयबद्ध आपूर्ति, मिलों की पेराई क्षमता का बेहतर उपयोग, परिवहन लागत में कमी तथा गन्ना खेती में यंत्रीकरण को बढ़ावा मिलेगा। महिला, दिव्यांग और छोटे किसानों को प्राथमिकता देने से सामाजिक समावेशन भी मजबूत होगा, जबकि डिजिटल व्यवस्था से पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनेगी।

























