श्री अन्न से डिजिटल खेती तक, ICRISAT के साथ बिहार की नई कृषि योजना!

जलवायु-अनुकूल खेती, डिजिटल कृषि और श्री अन्न मूल्य श्रृंखला पर होगा विशेष फोकस!

हैदराबाद। बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने हैदराबाद स्थित अंतरराष्ट्रीय अर्ध-शुष्क उष्णकटिबंधीय फसल अनुसंधान संस्थान (ICRISAT) का दौरा कर बिहार की कृषि को जलवायु-अनुकूल, आधुनिक और टिकाऊ बनाने के लिए संस्थान के महानिदेशक, वरिष्ठ वैज्ञानिकों और अधिकारियों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श किया। इस दौरान कृषि विभाग के प्रधान सचिव सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

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बैठक में श्री अन्न (मिलेट्स), फसल विविधीकरण, प्राकृतिक खेती, डिजिटल तकनीक और डेटा आधारित कृषि समाधानों को बढ़ावा देने पर विशेष चर्चा हुई। साथ ही ICRISAT द्वारा विकसित डिजिटल क्रॉप सिस्टम का अवलोकन किया गया, जिससे किसानों को मौसम, मिट्टी और फसल प्रबंधन से जुड़ी सटीक जानकारी उपलब्ध कराने की संभावनाओं पर विचार किया गया।

₹115 करोड़ से अधिक की परियोजना से किसानों तक पहुंचेगी आधुनिक तकनीक

बिहार सरकार, ICRISAT, Dr. Rajendra Prasad Central Agricultural University (RPCAU) और Bihar Agricultural University (BAU) के सहयोग से लगभग 115.19 करोड़ रुपये की परियोजना संचालित की जा रही है। इस परियोजना का उद्देश्य कृषि अनुसंधान, नवाचार और अत्याधुनिक तकनीकों को प्रयोगशाला से सीधे किसानों के खेतों तक पहुंचाना है।

कृषि मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का संकल्प “लैब टू लैंड” की अवधारणा को मजबूत करना है, ताकि वैज्ञानिक अनुसंधान का वास्तविक लाभ किसानों की उत्पादकता और आय वृद्धि में दिखाई दे।

बिहार सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर मिलेट्स वैल्यू चेन की प्रगति की समीक्षा

दौरे के दौरान बिहार सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर मिलेट्स वैल्यू चेन (BCoEMVC) परियोजना की प्रगति की भी समीक्षा की गई। इस पहल का उद्देश्य बिहार में श्री अन्न आधारित मूल्य श्रृंखला को मजबूत करना, प्रसंस्करण एवं विपणन को बढ़ावा देना और किसानों के लिए नए आय स्रोत विकसित करना है।

विशेषज्ञों के साथ हुई चर्चा में जलवायु-अनुकूल खेती, कृषि अनुसंधान, मूल्य संवर्धन, पोषण सुरक्षा और किसानों की आय बढ़ाने जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे।

जीनबैंक से एग्रीबिजनेस इनोवेशन तक आधुनिक तकनीकों का अवलोकन

प्रतिनिधिमंडल ने ICRISAT की अत्याधुनिक सुविधाओं का भी अवलोकन किया। इनमें जीनबैंक, स्पीड ब्रीडिंग, जीनोमिक्स, रीजनरेटिव एग्रीकल्चर और एग्रीबिजनेस इनोवेशन प्लेटफॉर्म प्रमुख रहे। इन तकनीकों का उपयोग जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने, उच्च उत्पादक किस्मों के विकास और कृषि क्षेत्र में उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है।

पूर्वी भारत में मिलेट्स हब बनने की दिशा में बिहार

कृषि विभाग का लक्ष्य BCoEMVC को खाद्य एवं पोषण सुरक्षा के क्षेत्र में एक मॉडल सेंटर के रूप में विकसित करना है। इसके साथ ही बिहार को श्री अन्न की उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन श्रृंखला में पूर्वी भारत के अग्रणी राज्यों में स्थापित करने की दिशा में ICRISAT के साथ सहयोग को और मजबूत किया जाएगा।

जानकारों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन, घटती कृषि जोत और बढ़ती पोषण चुनौतियों के बीच मिलेट्स आधारित कृषि प्रणाली किसानों के लिए अधिक लाभकारी और टिकाऊ विकल्प बन सकती है।

किसानों, वैज्ञानिकों और युवाओं की साझेदारी से बनेगा नया कृषि मॉडल

बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि बिहार के किसान, कृषि वैज्ञानिक, युवा और कृषि उद्यमी मिलकर नवाचार आधारित कृषि विकास का नया मॉडल तैयार कर सकते हैं। आधुनिक तकनीक, अनुसंधान और बाजार आधारित दृष्टिकोण के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने तथा कृषि को लाभकारी बनाने की दिशा में राज्य सरकार निरंतर प्रयास कर रही है।

“समृद्ध किसान, समृद्ध बिहार और विकसित भारत” के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए कृषि क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी हस्तांतरण को और गति देने पर सहमति बनी।