September 29, 2026 3:18 AM

Krishi Times

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पानी देखकर बोएं फसल, किसानों को मिला नया संदेश!

रबी अभियान 2026 का शुभारंभ: जलवायु-अनुकूल खेती, जल बजट और दलहन-तिलहन आत्मनिर्भरता पर केंद्र का बड़ा फोकस!

केंद्र और राज्य मिलकर तैयार करेंगे रबी सीजन की रणनीति, किसानों को समय पर बीज, खाद और बाजार उपलब्ध कराने पर जोर

नई दिल्ली। देश में रबी सीजन की तैयारियों को गति देने के उद्देश्य से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन–रबी अभियान 2026 का शुभारंभ नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर (एनएएससी), पूसा में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया। सम्मेलन में देशभर के कृषि मंत्री, कृषि सचिव, कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपति, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) के प्रतिनिधि और विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि रबी 2026 केवल एक कृषि मौसम नहीं, बल्कि विकसित और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि बदलते मौसम, अनियमित वर्षा, बढ़ते तापमान और जल संकट जैसी चुनौतियों के बीच कृषि क्षेत्र को नई सोच और वैज्ञानिक रणनीति के साथ आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय, आधुनिक तकनीक का उपयोग और जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन ही कृषि क्षेत्र को मजबूत बना सकता है।

जल बजट बनेगा रबी सीजन की सफलता का आधार

सम्मेलन में सबसे अधिक चर्चा जल प्रबंधन को लेकर हुई। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रत्येक राज्य और जिले को रबी सीजन शुरू होने से पहले अपना “जल बजट” तैयार करना चाहिए। यानी यह स्पष्ट आकलन होना चाहिए कि क्षेत्र में सिंचाई के लिए कितना पानी उपलब्ध है और उसी के अनुसार फसलों की योजना बनाई जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि जहां जल संसाधन सीमित हैं, वहां कम पानी की आवश्यकता वाली फसलों जैसे चना, मसूर, सरसों और अन्य दलहन-तिलहन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। वहीं जिन क्षेत्रों में पर्याप्त सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध हैं, वहां अन्य रबी फसलों का विस्तार किया जा सकता है।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि जल बजट आधारित खेती भविष्य की आवश्यकता है। इससे जल संरक्षण के साथ-साथ फसल विफलता के जोखिम को भी कम किया जा सकता है।

सूखे की चुनौती से निपटने के लिए केंद्र सक्रिय

शिवराज सिंह चौहान ने महाराष्ट्र और कर्नाटक में बन रही सूखे जैसी परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र के कई जिलों में वर्षा की कमी के कारण स्थिति गंभीर बनी हुई है, जबकि कर्नाटक भी जल संकट का सामना कर रहा है।

उन्होंने घोषणा की कि केंद्र सरकार की टीमें प्रभावित क्षेत्रों का विस्तृत सर्वेक्षण करेंगी। 3 अक्टूबर को कर्नाटक में केंद्रीय टीम जमीनी आकलन करेगी और महाराष्ट्र में भी जल्द ही विशेषज्ञ दल भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि किसानों को किसी भी परिस्थिति में अकेला नहीं छोड़ा जाएगा और केंद्र सरकार हर संभव सहायता उपलब्ध कराएगी।

समय पर बुवाई से ही मिलेगा बेहतर उत्पादन

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि रबी फसलों में समय पर बुवाई अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि बुवाई में देरी होती है तो अंकुरण प्रभावित होता है और उत्पादन क्षमता भी घट जाती है। उन्होंने राज्यों को निर्देश दिया कि किसानों तक समय पर जानकारी पहुंचाई जाए ताकि वे स्थानीय मौसम और नमी की स्थिति को ध्यान में रखते हुए बुवाई कर सकें।

उन्होंने कहा कि विशेष रूप से वर्षा आधारित क्षेत्रों में नमी संरक्षण और खेत तैयारी पर अभी से काम शुरू करना होगा ताकि बुवाई में अनावश्यक देरी न हो।

गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराना राज्यों की प्राथमिक जिम्मेदारी

रबी उत्पादन बढ़ाने के लिए गुणवत्तापूर्ण बीज की उपलब्धता को सबसे महत्वपूर्ण बताते हुए शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों से कहा कि वे बीज मांग, भंडारण और वितरण की पूरी योजना पहले से तैयार करें।

उन्होंने चिंता व्यक्त की कि कई बार राज्यों द्वारा बीज की मांग समय पर नहीं भेजी जाती, जिसके कारण किसानों तक गुणवत्तापूर्ण बीज देर से पहुंचते हैं। उन्होंने आईसीएआर के वैज्ञानिकों और कृषि विश्वविद्यालयों को क्षेत्र विशेष के लिए उपयुक्त किस्मों की पहचान कर किसानों तक पहुंचाने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि नई विकसित किस्मों को खेत तक पहुंचाने की गति बढ़ानी होगी ताकि किसान नई तकनीकों का लाभ उठा सकें।

दलहन और तिलहन को मिलेगा विशेष प्रोत्साहन

रबी अभियान 2026 में केंद्र सरकार ने दलहन और तिलहन उत्पादन बढ़ाने को प्रमुख लक्ष्य बनाया है। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि देश को खाद्य तेल और दालों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए राज्यों को विशेष रणनीति तैयार करनी होगी।

उन्होंने सुझाव दिया कि धान कटाई के बाद खाली रहने वाले क्षेत्रों में चना, मसूर और सरसों जैसी फसलों को बढ़ावा दिया जाए। इन फसलों में पानी की आवश्यकता कम होती है और किसानों को बेहतर लाभ भी मिल सकता है।

उन्होंने राज्यों से कहा कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में दलहन और तिलहन के संभावित रकबे का आकलन कर स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करें।

बीज से बाजार तक मजबूत व्यवस्था जरूरी

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केवल उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिले, इसके लिए खरीद और विपणन की व्यवस्था भी मजबूत होनी चाहिए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि राज्य सरकारें समय पर खरीद व्यवस्था नहीं कर पाती हैं, तो केंद्र की एजेंसियां नेफेड और एनसीसीएफ सीधे किसानों से खरीद कर सकती हैं। इसके लिए राज्यों को आवश्यक प्रशासनिक और कर संबंधी सुविधाएं सुनिश्चित करनी होंगी।

उन्होंने कहा कि किसानों का भरोसा तभी बढ़ेगा जब उन्हें यह विश्वास होगा कि उनकी उपज का बाजार उपलब्ध है।

‘खेत बचाओ अभियान’ को रबी में भी मिलेगा विस्तार

रबी सम्मेलन में मिट्टी की सेहत और संतुलित उर्वरक उपयोग पर भी विशेष जोर दिया गया। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अधिक मात्रा में रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से उत्पादन लागत बढ़ती है और मिट्टी की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है।

उन्होंने खरीफ सीजन में चलाए गए ‘खेत बचाओ अभियान’ को रबी सीजन में भी जारी रखने का सुझाव दिया। इस अभियान के तहत किसानों को संतुलित पोषण प्रबंधन, मृदा परीक्षण और वैज्ञानिक सलाह के आधार पर उर्वरकों के उपयोग के लिए प्रेरित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे न केवल लागत कम होगी बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी लंबे समय तक बनी रहेगी।

प्राकृतिक खेती को बाजार से जोड़ने की जरूरत

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश में प्राकृतिक खेती के प्रति किसानों की रुचि लगातार बढ़ रही है। कई राज्यों में हजारों किसान इस पद्धति को अपना रहे हैं, लेकिन अभी भी सबसे बड़ी चुनौती उत्पादों की मार्केटिंग और प्रमाणन है।

उन्होंने राज्यों को प्राकृतिक खेती उत्पादों के लिए अलग ब्रांड विकसित करने, प्रमाणन प्रणाली मजबूत करने और बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में काम करने की सलाह दी। उनका मानना है कि बेहतर ब्रांडिंग से किसानों को प्रीमियम मूल्य मिल सकता है।

फार्मर आईडी और किसान क्रेडिट कार्ड पर विशेष जोर

सम्मेलन में डिजिटल कृषि और वित्तीय समावेशन को भी प्रमुख एजेंडा बनाया गया। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसान क्रेडिट कार्ड की पहुंच अभी भी कई छोटे और सीमांत किसानों तक नहीं पहुंच पाई है।

उन्होंने राज्यों को निर्देश दिया कि वे ऐसे किसानों की पहचान करें जिन्हें अभी तक संस्थागत ऋण का लाभ नहीं मिला है। साथ ही फार्मर आईडी और एग्रीस्टैक परियोजना को तेजी से लागू करने पर भी जोर दिया गया ताकि किसानों को योजनाओं का लाभ सीधे और पारदर्शी तरीके से मिल सके।

हर सप्ताह होगी फसल और बाजार की निगरानी

कृषि मंत्रालय ने राज्यों को निर्देश दिया कि रबी सीजन के दौरान साप्ताहिक समीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाया जाए। इसमें फसलों की स्थिति, बुवाई प्रगति, कीट एवं रोग प्रबंधन, मौसम की स्थिति और बाजार भावों की नियमित निगरानी शामिल होगी।

मंत्रालय का मानना है कि रियल-टाइम निगरानी से किसी भी समस्या की पहचान समय रहते की जा सकेगी और किसानों को त्वरित सहायता प्रदान की जा सकेगी।

आईसीएआर ने बताईं आगामी प्राथमिकताएं

आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट ने कहा कि आने वाले वर्षों में कृषि क्षेत्र को जलवायु-अनुकूल, तकनीक-आधारित और संसाधन-कुशल बनाना होगा। उन्होंने दलहन और तिलहन उत्पादन बढ़ाने, फसल विविधीकरण, डिजिटल कृषि और जोखिम प्रबंधन को प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल बताया।

उन्होंने जानकारी दी कि आगामी सीजन में छह राज्यों के 37 जिलों में लगभग 10,000 एकड़ क्षेत्र में ग्रीन अमोनिया आधारित कृषि प्रदर्शन कार्यक्रम चलाया जाएगा। इसका उद्देश्य टिकाऊ कृषि तकनीकों को बढ़ावा देना है।

रबी 2026 के लिए बनेगी राष्ट्रीय कार्ययोजना

दो दिवसीय सम्मेलन में विभिन्न विषयों पर समूह चर्चा और राज्यों के साथ विचार-विमर्श के बाद रबी अभियान 2026 के लिए एक समग्र राष्ट्रीय कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इसमें जलवायु-अनुकूल खेती, जल प्रबंधन, दलहन-तिलहन आत्मनिर्भरता, डिजिटल कृषि, बाजार सुधार और किसानों की आय बढ़ाने से जुड़े सुझाव शामिल किए जाएंगे।

सारांश

राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन–रबी अभियान 2026 से स्पष्ट संकेत मिला है कि आने वाले वर्षों में कृषि नीति का केंद्र केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं होगा, बल्कि जल संरक्षण, फसल विविधीकरण, डिजिटल कृषि, मिट्टी स्वास्थ्य और किसानों की आय में स्थायी वृद्धि भी होगा। जल बजट, दलहन-तिलहन विस्तार, फार्मर आईडी और संतुलित उर्वरक उपयोग जैसे विषय यह दर्शाते हैं कि कृषि क्षेत्र को जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के अनुरूप ढालने की दिशा में केंद्र सरकार और राज्य सरकारें मिलकर नई रणनीति तैयार कर रही हैं।