सिक्किम में डेयरी विकास को मिलेगी नई रफ्तार, दूध उत्पादन में 79% की वृद्धि; मंगन डेयरी प्लांट का होगा आधुनिकीकरण
स्वदेशी सिरी मवेशियों के संरक्षण के लिए बनेगा उत्कृष्टता केंद्र, डेयरी सहकारी समितियों का नेटवर्क बढ़ाने पर जोर; एनडीडीबी को सौंपी गई विकास की जिम्मेदारी
गंगटोक, – सिक्किम में डेयरी क्षेत्र को आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने कई महत्वपूर्ण पहल की घोषणा की है। राज्य में दूध उत्पादन बढ़ाने, डेयरी प्रसंस्करण क्षमता मजबूत करने, स्थानीय पशु नस्लों के संरक्षण और दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह) ने गंगटोक में सिक्किम मिल्क यूनियन (एसएमयू) के कार्यक्रम में भाग लेते हुए डेयरी विकास से जुड़ी कई योजनाओं और पहलों की शुरुआत की।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सिक्किम में डेयरी से जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, सहकारी समितियों का विस्तार करना और दूध एवं दुग्ध उत्पादों के मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देना रहा। इस दौरान राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया गया।
डेयरी गुणवत्ता जांच के लिए माइक्रोबायोलॉजी प्रयोगशाला शुरू
केंद्रीय मंत्री ने राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (एनपीडीडी) के तहत सिक्किम मिल्क यूनियन की माइक्रोबायोलॉजी प्रयोगशाला का उद्घाटन किया। करफेक्टर स्थित इस प्रयोगशाला के माध्यम से दूध और दुग्ध उत्पादों की सूक्ष्मजीव संबंधी जांच तथा गुणवत्ता मूल्यांकन की सुविधाएं मजबूत होंगी।
डेयरी क्षेत्र में गुणवत्ता नियंत्रण और खाद्य सुरक्षा की दृष्टि से इस सुविधा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे दूध की गुणवत्ता की निगरानी, संभावित संदूषण की पहचान और उपभोक्ताओं तक सुरक्षित दुग्ध उत्पाद पहुंचाने में मदद मिलेगी।
मंत्री ने सिक्किम मिल्क यूनियन की ओर से लगाए गए प्रदर्शनी स्टॉलों का भी निरीक्षण किया। यहां स्थानीय डेयरी उत्पादों और यूनियन की विभिन्न गतिविधियों को प्रदर्शित किया गया।
चुरपी को मिलेगी नई बाजार पहचान, एफपीओ के उत्पाद भी लॉन्च
कार्यक्रम में सिक्किम के पारंपरिक डेयरी उत्पाद चुरपी की पहचान और बाजार पहुंच बढ़ाने के लिए ‘चुरपी ट्रेसेबिलिटी’ पहल शुरू की गई। इसका उद्देश्य उत्पाद की उत्पत्ति, उत्पादन प्रक्रिया और आपूर्ति शृंखला से जुड़ी जानकारी को व्यवस्थित करना है। इससे पारंपरिक उत्पाद की पहचान मजबूत करने और बाजार में उसकी विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
इसके साथ ही किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) की ओर से विकसित ‘फॉडर प्लस’ उत्पादों का भी शुभारंभ किया गया। इस पहल के जरिए पशुओं के लिए गुणवत्तापूर्ण चारे की उपलब्धता, किसानों के सामूहिक प्रयासों और पशुपालन आधारित अतिरिक्त आय के अवसरों को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।
पांच नई डेयरी सहकारी समितियों को मिला पंजीकरण
सिक्किम में सहकारी डेयरी नेटवर्क के विस्तार के लिए पांच नवगठित डेयरी सहकारी समितियों को पंजीकरण प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। इसका उद्देश्य गांवों में दुग्ध उत्पादकों को संगठित व्यवस्था से जोड़ना और दूध संग्रह एवं विपणन के लिए संस्थागत नेटवर्क तैयार करना है।
डेयरी सहकारी समितियां किसानों से दूध संग्रह, गुणवत्ता जांच, भुगतान व्यवस्था और बाजार तक पहुंच बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। नई समितियों के गठन से राज्य के अधिक ग्रामीण परिवारों को संगठित डेयरी कारोबार से जुड़ने का अवसर मिल सकता है।
दस वर्षों में दूध उत्पादन 79 प्रतिशत बढ़ा
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने सिक्किम में डेयरी क्षेत्र की प्रगति से जुड़े आंकड़े साझा किए। उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में राज्य का दैनिक दूध उत्पादन 1.37 लाख लीटर से बढ़कर 2.45 लाख लीटर तक पहुंच गया है। यह लगभग 79 प्रतिशत की वृद्धि है।
डेयरी सहकारी समितियों के विस्तार में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2014-15 में राज्य में 389 डेयरी सहकारी समितियां थीं, जिनकी संख्या वर्ष 2025-26 में बढ़कर 733 हो गई। इस तरह समितियों के नेटवर्क में करीब 88 प्रतिशत का विस्तार हुआ है।
वहीं, उपभोक्ताओं को प्रतिदिन होने वाली दूध की आपूर्ति भी 28 हजार लीटर से बढ़कर 56 हजार लीटर हो गई है। इन आंकड़ों से राज्य में दूध उत्पादन, संग्रह और विपणन व्यवस्था के विस्तार का संकेत मिलता है।
सिक्किम डेयरी क्षेत्र की प्रमुख उपलब्धियां
- दूध उत्पादन: 1.37 लाख से बढ़कर 2.45 लाख लीटर प्रतिदिन। दूध उत्पादन में वृद्धि: लगभग 79 प्रतिशत।
- डेयरी सहकारी समितियां: 389 से बढ़कर 733। सहकारी समितियों में वृद्धि: लगभग 88 प्रतिशत।
- दैनिक उपभोक्ता दूध आपूर्ति: 28 हजार से बढ़कर 56 हजार लीटर।
दूध उत्पादन और खरीद में आत्मनिर्भरता पर जोर
केंद्रीय मंत्री ने एनडीडीबी से सिक्किम में डेयरी विकास के प्रयास तेज करने और जरूरत के अनुसार अतिरिक्त मानव संसाधन तैनात करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि राज्य को दूध उत्पादन और दुग्ध खरीद के मामले में अधिक आत्मनिर्भर बनाने के लिए संगठित सहकारी व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है।
उन्होंने दूध की गुणवत्ता सुनिश्चित करने, मिलावट पर नियंत्रण रखने और दुग्ध उत्पादकों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने में सहकारी समितियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
वाराणसी मॉडल से समझाया डेयरी विकास का महत्व
डेयरी क्षेत्र में संस्थागत सहयोग के परिणामों का उल्लेख करते हुए मंत्री ने वाराणसी का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि एनडीडीबी के हस्तक्षेप से वहां वर्ष 2022 में प्रतिदिन लगभग 14 हजार लीटर दूध का संग्रह होता था, जो बढ़कर करीब 2.5 लाख लीटर प्रतिदिन तक पहुंच गया है।
इस दौरान किसानों को मिलने वाले दूध के दाम में भी बढ़ोतरी हुई। पहले जहां उत्पादकों को 28 से 30 रुपये प्रति लीटर मिलते थे, वहीं अब यह राशि लगभग 42 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है।
उन्होंने गोवर्धन पहल का भी उल्लेख किया। इसके तहत गोबर का उपयोग बायोगैस संयंत्रों में करके पशुपालकों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर विकसित किए जा रहे हैं। यह मॉडल पशुपालन को केवल दूध उत्पादन तक सीमित न रखकर गोबर आधारित ऊर्जा और जैविक संसाधनों के कारोबार से जोड़ने की संभावनाएं भी प्रस्तुत करता है।
स्वदेशी सिरी मवेशियों के संरक्षण के लिए बनेगा उत्कृष्टता केंद्र
सिक्किम की स्थानीय पशु नस्लों के संरक्षण और उनकी उत्पादकता बढ़ाने के लिए भी महत्वपूर्ण घोषणा की गई। केंद्रीय मंत्री ने मंगन क्षेत्र के दौरे का उल्लेख करते हुए बताया कि यहां स्थानीय मवेशियों से औसतन लगभग तीन लीटर दूध प्रतिदिन प्राप्त होता है।
उन्होंने स्वदेशी सिरी मवेशियों के संरक्षण और विकास के लिए उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने हेतु केंद्र सरकार की ओर से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की घोषणा की।
प्रस्तावित केंद्र में नस्ल सुधार, आनुवंशिक क्षमता के बेहतर उपयोग और उन्नत प्रजनन तकनीकों को बढ़ावा दिया जाएगा। इसमें इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग भी प्रस्तावित है, ताकि स्थानीय नस्लों की उपयोगिता और दूध उत्पादन क्षमता में सुधार किया जा सके।
केंद्रीय मंत्री ने सिक्किम सरकार से इस संबंध में औपचारिक प्रस्ताव प्रस्तुत करने को कहा, जिससे परियोजना को आगे बढ़ाया जा सके।
मंगन डेयरी प्लांट का होगा व्यापक आधुनिकीकरण
सिक्किम के डेयरी प्रसंस्करण ढांचे को मजबूत करने के लिए मंगन जिले में स्थित डेयरी संयंत्र के आधुनिकीकरण की भी घोषणा की गई। मंत्री के अनुसार, एनडीडीबी मिजोरम में लागू किए गए मॉडल की तर्ज पर मंगन डेयरी प्लांट के व्यापक आधुनिकीकरण के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के साथ परियोजना का कार्यान्वयन भी करेगा।
इससे दूध के प्रसंस्करण, भंडारण और दुग्ध उत्पादों के निर्माण की क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। स्थानीय स्तर पर दूध के बेहतर उपयोग से पशुपालकों को बाजार उपलब्ध कराने और राज्य में डेयरी मूल्य शृंखला विकसित करने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
पूर्वोत्तर की अर्थव्यवस्था में डेयरी क्षेत्र की बढ़ेगी भूमिका
कार्यक्रम के समापन पर केंद्रीय मंत्री ने सिक्किम के डेयरी और कृषि विकास के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि राज्य की आर्थिक प्रगति पूर्वोत्तर क्षेत्र को मजबूत बनाने और प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर पूर्वोत्तर के विजन को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है।
सिक्किम में दूध उत्पादन में वृद्धि, सहकारी समितियों का विस्तार, गुणवत्ता जांच प्रयोगशाला, चुरपी की ट्रेसेबिलिटी, स्थानीय पशु नस्लों का संरक्षण और मंगन डेयरी संयंत्र का आधुनिकीकरण जैसी पहलें राज्य के डेयरी क्षेत्र को नई दिशा दे सकती हैं।
हालांकि, इन पहलों का वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि परियोजनाओं का क्रियान्वयन कितनी तेजी से होता है और इसका लाभ छोटे पशुपालकों, दुग्ध उत्पादकों तथा ग्रामीण सहकारी समितियों तक किस स्तर पर पहुंचता है।






























