सिक्किम में डेयरी क्षेत्र के आधुनिकीकरण को NDDB का सहयोग, मोबाइल मिल्क कलेक्शन और जैविक दूध पर जोर!
मंगन डेयरी प्लांट की क्षमता बढ़ाने, दूध की गुणवत्ता सुधारने और किसानों की आय बढ़ाने की योजना; गोबर से बायोगैस उत्पादन को भी मिलेगा प्रोत्साहन
कृषि टाइम्स | नई दिल्ली/मंगन -सिक्किम के पहाड़ी क्षेत्रों में डेयरी विकास, दूध संग्रहण व्यवस्था को मजबूत बनाने और दुग्ध उत्पादकों की आय बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) ने तकनीकी एवं संस्थागत सहयोग देने की पहल की है। NDDB के अध्यक्ष डॉ. मीनेश शाह ने सिक्किम के मंगन स्थित नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट मिल्क यूनियन (NDMU) के डेयरी प्लांट का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने मौजूदा प्रसंस्करण ढांचे, सुविधाओं और संचालन व्यवस्था की समीक्षा की। साथ ही डेयरी सहकारी समितियों के प्रतिनिधियों, दुग्ध उत्पादकों, यूनियन के अधिकारियों और निदेशक मंडल के सदस्यों के साथ बातचीत की।
यह दौरा व्हाइट रिवोल्यूशन 2.0 के शुभारंभ कार्यक्रम के दौरान हुआ। इसका उद्देश्य सिक्किम में दुग्ध सहकारी संस्थाओं को मजबूत करने के साथ दूध उत्पादन, संग्रहण, प्रसंस्करण और विपणन की पूरी व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है।
डेयरी प्लांट का होगा व्यापक आकलन और आधुनिकीकरण
डॉ. मीनेश शाह ने बताया कि NDDB मंगन स्थित डेयरी प्लांट का व्यापक तकनीकी आकलन करेगा। इसके आधार पर प्लांट को मजबूत बनाने और आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के लिए आवश्यकताओं की पहचान की जाएगी।
इसमें दूध प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने, परिचालन दक्षता सुधारने, दूध की गुणवत्ता बनाए रखने और मूल्य संवर्धित दुग्ध उत्पादों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा दूध उत्पादन एवं खरीद व्यवस्था, सहकारी संस्थाओं की कार्यक्षमता और बाजार तक उत्पादों की पहुंच बेहतर बनाने के अवसरों पर भी चर्चा हुई।
पहाड़ी क्षेत्रों में मोबाइल मिल्क कलेक्शन यूनिट बनेगी विकल्प
सिक्किम की भौगोलिक परिस्थितियां डेयरी क्षेत्र के सामने कई चुनौतियां खड़ी करती हैं। पहाड़ी रास्ते, दूर-दराज बसे गांव और बिखरी हुई आबादी के कारण दूध संग्रहण एवं परिवहन की लागत बढ़ जाती है। ऐसे में NDDB ने मोबाइल मिल्क कलेक्शन, टेस्टिंग और चिलिंग यूनिट के इस्तेमाल की संभावनाएं तलाशने का सुझाव दिया।
यह मोबाइल यूनिट NDDB की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी इंडियन डेयरी मशीनरी कंपनी लिमिटेड (IDMC) द्वारा विकसित की गई है। डॉ. शाह ने लद्दाख में इसके उपयोग के अनुभव साझा करते हुए बताया कि यह वाहन दुग्ध उत्पादकों के घर या गांव के नजदीक पहुंचकर दूध संग्रह कर सकता है।
इसमें इलेक्ट्रॉनिक वजन, दूध की गुणवत्ता की जांच, किसान को तत्काल रसीद और दूध को तुरंत ठंडा करने जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। इससे दूरस्थ क्षेत्रों से दूध लाने में होने वाली परेशानियां कम हो सकती हैं। साथ ही दूध की गुणवत्ता बनाए रखने और संग्रहण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी।
गोबर से घरेलू ईंधन उत्पादन को बढ़ावा
डेयरी विकास को ऊर्जा आत्मनिर्भरता से जोड़ने के लिए डॉ. शाह ने घरेलू स्तर पर फ्लेक्सी बायोगैस यूनिट लगाने की संभावनाओं पर भी चर्चा की। इन इकाइयों के माध्यम से पशुओं के गोबर का उपयोग करके खाना पकाने के लिए गैस तैयार की जा सकती है।
इससे ग्रामीण परिवारों की एलपीजी सिलेंडर पर निर्भरता कम करने और पशु अपशिष्ट का उपयोगी प्रबंधन करने में मदद मिल सकती है। NDDB की तकनीकी सहायता से ऐसी इकाइयों को बढ़ावा देने का सुझाव दिया गया।
जैविक दूध और वैल्यू एडेड उत्पादों से बढ़ेंगे बाजार के अवसर
सिक्किम की जैविक खेती से जुड़ी पहचान को देखते हुए प्रमाणित जैविक दूध और मूल्य संवर्धित डेयरी उत्पादों के विकास पर भी जोर दिया गया। इसके लिए दुधारू पशुओं की उत्पादकता बढ़ाने, वैज्ञानिक पशुपालन और दूध की गुणवत्ता सुधारने की आवश्यकता बताई गई।
डॉ. शाह ने कहा कि सिक्किम की जैविक पहचान का लाभ डेयरी क्षेत्र को भी मिल सकता है। प्रमाणित जैविक दूध, पारंपरिक दुग्ध उत्पादों और अन्य मूल्य संवर्धित उत्पादों के माध्यम से नए बाजार विकसित किए जा सकते हैं। इसके साथ ही पूरे राज्य के लिए एक साझा डेयरी ब्रांड विकसित करने का सुझाव दिया गया, जिससे सिक्किम के दुग्ध उत्पादों को बाजार में एक अलग पहचान मिल सके।
NDDB ने राज्य सरकार के साथ मिलकर उत्तर सिक्किम में टिकाऊ, किसान-केंद्रित डेयरी विकास के लिए तकनीकी और संस्थागत सहयोग जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई।
बैठक में ये अधिकारी और प्रतिनिधि रहे मौजूद
इस अवसर पर NDMU के अध्यक्ष समतेन भूटिया, निदेशक मंडल के सदस्य जसराज लिम्बू, पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवा विभाग के प्रधान निदेशक डॉ. संजय एम. गजमेर, मंगन जिले की अतिरिक्त निदेशक डॉ. देचेन ओ. कालेऑन, NDMU के प्रबंध निदेशक डॉ. हिस्से डी. लेपचा और ADDO आरोन लिम्बू सहित डेयरी सहकारी समितियों के सदस्य, दुग्ध उत्पादक और मिल्क यूनियन के कर्मचारी उपस्थित रहे।
डेयरी किसानों के लिए बायोगैस सहयोग बढ़ाने पर NDDB और Sistema.bio की चर्चा 
छोटी बायोगैस इकाइयों से लेकर गौशालाओं के लिए मध्यम क्षमता वाले संयंत्रों तक सहयोग विस्तार की तैयारी; कार्बन क्रेडिट और वित्तीय सहायता पर भी मंथन
डेयरी किसानों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने, पशुओं के गोबर का बेहतर उपयोग करने और ग्रामीण क्षेत्रों में अतिरिक्त आय के अवसर विकसित करने के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) और बायोगैस क्षेत्र में काम करने वाली कंपनी Sistema.bio ने अपने सहयोग को विस्तार देने पर चर्चा की है।
Sistema.bio के ग्लोबल CEO एवं सह-संस्थापक एलेक्स ईटन के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने NDDB के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की। बैठक में NDDB के अध्यक्ष डॉ. मीनेश शाह वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए। चर्चा का प्रमुख विषय छोटे स्तर के बायोगैस संयंत्रों को अधिक से अधिक डेयरी किसानों तक पहुंचाना और इस पहल को बड़े स्तर पर लागू करना रहा।
डेयरी किसानों तक छोटे बायोगैस संयंत्र पहुंचाने की योजना
बैठक में छोटे बायोगैस संयंत्रों को अपनाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया। इन संयंत्रों में पशुओं के गोबर का इस्तेमाल स्वच्छ ईंधन तैयार करने के लिए किया जा सकता है। इससे ग्रामीण परिवारों की रसोई ईंधन संबंधी जरूरतें पूरी करने के साथ पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
बायोगैस उत्पादन के बाद बची जैविक सामग्री का उपयोग जैविक खाद के रूप में किया जा सकता है। इस प्रकार डेयरी किसानों को एक ओर ऊर्जा की उपलब्धता और दूसरी ओर खेतों के लिए उपयोगी जैविक खाद मिल सकती है।
गौशालाओं में मध्यम क्षमता के बायोगैस प्लांट की संभावनाएं
NDDB और Sistema.bio के बीच गौशालाओं के लिए मध्यम क्षमता वाले बायोगैस संयंत्र विकसित करने और लगाने की संभावनाओं पर भी विचार हुआ।
गौशालाओं में बड़ी संख्या में पशु होने के कारण प्रतिदिन पर्याप्त मात्रा में गोबर उपलब्ध होता है। इसका वैज्ञानिक तरीके से उपयोग करके बायोगैस और जैविक खाद तैयार की जा सकती है। इससे गौशालाओं के संचालन खर्च को कम करने और उन्हें आर्थिक रूप से अधिक आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिल सकती है।
NDDB और Sustain Plus की साझेदारी पर चर्चा
डॉ. मीनेश शाह ने Sistema.bio के साथ NDDB के मौजूदा सहयोग की प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने NDDB और Sustain Plus Energy Foundation (SPEF) के बीच जारी साझेदारी का भी उल्लेख किया, जिसके तहत छोटी क्षमता वाले बायोगैस संयंत्र उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
इस पहल को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने के लिए उपयुक्त वित्तीय व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया। चर्चा में कहा गया कि यदि किसानों को आसान वित्तपोषण, उपयुक्त भुगतान विकल्प और तकनीकी सहायता उपलब्ध होती है तो छोटे बायोगैस संयंत्रों को अपनाने की गति बढ़ सकती है।
कार्बन क्रेडिट के क्षेत्र में तकनीकी सहयोग की संभावनाएं
बैठक में बायोगैस परियोजनाओं को कार्बन क्रेडिट व्यवस्था से जोड़ने पर भी विचार-विमर्श किया गया। इसके अंतर्गत कार्बन क्रेडिट के पंजीकरण, निगरानी और प्रबंधन के लिए तकनीकी सहयोग की संभावनाएं तलाशने पर चर्चा हुई।
साथ ही ऐसी समन्वित व्यवस्था विकसित करने की जरूरत बताई गई, जिससे अलग-अलग संस्थाओं की परियोजनाओं में एक ही उपलब्धि का दोहरा दावा न हो और कार्बन क्रेडिट से संबंधित गतिविधियों का प्रभावी प्रबंधन किया जा सके।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में डेयरी और स्वच्छ ऊर्जा का बढ़ता महत्व
इन दोनों पहलों से स्पष्ट है कि NDDB डेयरी विकास को केवल दूध उत्पादन और विपणन तक सीमित रखने के बजाय इसे ऊर्जा, जैविक खाद, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण आजीविका से जोड़ने की दिशा में काम कर रहा है।
सिक्किम में मोबाइल दूध संग्रहण, जैविक डेयरी उत्पाद और साझा राज्य ब्रांड जैसी पहलें पहाड़ी क्षेत्रों के दुग्ध उत्पादकों के लिए बाजार के नए अवसर पैदा कर सकती हैं। वहीं बायोगैस संयंत्रों के माध्यम से पशुओं के गोबर को ऊर्जा और खाद में बदलकर डेयरी किसानों तथा गौशालाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की संभावनाएं हैं।
इस तरह दूध, गोबर, ऊर्जा और जैविक खाद को एकीकृत करने वाला मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था में अतिरिक्त मूल्य सृजन का माध्यम बन सकता है।






























