October 24, 2026 10:44 AM

Krishi Times

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मिट्टी बचाने से टिकाऊ खेती तक, ICAR-IIRR की पहल!

खेत बचाओ अभियान: ICAR-IIRR ने किसानों को सिखाए मिट्टी की जांच और संतुलित उर्वरक उपयोग के वैज्ञानिक तरीके!

हैदराबाद/रंगारेड्डी, – मिट्टी की सेहत सुधारने, उर्वरकों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा देने और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से धान की खेती को सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के भारतीय धान अनुसंधान संस्थान (ICAR-IIRR), राजेंद्रनगर, हैदराबाद ने खेत बचाओ अभियान के दूसरे दिन तेलंगाना के रंगारेड्डी जिले के येथबरपल्ली गांव में किसान प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें किसानों को वैज्ञानिक मृदा प्रबंधन, मिट्टी की त्वरित जांच और जलवायु-अनुकूल धान की किस्मों के बारे में जानकारी दी गई।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को मिट्टी की वास्तविक पोषक स्थिति के आधार पर उर्वरकों के इस्तेमाल के लिए प्रेरित करना था, ताकि खेती की लागत कम करने के साथ मिट्टी की उर्वरता और फसल उत्पादकता को लंबे समय तक बनाए रखा जा सके। कार्यक्रम में 51 किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

मिट्टी की जांच से तय होगी उर्वरकों की सही मात्रा

प्रशिक्षण के दौरान किसानों को रैपिड सॉइल टेस्टिंग किट के इस्तेमाल का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इसके माध्यम से मिट्टी की जांच करने और उसके पोषक तत्वों की स्थिति को समझने की प्रक्रिया बताई गई। किसानों को समझाया गया कि बिना मिट्टी की जांच कराए अनुमान के आधार पर उर्वरकों का इस्तेमाल करने से खेती की लागत बढ़ सकती है और मिट्टी में पोषक तत्वों का असंतुलन पैदा हो सकता है।

विशेषज्ञों ने बताया कि मिट्टी की जांच के आधार पर फसल की जरूरत के अनुसार उर्वरकों की मात्रा निर्धारित करने से पोषक तत्वों का बेहतर उपयोग संभव होता है। इससे अनावश्यक खर्च को नियंत्रित करने और मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

जलवायु-अनुकूल धान की किस्मों पर जोर

कार्यक्रम में बदलती जलवायु परिस्थितियों के बीच धान की खेती को अधिक टिकाऊ और संसाधन-कुशल बनाने पर विशेष चर्चा हुई। किसानों को पोषक तत्वों का बेहतर उपयोग करने वाली धान की उन्नत किस्मों DRR Dhan 90, DRR Dhan 87 और DRR Dhan 54 के बारे में जानकारी दी गई।

इन किस्मों की विशेषताओं, उनकी खेती की अनुशंसित विधियों और बेहतर उत्पादन के लिए अपनाई जाने वाली कृषि तकनीकों को समझाने के लिए स्थानीय भाषा में साहित्य भी वितरित किया गया। इसका उद्देश्य किसानों तक अनुसंधान संस्थानों में विकसित तकनीकों की जानकारी सरल भाषा में पहुंचाना और उन्हें खेती में उपयोग के लिए प्रोत्साहित करना था।

विशेषज्ञों ने बताया कि उपयुक्त किस्म का चयन, संतुलित पोषण और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार कृषि प्रबंधन धान की खेती में संसाधनों की दक्षता बढ़ाने के महत्वपूर्ण आधार हैं।

संतुलित उर्वरक उपयोग से घट सकती है खेती की लागत

अभियान के तहत नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का फसल की जरूरत एवं मिट्टी की जांच के आधार पर संतुलित उपयोग करने की जानकारी दी गई। किसानों को किसी एक पोषक तत्व का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करने से बचने और अनुशंसित मात्रा में उर्वरक देने की सलाह दी गई।

कार्यक्रम में बताया गया कि उर्वरकों का असंतुलित इस्तेमाल मिट्टी की गुणवत्ता, पोषक तत्वों की उपलब्धता और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। इसके विपरीत, फसल की जरूरत के अनुसार पोषक तत्वों का प्रबंधन करने से उर्वरकों की उपयोग दक्षता बढ़ाने और कृषि निवेश का बेहतर लाभ लेने में मदद मिलती है।

जैविक खाद और जैव उर्वरकों के समन्वित उपयोग पर बल

किसानों को समेकित पोषक तत्व प्रबंधन यानी इंटीग्रेटेड न्यूट्रिएंट मैनेजमेंट के महत्व से भी अवगत कराया गया। इसके तहत रासायनिक उर्वरकों के साथ गोबर की खाद, कम्पोस्ट, हरी खाद और उपयुक्त जैव उर्वरकों के संतुलित उपयोग की जानकारी दी गई।

विशेषज्ञों ने बताया कि स्थानीय संसाधनों के अनुरूप जैविक पदार्थों और उपयुक्त उर्वरकों का समन्वित उपयोग मिट्टी में जैविक पदार्थों की मात्रा, पोषक तत्वों की उपलब्धता और मिट्टी की जैविक गतिविधियों को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है। इससे लंबे समय तक मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने की दिशा में मदद मिलती है।

अनुसंधान संस्थानों और किसानों के बीच मजबूत होगा संपर्क

खेत बचाओ अभियान का एक प्रमुख उद्देश्य कृषि अनुसंधान संस्थानों में विकसित वैज्ञानिक जानकारियों को सीधे किसानों तक पहुंचाना है। गांव स्तर पर आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को मिट्टी की जांच कराने, वैज्ञानिक सिफारिशों के अनुसार उर्वरकों का उपयोग करने और टिकाऊ कृषि पद्धतियां अपनाने के लिए जागरूक किया गया।

कार्यक्रम का नेतृत्व ICAR-IIRR की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. कल्याणी और वैज्ञानिक डॉ. श्रुति ने किया। आयोजन में स्थानीय गैर-सरकारी संगठन स्पूर्ति (Spoorthy) और मोइनाबाद के मंडल कृषि अधिकारी ने सहयोग किया। इनके संयुक्त प्रयासों से किसानों तक मृदा स्वास्थ्य, पोषक तत्व प्रबंधन और जलवायु-अनुकूल धान की खेती से संबंधित जानकारी पहुंचाई गई।

किसानों के लिए क्या है अभियान का महत्व?

खेत बचाओ अभियान का उद्देश्य केवल उर्वरकों के उपयोग को नियंत्रित करना नहीं, बल्कि खेती को वैज्ञानिक, किफायती और पर्यावरण के अनुकूल बनाना भी है। मिट्टी की जांच, संतुलित पोषण, जैविक संसाधनों का उचित उपयोग और उन्नत धान की किस्मों के बारे में जानकारी किसानों को बेहतर कृषि निर्णय लेने में सहायता कर सकती है।

इस पहल से किसानों में मृदा स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ने, मिट्टी की जांच पर आधारित उर्वरक उपयोग को प्रोत्साहन मिलने और ICAR-IIRR तथा किसान समुदाय के बीच सहयोग मजबूत होने की उम्मीद है।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, मिट्टी की सेहत की रक्षा करना भविष्य की खाद्य सुरक्षा से भी जुड़ा विषय है। इसलिए खेती में वैज्ञानिक सलाह, स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप तकनीक और उपलब्ध संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग अपनाना किसानों की आय तथा कृषि की दीर्घकालिक उत्पादकता के लिए महत्वपूर्ण है।