राजस्थान में उर्वरकों की समय पर आपूर्ति और संतुलित पोषण पर जोर, इफको एमडी ने की चर्चा!
नैनो उर्वरकों, जैव उर्वरकों और सूक्ष्म पोषक तत्वों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर मंथन; मिट्टी की सेहत सुधारने और किसानों तक आधुनिक कृषि तकनीक पहुंचाने पर रहेगा फोकस
जयपुर | राजस्थान में उर्वरकों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने, मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार लाने और किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने के मुद्दे पर भारतीय किसान उर्वरक सहकारी लिमिटेड (इफको) और राज्य सरकार के बीच चर्चा हुई। इफको के प्रबंध निदेशक के. जे. पटेल ने राजस्थान के मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव अखिल अरोड़ा से मुलाकात कर राज्य में उर्वरकों की आपूर्ति, संतुलित फसल पोषण और किसानों के हितों से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया।
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि कृषि पैदावार बढ़ाने के लिए केवल उर्वरकों की उपलब्धता पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका सही समय पर, उचित मात्रा में और वैज्ञानिक तरीके से इस्तेमाल भी जरूरी है। राजस्थान जैसे कृषि प्रधान राज्य में फसल की जरूरत, मिट्टी की स्थिति और स्थानीय कृषि परिस्थितियों के अनुरूप पोषक तत्वों का प्रबंधन किसानों की उत्पादन लागत और फसल की गुणवत्ता, दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
नैनो उर्वरकों और विशेष उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देने पर चर्चा

बैठक का प्रमुख विषय नैनो उर्वरकों के बढ़ते महत्व और संतुलित फसल पोषण को बढ़ावा देना रहा। इस दौरान नैनो एवं विशेष उर्वरकों के साथ सूक्ष्म पोषक तत्वों और जैव उर्वरकों के उपयोग को प्रोत्साहित करने पर विशेष जोर दिया गया। इन विकल्पों के वैज्ञानिक और जरूरत के अनुसार इस्तेमाल से पोषक तत्वों के बेहतर प्रबंधन तथा मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के प्रयासों को मजबूती मिल सकती है।
नैनो उर्वरक पारंपरिक उर्वरकों के उपयोग को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में विकसित किए गए विकल्प हैं। हालांकि, इनके बेहतर परिणाम के लिए फसल की आवश्यकता, अनुशंसित मात्रा, इस्तेमाल की विधि और कृषि विशेषज्ञों की सलाह का पालन करना जरूरी है। नैनो उर्वरकों को मिट्टी की जांच, जैविक पदार्थों के उपयोग और अन्य आवश्यक पोषक तत्वों के संतुलित प्रबंधन का विकल्प मानने के बजाय समग्र पोषण व्यवस्था के हिस्से के रूप में अपनाना अधिक उपयोगी होगा।
किसानों तक पहुंचेगी आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी
चर्चा में राजस्थान सरकार के सहयोग से किसानों के बीच जागरूकता बढ़ाने और आधुनिक कृषि तकनीकों की सही जानकारी पहुंचाने की संभावनाओं पर भी विचार किया गया। इसके तहत नैनो उर्वरकों के उचित उपयोग को प्रोत्साहित करने और किसानों को वैज्ञानिक खेती के प्रति जागरूक बनाने पर जोर रहा।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, उर्वरकों के असंतुलित इस्तेमाल से खेती की लागत बढ़ सकती है और मिट्टी के पोषक तत्वों का संतुलन प्रभावित हो सकता है। ऐसे में मिट्टी परीक्षण, फसल की जरूरत के अनुसार पोषक तत्वों का चयन, उर्वरकों की सही मात्रा और समय पर प्रयोग जैसी प्रक्रियाएं किसानों के लिए महत्वपूर्ण हैं। प्रभावी प्रशिक्षण और खेत स्तर पर प्रदर्शन के माध्यम से किसान नई तकनीकों को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं तथा अपनी परिस्थितियों के अनुसार उनका उपयोग कर सकते हैं।
मिट्टी की सेहत और किसानों की आय के बीच सीधा संबंध
मिट्टी का स्वास्थ्य कृषि की दीर्घकालिक उत्पादकता का आधार है। मिट्टी में आवश्यक पोषक तत्वों का संतुलन, जैविक कार्बन और उसकी भौतिक संरचना फसलों की वृद्धि तथा उत्पादन क्षमता को प्रभावित करती है। इसलिए टिकाऊ खेती के लिए उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग के साथ फसल चक्र, जैविक पदार्थों का समावेश और नियमित मिट्टी परीक्षण जैसी पद्धतियों को भी बढ़ावा देना आवश्यक है।
राजस्थान के किसानों के लिए यह विषय विशेष महत्व रखता है, क्योंकि राज्य के विभिन्न कृषि क्षेत्रों में वर्षा, मिट्टी की प्रकृति और सिंचाई की उपलब्धता में काफी अंतर है। स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर पोषक तत्वों का प्रबंधन करने से संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकता है। इससे खेती की लागत को नियंत्रित करने और उत्पादन की स्थिरता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
इफको ने दोहराई टिकाऊ कृषि के प्रति प्रतिबद्धता
इस अवसर पर इफको के विपणन निदेशक योगेंद्र कुमार और राज्य कार्यालय की टीम भी उपस्थित रही। बैठक में हुई चर्चा इफको और राज्य सरकार के बीच किसानों तक वैज्ञानिक कृषि जानकारी पहुंचाने तथा उर्वरक प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने के संभावित सहयोग के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा सकती है।
इफको का कहना है कि उसकी प्रतिबद्धता केवल उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, फसलों की उत्पादकता बढ़ाने और किसानों की दीर्घकालिक समृद्धि के लिए प्रयास करना भी इसका अहम हिस्सा है।
कृषि क्षेत्र में बढ़ती लागत और प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव के बीच संतुलित पोषण, आधुनिक तकनीकों का जिम्मेदारी से इस्तेमाल और किसानों को समय पर सही जानकारी उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण हो गया है। ऐसे में सरकार, सहकारी संस्थाओं और कृषि विशेषज्ञों के बीच बेहतर समन्वय किसानों को वैज्ञानिक खेती अपनाने में मदद कर सकता है।
कृषि क्षेत्र के लिए संदेश स्पष्ट है—स्वस्थ मिट्टी, संतुलित पोषण और वैज्ञानिक खेती ही टिकाऊ कृषि तथा समृद्ध किसान की मजबूत नींव हैं।





























