October 13, 2026 2:32 AM

Krishi Times

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मिट्टी की जांच के आधार पर डालें खाद, किसानों को मिली अहम सलाह

संतुलित उर्वरकों का उपयोग मृदा और मानव स्वास्थ्य के लिए जरूरी: डॉ. दशरथ प्रसाद

कृषि विज्ञान केंद्र पोकरण में 15 दिवसीय खुदरा उर्वरक विक्रय प्राधिकार प्रशिक्षण शिविर संपन्न, नौ जिलों के 35 प्रतिभागियों को मिले प्रमाण पत्र

पोकरण, राजस्थान। किसानों तक वैज्ञानिक कृषि तकनीकों और उर्वरकों के संतुलित उपयोग की जानकारी पहुंचाने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र, पोकरण में आयोजित 15 दिवसीय खुदरा उर्वरक विक्रय प्राधिकार प्रशिक्षण शिविर का समापन प्रमाण पत्र वितरण के साथ हुआ। प्रशिक्षण में राजस्थान के नौ जिलों से आए कुल 35 प्रतिभागियों ने भाग लिया। विशेषज्ञों ने उर्वरकों के वैज्ञानिक उपयोग, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और कृषि उत्पादन बढ़ाने में उर्वरक विक्रेताओं की भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी।

कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. दशरथ प्रसाद ने कहा कि मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और मानव स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए उर्वरकों का संतुलित एवं वैज्ञानिक उपयोग बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए केवल अधिक मात्रा में खाद का इस्तेमाल करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि फसल की आवश्यकता, मिट्टी की स्थिति और अनुशंसित मात्रा के अनुसार उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए। इससे पोषक तत्वों की उपलब्धता बेहतर होगी और खेती की लागत को नियंत्रित करने में भी मदद मिल सकती है।

नौ जिलों के 35 प्रतिभागियों ने लिया प्रशिक्षण

प्रशिक्षण कार्यक्रम में जैसलमेर, जोधपुर, फलोदी, बीकानेर, दौसा, श्रीगंगानगर, बहरोड़-कोटपुतली और भरतपुर सहित विभिन्न जिलों के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। शिविर के दौरान कृषि एवं संबद्ध विषयों के विशेषज्ञों ने व्याख्यान और तकनीकी सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को आवश्यक जानकारी प्रदान की।

खुदरा उर्वरक विक्रय से जुड़े प्रावधानों, उर्वरकों के संतुलित उपयोग, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, फसल उत्पादन तकनीकों, उर्वरक उपयोग दक्षता तथा किसानों को तकनीकी सलाह देने जैसे विषयों पर जानकारी दी गई। इसका उद्देश्य उर्वरक विक्रेताओं को इस तरह तैयार करना था कि वे किसानों को कृषि संबंधी सही जानकारी दे सकें और खेती में वैज्ञानिक पद्धतियों को बढ़ावा देने में योगदान कर सकें।

मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर करें उर्वरकों का उपयोग

डॉ. के.जी. व्यास ने किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनवाने और उसमें दी गई सिफारिशों के अनुसार उर्वरकों का इस्तेमाल करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि उर्वरकों का सही समय पर, सही मात्रा में और उचित विधि से प्रयोग करने पर उनकी उपयोग दक्षता बढ़ाई जा सकती है।

मिट्टी में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और अन्य आवश्यक पोषक तत्वों की उपलब्धता फसल की वृद्धि तथा उत्पादन को प्रभावित करती है। ऐसे में मिट्टी की जांच के आधार पर उर्वरक प्रबंधन अपनाने से पोषक तत्वों की कमी या अनावश्यक अधिकता को कम करने में सहायता मिल सकती है। इससे खेती की लागत में बचत, मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों को कम करने की दिशा में भी लाभ मिल सकता है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसानों को सामान्य अनुमान या दूसरे किसानों की नकल के आधार पर खाद डालने के बजाय अपनी मिट्टी और फसल की जरूरतों को ध्यान में रखकर निर्णय लेना चाहिए।

किसानों और कृषि व्यवस्था के बीच अहम कड़ी हैं उर्वरक विक्रेता

डॉ. राम निवास ढाका ने कहा कि खुदरा उर्वरक विक्रेता गांवों में किसानों के प्रथम संपर्क सूत्र होते हैं। किसान अक्सर बीज, उर्वरक और फसल प्रबंधन से जुड़े सवालों के लिए सबसे पहले अपने नजदीकी विक्रेता से सलाह लेते हैं। इसलिए विक्रेताओं की जिम्मेदारी केवल कृषि आदानों की बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों को प्रमाणिक एवं उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराना भी है।

उन्होंने कहा कि उर्वरक विक्रेताओं को किसानों के विश्वास पर खरा उतरना चाहिए और पारदर्शिता के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना चाहिए। गलत या अपूर्ण जानकारी के कारण किसान जरूरत से ज्यादा उर्वरक का इस्तेमाल कर सकते हैं, जिससे उनकी उत्पादन लागत बढ़ने के साथ मिट्टी के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

डॉ. ढाका ने कृषि उत्पादन और किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि आदानों की उपयोग दक्षता में सुधार, उन्नत फसल उत्पादन तकनीकों को अपनाने, समन्वित कृषि प्रणाली को प्रोत्साहित करने तथा कृषि कार्यों में मशीनीकरण को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।

खाद्यान्न उत्पादन के साथ गुणवत्ता पर भी देना होगा ध्यान

डॉ. सुनील शर्मा ने कहा कि खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने के साथ कृषि उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है। कृषि उत्पादन की प्रक्रिया में मिट्टी का स्वास्थ्य, पोषक तत्वों का संतुलन और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों का पालन अहम भूमिका निभाते हैं। इन पहलुओं पर ध्यान देने से टिकाऊ कृषि व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

उन्होंने कृषि क्षेत्र में ऐसी तकनीकों और प्रबंधन पद्धतियों को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया, जिनसे किसानों की उत्पादकता बढ़े और प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर संरक्षण हो सके।

प्रमाण पत्र वितरण के साथ प्रशिक्षण का समापन

समापन समारोह में प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने वाले सभी प्रतिभागियों को खुदरा उर्वरक विक्रय प्राधिकार से संबंधित प्रमाण पत्र वितरित किए गए। प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण पाठ्यक्रम और विशेषज्ञों के व्याख्यानों को उपयोगी, रोचक एवं ज्ञानवर्धक बताया।

यह प्रशिक्षण किसानों तक वैज्ञानिक कृषि सलाह पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। प्रशिक्षित उर्वरक विक्रेता यदि मृदा स्वास्थ्य कार्ड की सिफारिशों, संतुलित पोषण और उर्वरकों के उचित उपयोग को अपनी कार्यप्रणाली का हिस्सा बनाते हैं, तो इससे किसानों को सही निर्णय लेने में सहायता मिल सकती है। साथ ही, खेती की लागत कम करने, मिट्टी की उत्पादकता बनाए रखने और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के प्रयासों को भी मजबूती मिल सकती है।

कृषि के लिए संदेश स्पष्ट है—अधिक उर्वरक नहीं, बल्कि जरूरत के अनुसार संतुलित उर्वरक उपयोग ही बेहतर उत्पादन, स्वस्थ मिट्टी और टिकाऊ खेती का आधार है।