October 20, 2026 2:38 AM

Krishi Times

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भारत-न्यूजीलैंड व्यापार समझौता: किसानों और MSME को नए अवसर!

भारत-न्यूजीलैंड FTA आज से लागू, भारतीय निर्यातकों को मिलेगा 100% शुल्क-मुक्त बाजार!

एमएसएमई, किसानों, कारीगरों और महिला उद्यमियों के लिए खुलेंगे नए अवसर; न्यूजीलैंड ने भारत में 20 अरब डॉलर के निवेश को सुगम बनाने की जताई प्रतिबद्धता

नई दिल्ली। भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) 20 अक्टूबर 2026 को विजयादशमी के अवसर पर लागू  इस समझौते से भारतीय निर्यातकों को न्यूजीलैंड के बाजार में 100 प्रतिशत शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी। इससे कपड़ा, चमड़ा, जूते, इंजीनियरिंग उत्पाद, रत्न एवं आभूषण, औषधि, कृषि उत्पाद और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के निर्यात को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। समझौते का उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने के साथ भारतीय किसानों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME), कारीगरों, महिला उद्यमियों और युवाओं के लिए नए अवसर तैयार करना है।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री टॉड मैक्ले ने वर्चुअल सम्मेलन के माध्यम से समझौते के लागू होने की घोषणा की। दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने इसे द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को मजबूत करने और कारोबार के नए रास्ते खोलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

भारतीय उत्पादों को मिलेगा शुल्क-मुक्त बाजार

समझौते के तहत न्यूजीलैंड ने भारतीय निर्यात को कवर करने वाली सभी टैरिफ श्रेणियों पर सीमा शुल्क समाप्त करने का प्रावधान किया है। इससे पहले विभिन्न उत्पादों पर अधिकतम 10 प्रतिशत तक शुल्क लगता था। शुल्क समाप्त होने से भारतीय उत्पादों की लागत और प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति में सुधार होने की संभावना है।

इसका लाभ विशेष रूप से इन क्षेत्रों को मिल सकता है:

  • कपड़ा और परिधान: भारतीय कपड़ा निर्माताओं को न्यूजीलैंड के बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने का अवसर मिलेगा।
  • चमड़ा और फुटवियर: जूते-चप्पल तथा चमड़े के उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा मिल सकता है।
  • इंजीनियरिंग और ऑटोमोबाइल: मशीनरी, ऑटो पार्ट्स और औद्योगिक उत्पादों के लिए बाजार विस्तार की संभावनाएं बढ़ेंगी।
  • रत्न एवं आभूषण: भारतीय कारीगरों और निर्यातकों को नए ग्राहक मिल सकते हैं।
  • औषधि और चिकित्सा उपकरण: सुव्यवस्थित नियामकीय प्रक्रियाओं से कारोबार को सुविधा मिलने की उम्मीद है।
  • कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ: संबंधित उत्पादों के निर्यातकों को शुल्क-मुक्त पहुंच का लाभ मिल सकता है।

लकड़ी के लट्ठों, कोकिंग कोयले तथा धातु के कचरे और स्क्रैप पर शुल्क-मुक्त पहुंच से भारतीय विनिर्माण क्षेत्र और एमएसएमई की आपूर्ति शृंखलाओं को भी मदद मिलने की संभावना है।

पहली बार न्यूजीलैंड भेजी जाएगी भारतीय JCB मशीन

समझौते के लागू होने से पहले ही भारतीय औद्योगिक उत्पादों के निर्यात को लेकर पहल शुरू हो गई है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने न्यूजीलैंड के लिए भारत से पहली बार जेसीबी मशीन के निर्यात को हरी झंडी दिखाई।

इसके अलावा कृषि उत्पादों, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग उत्पादों, खेल सामग्री, जूते और चमड़ा उद्योग से जुड़े उत्पादों के निर्यात को भी बढ़ावा देने की योजना है। यह पहल भारतीय विनिर्माताओं के लिए नए बाजारों तक पहुंच बनाने और निर्यात के अवसरों का लाभ उठाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

किसानों के लिए कृषि उत्पादकता साझेदारी

भारत-न्यूजीलैंड FTA की खास बात यह है कि इसमें केवल व्यापारिक रियायतों पर ही ध्यान नहीं दिया गया है, बल्कि कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए तकनीकी सहयोग का भी प्रावधान है।

कृषि उत्पादकता साझेदारी के तहत सेब, कीवी और शहद के लिए विशेष कार्य योजनाएं तैयार की गई हैं। इनका उद्देश्य आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण, बेहतर खेती के तरीकों और अंतरराष्ट्रीय अनुभवों को भारतीय किसानों तक पहुंचाना है।

इस साझेदारी से प्रमुख रूप से निम्न क्षेत्रों में लाभ मिलने की उम्मीद है:

  • बागवानी फसलों की उत्पादकता में सुधार।
  • कटाई के बाद होने वाले नुकसान में कमी।
  • आधुनिक कृषि तकनीकों और बेहतर प्रबंधन को बढ़ावा।
  • किसानों को गुणवत्तापूर्ण उत्पादन और बेहतर बाजार अवसरों से जोड़ना।
  • बागवानी, वानिकी, पशुधन और मत्स्य पालन में सहयोग बढ़ाना।

कीवी, सेब और शहद के लिए बनेंगे उत्कृष्टता केंद्र

न्यूजीलैंड की तकनीकी सहायता से कीवी, सेब और शहद के लिए उत्कृष्टता केंद्र (Centres of Excellence) स्थापित करने की योजना है।

कीवी पैदावार के लिए नागालैंड के फुत्सेरो और उत्तराखंड के माग्रा में पहले चरण के स्थलों की पहचान की गई है। सेब उत्पादन के लिए हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में दो उत्कृष्टता केंद्र प्रस्तावित हैं। वहीं, शहद उत्पादन के लिए उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में उत्कृष्टता केंद्र विकसित करने की परिकल्पना है।

इन केंद्रों के माध्यम से किसानों को बेहतर उत्पादन तकनीक, प्रशिक्षण और फसल प्रबंधन से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा। सेब, कीवी और मनुका शहद से संबंधित टैरिफ रेट कोटा (TRQ) के क्रियान्वयन को भी संयुक्त कृषि उत्पादकता परिषद की निगरानी में तैयार की गई कार्य योजनाओं से जोड़ा गया है।

डेयरी और संवेदनशील कृषि उत्पादों को सुरक्षा

मुक्त व्यापार समझौते में किसानों, डेयरी उत्पादकों, मछुआरों और ग्रामीण समुदायों के हितों को ध्यान में रखते हुए कुछ संवेदनशील उत्पादों को शुल्क रियायतों से बाहर रखा गया है।

इनमें डेयरी उत्पाद, चीनी, खाद्य तेल और प्रमुख कृषि वस्तुएं शामिल हैं। इसके अलावा समझौते में मूल नियम (Rules of Origin), द्विपक्षीय सुरक्षा तंत्र और एंटी-सर्कमवेंशन प्रावधान शामिल किए गए हैं। इनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि समझौते का लाभ निर्धारित नियमों को पूरा करने वाले वास्तविक भारतीय निर्यातकों को मिले।

इस तरह समझौते में निर्यात बढ़ाने के साथ घरेलू कृषि और संबंधित क्षेत्रों के हितों को सुरक्षित रखने का भी प्रयास किया गया है।

भारत में 20 अरब डॉलर के निवेश को सुगम बनाने की प्रतिबद्धता

न्यूजीलैंड ने भारत में 20 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश को सुगम बनाने की प्रतिबद्धता जताई है। इस निवेश से कृषि, विनिर्माण, बुनियादी ढांचे और स्टार्ट-अप क्षेत्र में संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

प्रस्तावित निवेश से तकनीकी सहयोग, नवाचार, उद्यमिता और रोजगार सृजन को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। हालांकि, निवेश की वास्तविक गति और उसका क्षेत्रवार वितरण आगे की परियोजनाओं तथा व्यावसायिक निर्णयों पर निर्भर करेगा।

यह पहल भारत के ‘मेक इन इंडिया’ अभियान और वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य के अनुरूप आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करती है।

सेवाओं के क्षेत्र में भी बढ़ेंगे अवसर

न्यूजीलैंड ने अपने व्यापार समझौतों में अब तक के सबसे व्यापक सेवा प्रस्तावों में से एक के तहत भारत को लगभग 118 क्षेत्रों में बाजार पहुंच और करीब 139 उप-क्षेत्रों में सर्वाधिक पसंदीदा राष्ट्र (MFN) संबंधी प्रतिबद्धताएं दी हैं।

इसमें स्वास्थ्य और पारंपरिक चिकित्सा सेवाओं के लिए भी विशेष प्रावधान शामिल हैं। आयुर्वेद, योग और अन्य आयुष प्रणालियों से जुड़े भारतीय सेवा प्रदाताओं के लिए इससे नए अवसर खुल सकते हैं।

सेवा क्षेत्र में बेहतर बाजार पहुंच से पेशेवर सेवाओं, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य संबंधित क्षेत्रों में भारत-न्यूजीलैंड सहयोग को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

भारतीय छात्रों और युवाओं को क्या मिलेगा?

समझौते में भारतीय युवाओं और पेशेवरों के लिए रोजगार तथा अध्ययन के बाद काम करने के अवसरों से जुड़े प्रावधान भी शामिल हैं।

  • 5,000 अस्थायी रोजगार प्रवेश वीजा: भारतीय युवाओं और पेशेवरों के लिए हर वर्ष निर्धारित कोटा।
  • 1,000 वर्किंग हॉलिडे वीजा: पात्र भारतीय युवाओं के लिए सालाना अवसर।
  • भारतीय छात्रों की संख्या पर कोई अधिकतम सीमा नहीं: न्यूजीलैंड में पढ़ाई के लिए छात्र संख्या की निर्धारित ऊपरी सीमा नहीं होगी।
  • STEM स्नातक और स्नातकोत्तर: पात्र विद्यार्थियों को पढ़ाई के बाद अधिकतम तीन वर्ष तक काम करने का अधिकार।
  • डॉक्टरेट शोधार्थी: पात्र शोधार्थियों के लिए पढ़ाई के बाद अधिकतम चार वर्ष तक काम करने का प्रावधान।

इन सुविधाओं का लाभ संबंधित वीजा श्रेणियों और पात्रता शर्तों के अधीन होगा। इससे भारतीय विद्यार्थियों और पेशेवरों के लिए अंतरराष्ट्रीय अनुभव तथा कौशल विकास के नए रास्ते खुल सकते हैं।

MSME और महिला उद्यमियों के लिए नए अवसर

छोटे उद्योगों, स्टार्ट-अप, महिला-नेतृत्व वाले कारोबार, पारंपरिक कारीगरों और पहली पीढ़ी के उद्यमियों के लिए न्यूजीलैंड का बाजार महत्वपूर्ण अवसर प्रदान कर सकता है।

शुल्क-मुक्त पहुंच और सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को सरल बनाने से निर्यात की कुल लागत कम करने में मदद मिल सकती है। इसके साथ व्यापार संबंधी जानकारी, कारोबारी नेटवर्क और न्यूजीलैंड के छोटे एवं मध्यम उद्यमों के साथ सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा।

न्यूजीलैंड ने भारतीय भौगोलिक संकेतक (GI) उत्पादों के पंजीकरण को सुविधाजनक बनाने की प्रतिबद्धता भी जताई है। इससे पारंपरिक उत्पादों, ग्रामीण कारीगरों और स्थानीय उद्योगों के हितों को आगे बढ़ाने के अवसर बन सकते हैं।

द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक दोगुना करने का लक्ष्य

भारत और न्यूजीलैंड के बीच FTA वार्ता 16 मार्च 2025 को शुरू हुई थी और नौ महीने के भीतर 22 दिसंबर 2025 को संपन्न हो गई। दोनों देशों ने 27 अप्रैल 2026 को समझौते पर हस्ताक्षर किए।

यह समझौता ‘भारत-न्यूजीलैंड रणनीतिक साझेदारी: 2030 तक का रोडमैप’ का हिस्सा है। इसके तहत वर्ष 2030 तक वस्तुओं और सेवाओं के द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करके 7 अरब न्यूजीलैंड डॉलर यानी लगभग 35,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

वाणिज्य विभाग के सचिव राजेश अग्रवाल के अनुसार, मुक्त व्यापार समझौतों का उद्देश्य देशों के बीच दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी विकसित करना है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समझौते से मिलने वाले अवसरों को वास्तविक लाभ में बदलने के लिए उद्योग जगत और विभिन्न संगठनों के साथ मिलकर काम करना होगा।

निर्यात वृद्धि से किसानों की आय तक, क्रियान्वयन होगा अहम

भारत-न्यूजीलैंड FTA भारतीय निर्यातकों को एक विकसित अर्थव्यवस्था के बाजार तक शुल्क-मुक्त पहुंच प्रदान करने के साथ कृषि उत्पादकता, तकनीकी सहयोग, निवेश और रोजगार के अवसरों का दायरा बढ़ाता है।

हालांकि, समझौते की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि भारतीय कंपनियां नए बाजार में कितनी प्रभावी ढंग से प्रवेश करती हैं, छोटे निर्यातकों को कितनी जानकारी और सहायता मिलती है तथा कृषि सहयोग का लाभ किसानों तक किस हद तक पहुंचता है।

यदि इन अवसरों का प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो यह समझौता भारतीय उद्योग, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला उद्यमिता और युवाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ने का एक नया माध्यम बन सकता है।

Source:PIB