October 12, 2026 3:54 AM

Krishi Times

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यूपी के किसानों के लिए जरूरी खबर, फसल नुकसान सर्वे पर बड़ा निर्देश!

फसल नुकसान के सर्वे में अब डीएम-एडीएम की भी सीधी निगरानी, 12 अक्टूबर तक पोर्टल पर दर्ज करना होगा पूरा डेटा!

उत्तर प्रदेश में बाढ़, भारी बारिश और चक्रवात की मार झेल रहे किसानों के लिए राहत की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। खेतों में खड़ी फसल को हुए नुकसान का आकलन अब सिर्फ स्थानीय स्तर की रिपोर्ट तक सीमित नहीं रहेगा। जिलाधिकारी (DM) और अपर जिलाधिकारी (ADM) खुद प्रभावित इलाकों में जाकर सर्वे की स्थिति की जांच करेंगे।
राज्य सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि 12 अक्टूबर तक राहत पोर्टल पर डिजिटल क्रॉप सर्वे के आधार पर फसल नुकसान का पूरा ब्योरा दर्ज किया जाए। इसके बाद पात्र किसानों को सरकारी नियमों के तहत सहायता राशि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

किसानों के नुकसान की जांच अब उच्च स्तर पर

राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने प्रभावित जिलों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में साफ कहा कि राहत व्यवस्था में किसान हित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। किसी भी ऐसे किसान का नुकसान नहीं होना चाहिए जिसकी फसल वास्तव में प्राकृतिक आपदा से प्रभावित हुई है।
फसल क्षति का आकलन केवल लेखपाल या कानूनगो की रिपोर्ट के भरोसे नहीं छोड़ा जाएगा। डीएम और एडीएम मौके पर जाकर सर्वे की हकीकत जांचेंगे। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि फसल नुकसान का सही आंकड़ा सामने आए और पात्र किसानों के नाम सर्वे से छूट न जाएं।

डिजिटल क्रॉप सर्वे बताएगा कितनी फसल बर्बाद हुई

सरकार इस बार फसल नुकसान का आकलन डिजिटल क्रॉप सर्वे के जरिए कर रही है। बाढ़ के पानी में डूबी फसल हो या लगातार बारिश से खराब हुई खेती, सर्वे के जरिए खेतवार नुकसान का रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।
इसके बाद एसडीएम और तहसीलदार डिजिटल सर्वे के आंकड़ों का क्रॉस-वेरिफिकेशन करेंगे। यानी राहत राशि तय करने से पहले दर्ज किए गए आंकड़ों की दोबारा जांच भी होगी।
इस प्रक्रिया से गलत आंकड़े दर्ज होने या वास्तविक नुकसान कम दिखाए जाने की आशंका को कम करने में मदद मिलेगी।

बारिश कितनी हुई, इसका भी रखा जाएगा रिकॉर्ड

फसल नुकसान का आकलन सिर्फ खेतों में हुए नुकसान को देखकर नहीं किया जाएगा। संबंधित क्षेत्रों में हुई बारिश की वास्तविक स्थिति को भी जांच में शामिल किया जाएगा।
इसके लिए भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के साथ AWS-ARG से प्राप्त मौसम संबंधी डेटा का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि संबंधित इलाके में बारिश की स्थिति क्या रही और प्राकृतिक आपदा का फसल पर कितना असर पड़ा।

12 अक्टूबर तक पोर्टल पर फीडिंग अनिवार्य

अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि 12 अक्टूबर तक डिजिटल क्रॉप सर्वे के आधार पर फसल क्षति का पूरा डेटा राहत पोर्टल पर अपलोड किया जाए।
जिलों में सर्वे की प्रगति की नियमित निगरानी होगी। अधिकारियों को गूगल शीट और राहत पोर्टल पर आंकड़े अपडेट करने होंगे। सरकार की ओर से आगे बजट की मांग भी पोर्टल पर दर्ज वास्तविक नुकसान के आंकड़ों के आधार पर की जाएगी।
इसलिए अधिकारियों को डेटा फीडिंग में किसी भी तरह की लापरवाही से बचने के निर्देश दिए गए हैं।

राजस्व रिकॉर्ड से भी मिलान होगा

फसल नुकसान की जांच में खसरा और दूसरे राजस्व रिकॉर्ड भी महत्वपूर्ण होंगे। अधिकारियों को संबंधित जमीन और पहले बोई गई फसल से जुड़े रिकॉर्ड की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
राजस्व अभिलेखों, डिजिटल क्रॉप सर्वे और मौके पर अधिकारियों की जांच—इन सभी को मिलाकर फसल नुकसान का वास्तविक आंकड़ा तैयार किया जाएगा।

बाढ़ ही नहीं, बारिश और चक्रवात का नुकसान भी दर्ज होगा

सरकार ने जिलों को सिर्फ बाढ़ से खराब हुई फसलों का रिकॉर्ड तैयार करने के निर्देश नहीं दिए हैं। अत्यधिक बारिश और चक्रवात से हुई फसल क्षति को भी सर्वे में शामिल किया जाएगा।
अगर अलग-अलग स्रोतों से प्राप्त आंकड़ों में अंतर मिलता है तो संबंधित अधिकारियों को उसकी वजह भी स्पष्ट करनी होगी। इससे नुकसान के आंकड़ों की निगरानी और सत्यापन की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी।

किसानों को राहत पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता

सरकार का फोकस अब फसल नुकसान के सही आकलन के साथ-साथ पात्र किसानों तक समय पर राहत पहुंचाने पर है। डिजिटल सर्वे, राजस्व रिकॉर्ड, मौसम विभाग के आंकड़े और अधिकारियों की जमीनी जांच के बाद नुकसान का आकलन पूरा किया जाएगा।
प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों के मामलों में संवेदनशीलता बरती जाए और किसी पात्र किसान को केवल सर्वे की खामी या रिकॉर्ड में हुई गलती के कारण राहत से वंचित न होना पड़े।