October 17, 2026 1:34 PM

Krishi Times

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तमिलनाडु के ताड़ गुड़ पाउडर की बुल्गारिया में दस्तक!

ताड़ के गुड़ से खुलेगा निर्यात का नया रास्ता, किसानों को बेहतर कीमत की उम्मीद!

एपीडा की पहल से पारंपरिक भारतीय उत्पाद को मिला अंतरराष्ट्रीय बाजार | 137 एकड़ में जैविक खेती को बढ़ावा, किसानों को 15–22% तक अधिक मूल्य मिलने की उम्मीद

गोबिचेट्टीपलयम/इरोड, –भारत के पारंपरिक कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजार में नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने तमिलनाडु के इरोड जिले के गोबिचेट्टीपलयम से बुल्गारिया के वर्ना के लिए जैविक ताड़ के गुड़ पाउडर की पहली निर्यात खेप रवाना करने में सहयोग किया। 15 अक्टूबर को रवाना की गई इस खेप में 1.755 मीट्रिक टन ताड़ के फूलों के रस से तैयार गुड़ पाउडर शामिल है, जिसे भारत की राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (एनपीओपी) और यूरोपीय संघ की जैविक प्रमाणन आवश्यकताओं के अनुरूप प्रमाणित किया गया है।

यह निर्यात भारत के पारंपरिक ताड़ उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थापित करने, जैविक कृषि निर्यात में विविधता लाने और स्थानीय उत्पादकों के लिए नए व्यावसायिक अवसर विकसित करने की दिशा में अहम कदम है। इससे तमिलनाडु के ताड़ आधारित उत्पादों को वैश्विक पहचान मिलने के साथ-साथ पारंपरिक कृषि ज्ञान और स्थानीय संसाधनों के व्यावसायिक उपयोग को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

वेलबीइंग फूड्स और चेट्टी एक्सपोर्ट्स की साझेदारी से निर्यात

इस खेप का उत्पादन और निर्यात इरोड स्थित मेसर्स वेलबीइंग फूड्स ने चेन्नई स्थित मेसर्स चेट्टी एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से किया है। उत्पाद को चेन्नई बंदरगाह से समुद्री मार्ग के जरिए बुल्गारिया भेजा जाएगा। बुल्गारिया स्थित मेसर्स सो लाइफ लिमिटेड इस खेप का विदेशी आयातक और वितरक है।

इस व्यापारिक पहल से भारतीय जैविक उत्पादों के लिए यूरोपीय बाजार में नए संपर्क विकसित करने और भविष्य में ताड़ आधारित मूल्यवर्धित उत्पादों के निर्यात की संभावनाएं मजबूत होने की उम्मीद है।

137 एकड़ में जैविक खेती, किसानों की आय बढ़ाने पर जोर

इस पहल का एक प्रमुख उद्देश्य तमिलनाडु में ताड़ उत्पादों की आपूर्ति से जुड़े उत्पादकों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है। इसके अंतर्गत लगभग 137 एकड़ भूमि पर जैविक खेती को शामिल किया गया है। निर्यातोन्मुख मूल्य श्रृंखला विकसित होने से किसानों को प्रमाणित उत्पादन, बेहतर बाजार संपर्क और उत्पादों के मूल्यवर्धन के माध्यम से लाभ मिलने की संभावना है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, घरेलू बाजार की तुलना में किसानों को लगभग 15 से 22 प्रतिशत तक अधिक मूल्य मिलने की संभावना है, जबकि निर्माताओं को करीब 17 प्रतिशत अधिक मूल्य प्राप्त हो सकता है। बेहतर मूल्य मिलने से उत्पादकों की आय में वृद्धि, स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण गतिविधियों के विस्तार और टिकाऊ आजीविका को प्रोत्साहन मिल सकता है।

हालांकि, वास्तविक लाभ बाजार की मांग, उत्पादन लागत, प्रमाणन खर्च, परिवहन और निर्यात अनुबंधों की शर्तों पर भी निर्भर करेगा।

परिष्कृत चीनी के विकल्प के रूप में ताड़ का गुड़ पाउडर

ताड़ के फूलों के रस से तैयार गुड़ पाउडर भारत की पारंपरिक मिठास से जुड़ा एक मूल्यवर्धित उत्पाद है। इसे परिष्कृत चीनी के विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसकी खासियत इसका पारंपरिक उत्पादन आधार और अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्राकृतिक एवं जैविक खाद्य उत्पादों की बढ़ती व्यावसायिक संभावनाएं हैं।

उत्पाद की संरचना और प्रसंस्करण पद्धति के आधार पर इसमें कुछ खनिज और अन्य पोषक तत्व मौजूद हो सकते हैं। हालांकि, इसके पोषण संबंधी लाभों का आकलन उत्पाद की वास्तविक संरचना और प्रयोगशाला परीक्षणों के आधार पर किया जाना चाहिए। जैविक प्रमाणन उत्पादन मानकों से संबंधित है, यह अपने आप में किसी उत्पाद के स्वास्थ्य लाभों की गारंटी नहीं है।

उचित गुणवत्ता नियंत्रण, आकर्षक पैकेजिंग, खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुपालन और प्रभावी ब्रांडिंग के जरिए ताड़ के गुड़ पाउडर को विदेशी उपभोक्ताओं के बीच एक विशिष्ट पारंपरिक भारतीय उत्पाद के रूप में स्थापित किया जा सकता है।

तमिलनाडु की पारंपरिक विरासत को मिलेगा नया बाजार

ताड़ का पेड़ तमिलनाडु के कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक जीवन का लंबे समय से महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। इससे तैयार होने वाले विभिन्न उत्पाद स्थानीय समुदायों की पारंपरिक आजीविका और कौशल से जुड़े हैं।

ताड़ के रस से गुड़ पाउडर जैसे निर्यात-योग्य उत्पाद विकसित करना स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग और पारंपरिक उत्पादों के व्यावसायिक विस्तार का अवसर प्रदान करता है। इससे उत्पादन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, भंडारण और परिवहन जैसी गतिविधियों में भी अवसर पैदा हो सकते हैं।

यदि विदेशी बाजारों में उत्पाद की मांग लगातार बढ़ती है, तो इसका लाभ उत्पादकों, प्रसंस्करण इकाइयों, निर्यातकों और संबंधित ग्रामीण उद्यमों तक पहुंच सकता है।

एपीडा ने दिखाई निर्यात को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता

निर्यात खेप को एपीडा के अध्यक्ष अभिषेक देव ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर एपीडा की सचिव डॉ. सस्वती बोस, प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारी, निर्यातक कंपनियों के प्रतिनिधि, अंतरराष्ट्रीय साझेदार, प्रगतिशील चावल किसान और कृषि निर्यात मूल्य श्रृंखला से जुड़े अन्य हितधारक उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में भारतीय कृषि उत्पादों के निर्यात को मजबूत बनाने के लिए विभिन्न हितधारकों के बीच सहयोग, गुणवत्ता अनुपालन और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच के महत्व पर जोर दिया गया।

एपीडा, भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है। इसका प्रमुख उद्देश्य कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देना है। इसके तहत बाजार विकास, गुणवत्ता मानकों के अनुपालन, जैविक प्रमाणन से जुड़े प्रयासों और भारतीय निर्यातकों तथा विदेशी खरीदारों के बीच व्यावसायिक संपर्क स्थापित करने में सहयोग दिया जाता है।

जैविक कृषि निर्यात में विविधता की नई संभावना

बुल्गारिया को जैविक ताड़ के गुड़ पाउडर की पहली खेप का निर्यात भारतीय कृषि निर्यात के लिए केवल एक नए उत्पाद की अंतरराष्ट्रीय शुरुआत नहीं है, बल्कि पारंपरिक कृषि संसाधनों को मूल्यवर्धित व्यावसायिक उत्पादों में बदलने की संभावनाओं का भी उदाहरण है।

भारत के लिए ऐसे उत्पादों का निर्यात बढ़ाना महत्वपूर्ण है, जिनमें स्थानीय उत्पादन, पारंपरिक ज्ञान, जैविक खेती और प्रसंस्करण के जरिए अधिक मूल्य अर्जित करने की क्षमता हो। हालांकि, दीर्घकालिक सफलता के लिए निरंतर गुणवत्ता, प्रतिस्पर्धी कीमत, विश्वसनीय आपूर्ति, उपभोक्ता जागरूकता और अंतरराष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन आवश्यक होगा।

यदि इस पहल के माध्यम से बुल्गारिया और अन्य यूरोपीय बाजारों में स्थायी मांग विकसित होती है, तो तमिलनाडु के ताड़ उत्पादों को व्यापक पहचान मिल सकती है। साथ ही, इससे किसानों और स्थानीय उद्यमों के लिए निर्यात आधारित आय के नए रास्ते खुलने की संभावना है।