October 10, 2026 3:16 AM

Krishi Times

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ICAR और सार्क कृषि केंद्र के बीच कृषि सहयोग पर चर्चा !

दक्षिण एशिया में कृषि अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए ICAR और SAARC कृषि केंद्र के बीच सहयोग मजबूत करने पर चर्चा

नई दिल्ली। दक्षिण एशिया में कृषि अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और कृषि शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और सार्क कृषि केंद्र (SAC), ढाका, बांग्लादेश के बीच संस्थागत सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा हुई। इस सिलसिले में सार्क कृषि केंद्र के निदेशक डॉ. एम.डी. गोलम महबूब ने 8 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में ICAR के उप महानिदेशक (अंतरराष्ट्रीय संबंध) डॉ. एन.पी. सिंह से मुलाकात की।

कृषि अनुसंधान में क्षेत्रीय सहयोग पर जोर

बैठक में दोनों संस्थानों के बीच चल रहे सहयोग की समीक्षा की गई। साथ ही, दक्षिण एशियाई देशों में कृषि विकास से जुड़ी साझा चुनौतियों का समाधान खोजने के लिए संस्थागत समन्वय को बेहतर बनाने पर विचार-विमर्श हुआ। चर्चा का प्रमुख उद्देश्य कृषि अनुसंधान, वैज्ञानिक ज्ञान और तकनीकी अनुभवों को क्षेत्रीय स्तर पर साझा करने की संभावनाओं को आगे बढ़ाना था।

दक्षिण एशिया के अनेक देशों की कृषि व्यवस्था जलवायु परिवर्तन, फसलों की उत्पादकता, प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन और किसानों की आय जैसी समान चुनौतियों से प्रभावित होती है। ऐसे में क्षेत्रीय सहयोग के माध्यम से विकसित तकनीकों, अनुसंधान परिणामों और उपयोगी कृषि पद्धतियों को विभिन्न देशों तक पहुंचाने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

जर्मप्लाज्म के आदान-प्रदान पर चर्चा

बैठक में कृषि अनुसंधान के लिए जर्मप्लाज्म यानी पौधों की आनुवंशिक सामग्री के आदान-प्रदान को महत्वपूर्ण विषय के रूप में शामिल किया गया। फसल सुधार, बेहतर किस्मों के विकास और कृषि जैव विविधता के संरक्षण में जर्मप्लाज्म की अहम भूमिका होती है।

इसके माध्यम से वैज्ञानिकों को विभिन्न फसलों के आनुवंशिक गुणों का अध्ययन करने और स्थानीय कृषि परिस्थितियों के अनुरूप बेहतर किस्में विकसित करने में सहायता मिल सकती है। हालांकि, इस तरह के आदान-प्रदान को संबंधित देशों के जैव सुरक्षा नियमों, संगरोध प्रावधानों और लागू अंतरराष्ट्रीय समझौतों के अनुरूप संचालित करना आवश्यक है।

पीएचडी फेलोशिप और कृषि शिक्षा को मिलेगा प्रोत्साहन

बैठक में पीएचडी फेलोशिप, शोधकर्ताओं के शैक्षणिक अवसरों और वैज्ञानिक क्षमता निर्माण से संबंधित विषयों पर भी चर्चा हुई। इन पहलों का उद्देश्य कृषि विज्ञान के क्षेत्र में शोध कर रहे विद्यार्थियों और युवा वैज्ञानिकों को बेहतर प्रशिक्षण, शोध अनुभव तथा क्षेत्रीय संस्थानों के साथ काम करने के अवसर उपलब्ध कराने की संभावनाओं को आगे बढ़ाना है।

भारत और दक्षिण एशिया के अन्य देशों के कृषि संस्थानों के बीच शैक्षणिक सहयोग बढ़ने से ज्ञान के आदान-प्रदान, संयुक्त शोध और कृषि विज्ञान की नई चुनौतियों पर काम करने के अवसर विकसित हो सकते हैं।

संयुक्त प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पर विचार

बैठक में संयुक्त क्षमता निर्माण कार्यक्रमों और प्रशिक्षण पहलों पर भी चर्चा की गई। कृषि वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और संबंधित संस्थानों के विशेषज्ञों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम नई तकनीकों, आधुनिक शोध पद्धतियों और कृषि नवाचारों को समझने का माध्यम बन सकते हैं।

ऐसी पहलों के जरिए फसल उत्पादन, जल एवं मृदा प्रबंधन, जलवायु-अनुकूल कृषि और टिकाऊ खेती जैसे विषयों पर क्षेत्रीय अनुभव साझा करने की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं। इससे सदस्य देशों की कृषि अनुसंधान संस्थाओं के बीच आपसी संपर्क और तकनीकी समन्वय को भी बढ़ावा मिल सकता है।

क्षेत्रीय वित्तपोषण और संयुक्त परियोजनाओं पर जोर

चर्चा में क्षेत्रीय वित्तपोषण के अवसरों की पहचान तथा सहयोगात्मक कृषि परियोजनाओं के लिए कार्ययोजना तैयार करने का विषय भी शामिल रहा। संयुक्त परियोजनाओं के माध्यम से उन कृषि समस्याओं पर काम किया जा सकता है, जिनका प्रभाव दक्षिण एशिया के कई देशों पर पड़ता है।

ऐसी परियोजनाओं को प्रभावी बनाने के लिए अनुसंधान प्राथमिकताओं का निर्धारण, संबंधित संस्थानों की जिम्मेदारियों का स्पष्ट विभाजन, वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता और परियोजनाओं की प्रगति की नियमित समीक्षा महत्वपूर्ण होगी।

दक्षिण एशिया की कृषि चुनौतियों के समाधान में सहयोग की अहमियत

ICAR और SAARC Agriculture Centre के बीच सहयोग को मजबूत करने की दिशा में हुई यह बैठक क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान और संस्थागत साझेदारी के महत्व को रेखांकित करती है। भारत के कृषि अनुसंधान अनुभव और दक्षिण एशियाई देशों की स्थानीय आवश्यकताओं के बीच बेहतर समन्वय से कृषि नवाचारों को बढ़ावा देने के अवसर मिल सकते हैं।

बैठक में क्षेत्रीय साझेदारी, अनुसंधान सहयोग और क्षमता निर्माण के महत्व की पुनः पुष्टि की गई। हालांकि, किसी विशिष्ट परियोजना की शुरुआत, निर्धारित बजट या समयसीमा की जानकारी जारी विवरण में नहीं दी गई है।

कृषि क्षेत्र पर संभावित प्रभाव:

यदि प्रस्तावित सहयोग को ठोस परियोजनाओं और नियमित संस्थागत समन्वय के माध्यम से आगे बढ़ाया जाता है, तो इससे कृषि वैज्ञानिकों के बीच ज्ञान का आदान-प्रदान, शोध क्षमता का विकास और दक्षिण एशिया में टिकाऊ कृषि प्रणालियों को प्रोत्साहन मिल सकता है।

Source: ICAR