October 8, 2026 1:47 AM

Krishi Times

Archive story

यूपी का बड़ा लक्ष्य: 510 लाख टन रबी पैदावार!

राज्य स्तरीय रबी उत्पादकता गोष्ठी 2026: यूपी ने रखा 510 लाख मीट्रिक टन रबी पैदावार का लक्ष्य, दलहन-तिलहन आत्मनिर्भरता पर जोर!

लखनऊ, 7 अक्टूबर 2026 –उत्तर प्रदेश सरकार ने आगामी रबी सीजन के लिए खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाने, दलहन-तिलहन में आत्मनिर्भरता हासिल करने और किसानों तक नई कृषि तकनीकों को पहुंचाने के उद्देश्य से राजधानी लखनऊ में राज्य स्तरीय रबी उत्पादकता गोष्ठी-2026 का आयोजन किया। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के जुपिटर ऑडिटोरियम में आयोजित इस कार्यक्रम में कृषि, सहकारिता, पशुपालन, उद्यान, मत्स्य और सिंचाई विभाग के अधिकारियों, वैज्ञानिकों तथा प्रदेश भर से आए प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया।

कार्यक्रम के दौरान किसानों को उन्नत बीजों के मिनीकिट, कृषि यंत्रों के स्वीकृति पत्र तथा विषमुक्त खेती को बढ़ावा देने के लिए फेरोमोन ट्रैप का सांकेतिक वितरण किया गया।

रबी उत्पादन बढ़ाकर 510 लाख मीट्रिक टन करने का लक्ष्य

कृषि, कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि प्रदेश ने खाद्यान्न, गन्ना, दूध, चीनी और सब्जी उत्पादन में देश में अग्रणी स्थान हासिल किया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 में लगभग 480 लाख मीट्रिक टन रबी खाद्यान्न उत्पादन हुआ था, जबकि वर्ष 2026-27 के लिए इसे बढ़ाकर 510 लाख मीट्रिक टन करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों की आय बढ़ाने और उत्पादन लागत कम करने के लिए लगातार निवेश कर रही है। किसानों को बेहतर गुणवत्ता के बीज उपलब्ध कराने के लिए बीजों पर लगभग 600 करोड़ रुपये तथा कृषि यंत्रों पर करीब 350 करोड़ रुपये का अनुदान दिया जा रहा है।

50 लाख मिनीकिट से बढ़ेगा दलहन-तिलहन उत्पादन

कृषि मंत्री ने कहा कि खाद्य तेलों और दलहनों के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए प्रदेश में बड़े स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। इसी दिशा में किसानों के बीच 50 लाख निशुल्क मिनीकिट वितरित किए जा रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान उन्नत किस्मों, संतुलित पोषण प्रबंधन और वैज्ञानिक खेती तकनीकों को अपनाएं तो दलहन और तिलहन की उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।

अनुदानित बीज और उर्वरकों की तस्करी रोकने के निर्देश

गोष्ठी में कृषि मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसानों के लिए उपलब्ध कराए जा रहे अनुदानित बीज और उर्वरकों की अंतरराज्यीय तस्करी पर पूरी तरह रोक लगाई जाए। साथ ही कृषि विभाग के ऑनलाइन पोर्टल को और अधिक सुगम बनाने तथा सर्वर संबंधी समस्याओं के समाधान पर भी जोर दिया गया, ताकि किसानों को योजनाओं का लाभ लेने में किसी प्रकार की परेशानी न हो।

सहकारिता के माध्यम से किसानों को सस्ता ऋण

सहकारिता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जे.पी.एस. राठौर ने कहा कि प्रदेश में सहकारिता आंदोलन को मजबूत बनाकर किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की जा रही है।

उन्होंने बताया कि पुनर्जीवित की गई जिला सहकारी बैंकों के माध्यम से 54 लाख नए किसानों को जोड़ा गया है। किसानों को 3 लाख रुपये तक का किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) ऋण मात्र 3 प्रतिशत ब्याज दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है। वहीं महिला किसानों को पशुपालन गतिविधियों के लिए 2 लाख रुपये तक का ऋण रियायती ब्याज दर पर दिया जा रहा है।

उन्होंने यह भी बताया कि पैक्स समितियों की कैश क्रेडिट लिमिट को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 15 लाख रुपये किया गया है और उर्वरक परिवहन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ट्रकों में जीपीएस आधारित निगरानी प्रणाली लागू की जा रही है।

देसी गाय आधारित कृषि मॉडल पर जोर

उत्तर प्रदेश गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम गुप्ता ने किसानों से “एक गाय देसी, पांच एकड़ खेती” मॉडल अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश की लगभग 59 हजार ग्राम पंचायतों में एकीकृत मॉडल फार्म विकसित किए जाने चाहिए।

उनके अनुसार मल्टी-लेयर खेती और पशुपालन आधारित कृषि प्रणाली किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी की सेहत सुधारने में भी मददगार साबित हो सकती है।

उद्यानिकी और शहद उत्पादन में यूपी की मजबूत स्थिति

अपर मुख्य सचिव उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण बी.एल. मीणा ने बताया कि उत्तर प्रदेश उद्यानिकी फसलों की उत्पादकता के मामले में वैश्विक स्तर पर अग्रणी राज्यों में शामिल है। उन्होंने कहा कि राज्य में उद्यानिकी योजनाओं को पूरी तरह लक्ष्य-मुक्त बनाया गया है ताकि अधिक से अधिक किसान लाभान्वित हो सकें।

उन्होंने जानकारी दी कि प्रदेश 31 हजार मीट्रिक टन शहद उत्पादन के साथ देश में प्रथम स्थान पर है, जो किसानों के लिए आय विविधीकरण का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है।

पशुपालन क्षेत्र में बढ़ रही सहायता और सेवाएं

अपर मुख्य सचिव पशुपालन मुकेश मेश्राम ने बताया कि मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के तहत निराश्रित गोवंश आश्रय स्थलों से चार गोवंश गोद लेने वाले लाभार्थियों को 72 हजार रुपये प्रतिवर्ष डीबीटी सहायता प्रदान की जा रही है।

उन्होंने “पशुपालन आपके द्वार” अभियान के तहत संचालित मोबाइल वेटनरी यूनिट्स की जानकारी देते हुए कहा कि पशु स्वास्थ्य सेवाओं को गांव स्तर तक पहुंचाने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं।

जलवायु परिवर्तन के अनुरूप खेती पर जोर

प्रमुख सचिव कृषि डॉ. एम.के.एस. सुन्दरम ने किसानों को प्रदेश के नौ कृषि-जलवायु क्षेत्रों के अनुसार फसल चयन करने, संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाने और फसल बीमा योजनाओं का लाभ लेने की सलाह दी।

फार्मर परियोजना के प्रधान सलाहकार अमित मोहन प्रसाद ने ग्लोबल वार्मिंग और बदलते मौसम के प्रभावों को देखते हुए जलवायु-अनुकूल खेती तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता बताई।

चना-मटर बीजों पर 75% अनुदान, पर्याप्त उर्वरक भंडारण

कृषि निदेशक त्रयंबक मणि त्रिपाठी ने बताया कि प्रदेश में पहली बार चना और मटर के बीजों की खरीद पर 75 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। इसके अलावा किसानों को 4.68 लाख निशुल्क सरसों मिनीकिट उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि रबी सीजन के लिए प्रदेश में 15.50 लाख मीट्रिक टन यूरिया और 6.25 लाख मीट्रिक टन डीएपी का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित कर लिया गया है, जिससे किसानों को उर्वरकों की उपलब्धता में किसी प्रकार की कठिनाई नहीं होगी।

वैज्ञानिकों ने साझा की नई कृषि तकनीकें

तकनीकी सत्र में अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (आईआरआरआई), वाराणसी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आर.के. मलिक ने फसल अवशेष प्रबंधन, जीरो टिलेज तकनीक और लागत घटाने वाली कृषि पद्धतियों पर विस्तार से जानकारी दी।

वहीं चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. महक सिंह ने किसानों को सरसों और अलसी की नवीनतम उन्नत किस्मों की जानकारी दी। नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक पंकज कुमार ने केसीसी नवीनीकरण, फसल वित्त और एफपीओ प्रबंधन पर व्यावहारिक सुझाव दिए।

किसानों की आय बढ़ाने और आत्मनिर्भर कृषि की दिशा में बड़ा कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि रबी उत्पादकता गोष्ठी जैसे कार्यक्रम किसानों तक नई तकनीकों, गुणवत्तायुक्त बीज, वित्तीय सहायता और सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाने का प्रभावी माध्यम हैं। प्रदेश सरकार द्वारा निर्धारित 510 लाख मीट्रिक टन रबी उत्पादन लक्ष्य, दलहन-तिलहन मिशन, जलवायु अनुकूल खेती और सहकारिता आधारित वित्तीय मॉडल आने वाले वर्षों में कृषि क्षेत्र को नई गति दे सकते हैं।

रबी सीजन की सफलता अब इस बात पर निर्भर करेगी कि किसान वैज्ञानिक सलाह, उन्नत बीजों और आधुनिक कृषि तकनीकों को कितनी तेजी से अपनाते हैं।