झारखंड के 1,500 किसानों तक पहुंची आधुनिक कृषि तकनीक, ICAR-IIAB में 119 करोड़ रुपये की नई परियोजनाओं का शुभारंभ!
रांची। आगामी रबी सीजन को ध्यान में रखते हुए किसानों को वैज्ञानिक कृषि तकनीकों, उन्नत बीजों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, पशुपालन और एकीकृत कृषि प्रणाली से जोड़ने के लिए आईसीएआर–भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (ICAR-IIAB), गढ़खटंगा, रांची में प्री-रबी किसान गोष्ठी-सह-कृषि इनपुट वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। अनुसूचित जाति उप-योजना (SCSP) एवं जनजातीय उप-योजना (TSP) के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में रांची, खूंटी, गुमला और रामगढ़ जिलों से लगभग 1,500 किसानों ने भाग लिया।
कार्यक्रम में किसानों को केवल कृषि इनपुट उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि वैज्ञानिकों और किसानों के बीच प्रत्यक्ष संवाद स्थापित करते हुए रबी फसलों की तैयारी, फसल विविधीकरण, पशुधन प्रबंधन, प्राकृतिक खेती, जैविक खेती और आधुनिक कृषि प्रौद्योगिकियों के व्यावहारिक पहलुओं पर जानकारी दी गई। कार्यक्रम का व्यापक उद्देश्य अनुसंधान संस्थानों में विकसित तकनीकों को खेतों तक पहुंचाना और किसानों को बदलते कृषि परिवेश के अनुरूप अधिक टिकाऊ एवं लाभकारी खेती के लिए तैयार करना रहा।
ICAR-IIAB की नई सुविधाओं का उद्घाटन
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ICAR-IIAB की कई नई सुविधाओं का उद्घाटन किया। इनमें एडमिन-कम-स्कूल भवन, बिरसा मुंडा बहुउद्देशीय सभागार, जयपाल सिंह मुंडा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और NEXTGEN Breeding Facility प्रमुख हैं।
इसके साथ ही संस्थान में नए गेस्ट हाउस की आधारशिला भी रखी गई। इसकी लागत 119 करोड़ रुपये बताई गई है। इन सुविधाओं के विकसित होने से संस्थान में कृषि जैव प्रौद्योगिकी, फसल सुधार, आधुनिक पौध प्रजनन, प्रशिक्षण तथा वैज्ञानिक गतिविधियों के विस्तार की उम्मीद है।
नई सुविधाओं में NEXTGEN Breeding Facility को विशेष महत्व दिया जा रहा है। आधुनिक प्रजनन तकनीकों के माध्यम से बेहतर कृषि किस्मों के विकास की दिशा में इस तरह की आधारभूत संरचना महत्वपूर्ण मानी जाती है। जलवायु परिवर्तन, बदलते मौसम, रोग एवं कीटों का बढ़ता दबाव और किसानों की अधिक उत्पादक किस्मों की मांग को देखते हुए आधुनिक फसल प्रजनन अनुसंधान की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
झारखंड की पारंपरिक समझ को आधुनिक कृषि से जोड़ने पर जोर
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किसानों को संबोधित करते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने झारखंड की समृद्ध प्राकृतिक और पारंपरिक विरासत का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य की जनजातीय परंपराओं में जल, पौधों, जंगल और प्रकृति के अन्य संसाधनों के संरक्षण को लेकर लंबे समय से व्यावहारिक ज्ञान मौजूद है।
उन्होंने कहा कि कृषि के सामने मौजूद वर्तमान चुनौतियों का समाधान पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के बीच बेहतर तालमेल से निकाला जा सकता है। किसानों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप फसल और किस्मों का चयन करने के साथ-साथ आधुनिक बीज, वैज्ञानिक तकनीक और कृषि अनुसंधान का लाभ उठाना चाहिए।
कृषि मंत्री ने ICAR-IIAB को अनुसंधान, नवाचार और आत्मनिर्भरता के संगम के रूप में विकसित करने की दिशा में संस्थान के प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कृषि अनुसंधान का वास्तविक लाभ तभी दिखाई देगा, जब प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीकें खेतों तक पहुंचें और किसान उन्हें व्यवहार में अपना सकें।
स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार फसल चयन जरूरी
झारखंड की भौगोलिक एवं कृषि परिस्थितियों को देखते हुए कृषि मंत्री ने स्थानीय स्तर पर उपयुक्त फसलों और किस्मों की पहचान पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि एक ही कृषि तकनीक या फसल मॉडल को हर क्षेत्र में समान रूप से लागू करना उचित नहीं है। मिट्टी, वर्षा, तापमान, सिंचाई की उपलब्धता और बाजार की मांग को ध्यान में रखकर खेती की योजना बनाना अधिक प्रभावी हो सकता है।
उन्होंने किसानों तक उन्नत बीजों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने और कृषि अनुसंधान संस्थानों द्वारा विकसित तकनीकों के प्रसार को मजबूत करने की आवश्यकता बताई।
एकीकृत कृषि प्रणाली से बढ़ सकती है किसान की आय
केंद्रीय कृषि मंत्री ने खेती को केवल एक फसल तक सीमित रखने के बजाय एकीकृत कृषि प्रणाली को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। इसमें फसल उत्पादन के साथ सब्जी, पशुपालन, डेयरी और अन्य कृषि आधारित गतिविधियों को जोड़ा जा सकता है।
ऐसी व्यवस्था में एक इकाई से निकलने वाले संसाधनों का उपयोग दूसरी इकाई में किया जा सकता है। उदाहरण के लिए फसल अवशेषों का उपयोग पशु आहार या अन्य कृषि गतिविधियों में और पशुधन से प्राप्त जैविक पदार्थों का उपयोग खेतों में किया जा सकता है। इससे संसाधनों की बचत के साथ कृषि प्रणाली को अधिक टिकाऊ बनाया जा सकता है।
नकली बीज और मिलावटी कृषि इनपुट पर चिंता
कृषि मंत्री ने किसानों को गुणवत्तापूर्ण कृषि आदान उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने नकली बीज, मिलावटी उर्वरक और घटिया कीटनाशकों की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण की आवश्यकता बताई।
किसानों के लिए गुणवत्तापूर्ण इनपुट इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि खराब गुणवत्ता वाले बीज या कृषि रसायनों का सीधा असर उत्पादन और आय पर पड़ता है। उन्होंने किसान कल्याणकारी योजनाओं का लाभ गांव-गांव तक पहुंचाने तथा रबी मौसम से पहले किसानों को आवश्यक वैज्ञानिक जानकारी और प्रशिक्षण उपलब्ध कराने का आह्वान किया।
उन्होंने वैज्ञानिकों के “लैब टू लैंड” प्रयासों की सराहना करते हुए आने वाले समय में देशव्यापी “खेत बचाओ अभियान” शुरू करने का आह्वान भी किया।
किसानों की खाद्य सुरक्षा में अहम भूमिका : भागीरथ चौधरी
कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने किसानों को देश की खाद्य सुरक्षा और आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने किसानों से आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के साथ-साथ कृषि उत्पादों में मूल्य संवर्धन की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।
उन्होंने किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को मजबूत बनाने और कृषि विज्ञान केंद्रों की भूमिका को और प्रभावी करने पर जोर दिया। उन्होंने किसानों को मृदा परीक्षण कराने तथा मिट्टी की आवश्यकता के अनुसार संतुलित उर्वरक उपयोग करने की सलाह दी।
राज्य मंत्री ने किसानों को अपनी कृषि भूमि के एक हिस्से में प्राकृतिक खेती का प्रयोग करने के लिए भी प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि कृषि में नई तकनीकों को अपनाने के साथ मिट्टी की सेहत और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को भी प्राथमिकता देनी होगी।
पूर्वी भारत में कृषि विकास की व्यापक संभावनाएं
DARE के सचिव एवं ICAR के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट ने झारखंड सहित पूर्वी भारत में कृषि क्षेत्र के विकास की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की कृषि क्षमता को बेहतर बनाने के लिए स्थानीय परिस्थितियों पर आधारित अनुसंधान को मजबूत करने की जरूरत है।
उन्होंने Rice-Fallow Intensification को व्यापक स्तर पर अपनाने की आवश्यकता बताई। धान की कटाई के बाद बड़ी मात्रा में भूमि कुछ समय के लिए खाली रह जाती है। ऐसी भूमि में उपयुक्त रबी फसलों को बढ़ावा देकर खेती की तीव्रता और किसानों की आय दोनों में सुधार की संभावनाएं पैदा की जा सकती हैं।
डॉ. जाट ने झारखंड में अम्लीय मिट्टी और फास्फोरस की कमी जैसी समस्याओं के समाधान के लिए अनुसंधान पर जोर दिया। उन्होंने पशुधन की उत्पादकता बढ़ाने, स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप फसल एवं किस्म चयन तथा प्राकृतिक एवं जैविक खेती को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता भी बताई।
कृषि अनुसंधान किसानों की जरूरत के अनुरूप हो
ICAR के उप महानिदेशक (फसल विज्ञान) डॉ. डी. के. यादव ने कहा कि कृषि अनुसंधान को किसानों की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना जरूरी है। उन्होंने अनुसंधान संस्थानों में विकसित तकनीकों को अंतिम किसान तक पहुंचाने के लिए वैज्ञानिकों, विस्तार तंत्र और किसानों के बीच मजबूत संपर्क की आवश्यकता बताई।
उन्होंने विद्यार्थियों के प्रशिक्षण और उनके लिए कृषि अनुसंधान एवं नवाचार के क्षेत्र में बेहतर अवसर विकसित करने के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
संस्थान की अनुसंधान सुविधाओं का किया गया निरीक्षण
कार्यक्रम से पहले केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने डॉ. एम. एल. जाट, डॉ. डी. के. यादव, ICAR-IIAB के निदेशक डॉ. सुजय रक्षित तथा संयुक्त निदेशक (अनुसंधान) डॉ. विजय पाल भदाना के साथ संस्थान की विभिन्न सुविधाओं का अवलोकन किया।
प्रतिनिधिमंडल ने डेयरी फार्म, फसल अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र, NEXTGEN Breeding Facility और एकीकृत कृषि प्रणाली इकाई का दौरा किया। इस दौरान वैज्ञानिकों ने संस्थान में चल रहे अनुसंधान और किसानों के लिए विकसित तकनीकों के बारे में जानकारी दी।
पशुधन के आनुवंशिक सुधार में भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीक
डेयरी फार्म के भ्रमण के दौरान प्रतिनिधिमंडल को पशुधन की आनुवंशिक गुणवत्ता सुधारने के लिए अपनाई जा रही Embryo Transfer यानी भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीक के बारे में जानकारी दी गई।
यह तकनीक उच्च आनुवंशिक क्षमता वाले पशुओं की उपयोगी आनुवंशिक विशेषताओं को तेजी से आगे बढ़ाने में सहायक हो सकती है। डेयरी क्षेत्र में दूध उत्पादन और पशुधन की उत्पादकता बढ़ाने के लिए आनुवंशिक सुधार को महत्वपूर्ण आधार माना जाता है।
IFS इकाई में किसानों से सीधा संवाद
एकीकृत कृषि प्रणाली इकाई में प्रतिनिधिमंडल ने किसानों के साथ संवाद किया। यहां कृषि अपशिष्ट के पुनर्चक्रण, संसाधनों के बेहतर उपयोग और विभिन्न कृषि उद्यमों को एक-दूसरे से जोड़ने की तकनीकों की जानकारी दी गई।
इस मॉडल का उद्देश्य उपलब्ध भूमि, पानी, जैविक संसाधनों और श्रम का अधिक दक्षता से इस्तेमाल करते हुए किसान की आय के कई स्रोत तैयार करना है। छोटे और सीमांत किसानों के लिए ऐसी प्रणालियां विशेष रूप से उपयोगी हो सकती हैं, क्योंकि इससे एक ही कृषि गतिविधि पर निर्भरता कम होती है।
प्रदर्शनी में दिखाई गईं कृषि और पशुधन तकनीकें
कार्यक्रम स्थल पर ICAR संस्थानों और झारखंड सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा कृषि फसलों, पशुधन, डेयरी तकनीकों, कृषि योजनाओं और किसान केंद्रित नवाचारों पर आधारित प्रदर्शनी लगाई गई।
किसानों को अनुसंधान उपलब्धियों और नई तकनीकों के बारे में सीधे जानकारी दी गई। इस तरह की प्रदर्शनियां किसानों को किसी तकनीक को केवल सुनने के बजाय उसके व्यावहारिक उपयोग को समझने का अवसर देती हैं।
रबी फसलों से लेकर पशुपालन तक प्रशिक्षण
किसान गोष्ठी में रबी सीजन से संबंधित कई महत्वपूर्ण विषयों पर वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों ने जानकारी दी। FPOs और उनके बाजार अवसर, एथनो-वेटरिनरी मेडिसिन, डेयरी फार्मिंग, फल फसलों की उत्पादन तकनीक, रबी फसलों में समेकित कीट प्रबंधन, फसल विविधीकरण, एकीकृत कृषि प्रणाली, जैविक एवं प्राकृतिक खेती, पशुधन आहार प्रबंधन और लाख की खेती जैसे विषयों पर किसानों के साथ चर्चा हुई।
किसानों ने अपनी स्थानीय समस्याओं और खेती से जुड़ी चुनौतियों को वैज्ञानिकों के सामने रखा। इससे किसान–वैज्ञानिक संवाद को व्यावहारिक आधार मिला।
किसानों को वितरित किए गए कृषि एवं पशुधन इनपुट
कार्यक्रम में किसानों को विभिन्न कृषि एवं पशुधन इनपुट भी वितरित किए गए। इनमें नैनो यूरिया, नैनो डीएपी, मिनरल मिक्सचर, उन्नत बीज, गेहूं, मटर, सरसों और सब्जियों के बीज किट, मिल्क कैन कूलर तथा उच्च उत्पादकता वाली टमाटर और बैंगन की बीज किस्में शामिल थीं।
इनपुट वितरण का उद्देश्य किसानों को रबी मौसम के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने के साथ नई तकनीकों और उन्नत कृषि सामग्री के उपयोग के लिए प्रोत्साहित करना रहा।
संस्थान के योगदानकर्ताओं का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान ICAR-IIAB के विकास और योगदान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पूर्व वैज्ञानिकों एवं अधिकारियों को भी सम्मानित किया गया। इनमें डॉ. आर. रमानी, डॉ. के. के. शर्मा, डॉ. तिलक राज शर्मा और ICAR-IIAB के प्रथम नियमित निदेशक डॉ. अरुणव पटनायक शामिल रहे।
इस अवसर पर संस्थान द्वारा विकसित विभिन्न प्रकाशनों और प्रौद्योगिकियों का विमोचन भी किया गया।
“लैब टू लैंड” को मजबूत करने का संदेश
कार्यक्रम के समापन पर ICAR-IIAB के निदेशक डॉ. सुजय रक्षित ने झारखंड के किसानों के हित में किसान–वैज्ञानिक–नीति-निर्माता संवाद को लगातार मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
उन्होंने कहा कि कृषि अनुसंधान का अंतिम लक्ष्य किसानों की उत्पादकता, आय और कृषि की स्थिरता में सुधार लाना होना चाहिए। इसके लिए वैज्ञानिक संस्थानों में विकसित तकनीकों को खेतों तक पहुंचाने और किसानों से मिलने वाले फीडबैक को दोबारा अनुसंधान प्रक्रिया से जोड़ना आवश्यक है।
रबी सीजन से पहले बड़ा संदेश
ICAR-IIAB का यह आयोजन झारखंड में कृषि विकास के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण को सामने रखता है। इसमें एक ओर आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी और फसल प्रजनन जैसी उन्नत अनुसंधान सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर दिया गया, वहीं दूसरी ओर खेत स्तर पर मिट्टी, बीज, उर्वरक, कीट प्रबंधन, पशुधन, प्राकृतिक संसाधन और बाजार से जुड़े मुद्दों को भी चर्चा में शामिल किया गया।
कृषि क्षेत्र के लिए इसका सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि भविष्य की खेती केवल अधिक उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि कम संसाधनों में बेहतर उत्पादन, मिट्टी और जल संरक्षण, पशुधन की उत्पादकता, कृषि विविधीकरण और बाजार से बेहतर जुड़ाव पर आधारित होगी। झारखंड जैसे राज्य में पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक अनुसंधान के साथ जोड़कर स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल कृषि मॉडल विकसित किए जाने की संभावनाएं इस कार्यक्रम से और स्पष्ट हुई हैं।





























