October 31, 2026 2:06 PM

Krishi Times

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मथुरा में पीएम-किसान उत्सव, 800 किसानों की भागीदारी!

मथुरा में पीएम-किसान उत्सव दिवस: 800 किसानों ने देखा 24वीं किस्त जारी होने का सीधा प्रसारण, बकरी पालकों को FPO बनाने के लिए किया प्रेरित!

मखदूम स्थित केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने किसानों से वैज्ञानिक खेती और पशुपालन अपनाने का किया आह्वान

मथुरा। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 24वीं किस्त जारी होने के अवसर पर शुक्रवार को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (CIRG), मखदूम, फरह, मथुरा में पीएम-किसान उत्सव दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा योजना की 24वीं किस्त जारी किए जाने के समारोह का सीधा प्रसारण किया गया। इस अवसर पर लगभग 800 किसान, जनप्रतिनिधि, वैज्ञानिक और अन्य आगंतुक उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनके साथ विधायक योगेश नौहवार, विधायक सुभाष गर्ग, विधायक एवं जिलाध्यक्ष प्रदीप चौधरी (गुड्डू), पूर्व प्रमुख प्रीतम चौधरी सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

किसानों की आय बढ़ाने में खेती के साथ पशुपालन की अहम भूमिका

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने कहा कि किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और कृषि को लाभकारी बनाने के लिए केंद्र सरकार विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से प्रयास कर रही है। उन्होंने किसानों से सरकारी योजनाओं की जानकारी लेकर उनका लाभ उठाने तथा खेती में वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने की अपील की।

उन्होंने विशेष रूप से बकरी पालन से जुड़े किसानों को संगठित होकर किसान उत्पादक संगठन (FPO) और स्वयं सहायता समूह (SHG) बनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि किसान यदि समूह बनाकर उत्पादन के साथ विपणन की जिम्मेदारी भी संभालें तो उन्हें अपने उत्पादों का बेहतर बाजार मिल सकता है। सामूहिक मार्केटिंग से बकरी पालकों की बाजार तक पहुंच बढ़ाने और उनकी आय के नए अवसर विकसित करने में मदद मिल सकती है।

अनुसंधान और प्रशिक्षण से पशुपालकों को सशक्त बना रहा CIRG

संस्थान के निदेशक डॉ. मनीष कुमार चेटली ने अतिथियों एवं किसानों का स्वागत करते हुए कहा कि केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान अनुसंधान, प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन के माध्यम से बकरी पालन तथा पशुधन आधारित आजीविका को मजबूत बनाने के लिए लगातार काम कर रहा है।

उन्होंने कहा कि कृषि और पशुपालन एक-दूसरे के पूरक हैं। किसानों के लिए खेती के साथ पशुपालन को अपनाना आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित करने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। इसके लिए वैज्ञानिक पशुपालन पद्धतियों, बेहतर प्रबंधन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर ध्यान देना जरूरी है।

उन्होंने किसानों से संस्थान द्वारा विकसित तकनीकों एवं उपलब्ध प्रशिक्षण सुविधाओं का लाभ उठाने और आधुनिक वैज्ञानिक जानकारियों को अपने कृषि एवं पशुपालन कार्यों में शामिल करने का आग्रह किया।

‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत मृदा संरक्षण पर जोर

कार्यक्रम के दौरान संस्थान के वैज्ञानिकों ने किसानों को मिट्टी की सेहत, मृदा उर्वरता बनाए रखने और टिकाऊ कृषि पद्धतियों के बारे में जानकारी दी। ‘खेत बचाओ अभियान‘ के तहत भूमि एवं मृदा संसाधनों के संरक्षण को कृषि उत्पादन की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए आवश्यक बताया गया।

वैज्ञानिकों ने बताया कि मिट्टी की गुणवत्ता में गिरावट का सीधा असर फसल उत्पादन और खेती की लागत पर पड़ सकता है। इसलिए संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग और पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियां अपनाना जरूरी है।

किसानों को खेती और पशुपालन के समन्वित मॉडल की संभावनाओं से भी अवगत कराया गया। ऐसे मॉडल में फसल अवशेषों का उपयोग पशु आहार के रूप में और पशुधन से प्राप्त जैविक खाद का इस्तेमाल खेतों की उर्वरता बनाए रखने में किया जा सकता है। इससे कृषि संसाधनों का बेहतर उपयोग और खेती की टिकाऊ व्यवस्था विकसित करने में मदद मिलती है।

किसानों और वैज्ञानिकों के बीच सीधा संवाद

इस आयोजन ने किसानों को केंद्र सरकार की योजनाओं की जानकारी प्राप्त करने के साथ वैज्ञानिकों से सीधे संवाद करने का अवसर दिया। विशेष रूप से बकरी पालन से जुड़े किसानों के लिए संस्थान की तकनीकी जानकारी, प्रशिक्षण और संगठित विपणन की संभावनाएं उपयोगी रहीं।

कार्यक्रम का व्यापक उद्देश्य किसानों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने, कृषि एवं पशुपालन में आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूकता विकसित करना रहा। आयोजन ने यह संदेश भी दिया कि खेती के साथ वैज्ञानिक पशुपालन, किसान संगठनों और बेहतर बाजार व्यवस्था को जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की संभावनाएं विकसित की जा सकती हैं।