October 29, 2026 1:47 AM

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दिल्ली देहात में खेत बचाओ अभियान, रबी फसलों पर वैज्ञानिकों की सलाह!

दिल्ली देहात में ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत किसानों से रूबरू हुए कृषि वैज्ञानिक, रबी फसल प्रबंधन पर दिया जोर!

मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर फोकस; काजीपुर गांव में किसानों को दी गई वैज्ञानिक सलाह

नई दिल्ली, 28 अक्टूबर 2026। रबी सीजन में फसलों की बेहतर उत्पादकता, मिट्टी की उर्वरता और कृषि संसाधनों के संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली देहात में ‘खेत बचाओ अभियान–रबी 2026’ के तहत किसानों और कृषि वैज्ञानिकों के बीच सीधा संवाद किया जा रहा है। इसी कड़ी में कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), उजवा, दिल्ली ने 27 अक्टूबर को काजीपुर गांव में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर किसानों को गेहूं और सरसों की फसलों के वैज्ञानिक प्रबंधन, संतुलित उर्वरक उपयोग तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों की जानकारी दी।

कार्यक्रम में वैज्ञानिकों ने किसानों को समझाया कि रबी फसलों से बेहतर उत्पादन प्राप्त करने के लिए समय पर कृषि कार्य करना, मिट्टी की जरूरत के अनुसार पोषक तत्वों का इस्तेमाल करना और फसलों की नियमित निगरानी करना जरूरी है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा मृदा स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर कृषि संबंधी निर्णय लेने पर जोर दिया।

30 नवंबर तक चलेगा राष्ट्रव्यापी अभियान

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग तथा कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग की ओर से 22 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक ‘खेत बचाओ अभियान–रबी 2026’ चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य गांव-गांव तक कृषि अनुसंधान, आधुनिक तकनीकों और सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाना है, ताकि किसान वैज्ञानिक सलाह के आधार पर खेती की लागत, उत्पादन और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन से जुड़े फैसले ले सकें।

अभियान के तहत ‘लैब टू लैंड’ यानी प्रयोगशाला से खेत तक वैज्ञानिक ज्ञान पहुंचाने की अवधारणा को प्राथमिकता दी जा रही है। इसके अंतर्गत कृषि वैज्ञानिक और विशेषज्ञ सीधे किसानों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याओं पर चर्चा कर रहे हैं और स्थानीय कृषि परिस्थितियों के अनुरूप तकनीकी जानकारी साझा कर रहे हैं।

दिल्ली के 25 स्थानों पर किसानों से संवाद

दिल्ली में इस अभियान के तहत कृषि विज्ञान केंद्र, उजवा द्वारा दक्षिण-पश्चिम, उत्तर-पश्चिम और उत्तरी दिल्ली के 25 स्थानों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। प्रत्येक टीम में चार से पांच विषय विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों, विभिन्न विभागों के अधिकारियों और नवोन्मेषी किसानों को शामिल किया जा रहा है। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), पूसा, नई दिल्ली के वरिष्ठ वैज्ञानिक भी इन कार्यक्रमों में भाग लेकर किसानों को अनुसंधान आधारित जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं।

इस पहल का उद्देश्य कृषि संबंधी जानकारी को केवल प्रशिक्षण कक्षों तक सीमित रखने के बजाय किसानों के खेतों और स्थानीय जरूरतों से जोड़ना है। इससे किसानों को फसल उत्पादन के दौरान आने वाली व्यावहारिक समस्याओं पर विशेषज्ञों से सीधे चर्चा करने का अवसर मिलता है।

गेहूं की उन्नत किस्मों और समयबद्ध बुवाई पर जोर

काजीपुर गांव में आयोजित कार्यक्रम के दौरान किसानों को आगामी गेहूं की फसल के लिए उपयुक्त उन्नत किस्मों के चयन, समयानुसार बुवाई और संतुलित पोषण प्रबंधन की जानकारी दी गई। वैज्ञानिकों ने बताया कि क्षेत्र की जलवायु, मिट्टी की स्थिति, उपलब्ध सिंचाई और बुवाई के समय के अनुरूप किस्म का चयन करना बेहतर उत्पादन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

किसानों को सलाह दी गई कि वे मिट्टी की जांच के आधार पर उर्वरकों का इस्तेमाल करें और फसल की आवश्यकता के अनुसार पोषक तत्वों का प्रबंधन करें। इससे अनावश्यक खर्च कम करने, मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने और उपलब्ध संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग करने में मदद मिल सकती है।

सरसों की फसल में नियमित निगरानी जरूरी

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रबी सीजन की प्रमुख तिलहनी फसल सरसों के बेहतर प्रबंधन पर भी चर्चा की गई। किसानों को फसल की नियमित निगरानी करने, कीटों और रोगों के शुरुआती लक्षणों की पहचान करने तथा समस्या दिखाई देने पर उचित प्रबंधन उपाय अपनाने के लिए जागरूक किया गया।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण के अनुसार, समय पर समस्या की पहचान होने से फसल को होने वाले नुकसान को कम करने और अनावश्यक कीटनाशक उपयोग से बचने में सहायता मिल सकती है। किसानों को सलाह दी गई कि वे स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप विशेषज्ञों की सिफारिशों के आधार पर ही फसल सुरक्षा संबंधी उपाय अपनाएं।

प्राकृतिक खेती और मिट्टी के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान

कार्यक्रम में प्राकृतिक खेती और पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। किसानों को कृषि संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए प्रेरित किया गया।

मृदा स्वास्थ्य टिकाऊ खेती की बुनियाद है। मिट्टी की गुणवत्ता में गिरावट, पोषक तत्वों का असंतुलन और कृषि आदानों का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल लंबे समय में उत्पादन लागत तथा भूमि की उत्पादकता को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में मिट्टी की जांच, संतुलित पोषण प्रबंधन और स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल कृषि पद्धतियां अपनाना महत्वपूर्ण है।

वैज्ञानिक सलाह से खेती को अधिक लाभकारी बनाने की पहल

‘खेत बचाओ अभियान–रबी 2026’ का महत्व इस बात में है कि यह किसानों को वैज्ञानिक जानकारी से जोड़ने के साथ-साथ खेती में समय पर और सही निर्णय लेने के लिए प्रेरित करता है। गेहूं और सरसों जैसी प्रमुख रबी फसलों में बेहतर प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और फसल सुरक्षा के उपाय अपनाकर किसान उपलब्ध संसाधनों का अधिक कुशल उपयोग कर सकते हैं।

दिल्ली देहात में चल रहे ये कार्यक्रम कृषि अनुसंधान और खेतों के बीच की दूरी कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं। अभियान के शेष चरणों में भी किसानों तक आधुनिक कृषि तकनीकों और सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाने पर जोर रहेगा, जिससे खेती को अधिक उत्पादक, टिकाऊ और आर्थिक रूप से लाभकारी बनाने में मदद मिल सके।