October 29, 2026 1:51 AM

Krishi Times

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प्राकृतिक खेती से चिया सीड्स उगा रहे किसान!

चिया सीड्स की खेती से किसानों को नई राह दिखा रहे सूर्यभान सिंह, 5 एकड़ में ₹10 हजार लागत से कमाए ₹72 हजार!

मझौली के किसान का कृषि नवाचार: प्राकृतिक खेती और जैविक खाद के इस्तेमाल से वैकल्पिक फसलों की ओर बढ़ रहे किसान

मझौली। पारंपरिक फसलों के साथ नई और संभावनाशील फसलों को अपनाकर किसान अपनी आय बढ़ाने के रास्ते तलाश सकते हैं। मध्य प्रदेश के मझौली विकासखंड के ग्राम समधार निवासी किसान सूर्यभान सिंह इसी दिशा में प्रयास कर रहे हैं। वे प्राकृतिक तरीके से चिया सीड्स की खेती कर न केवल अपने अनुभवों को जमीन पर उतार रहे हैं, बल्कि आसपास के किसानों को भी इस फसल को अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

सूर्यभान सिंह पिछले पांच वर्षों से आत्मा परियोजना से जुड़े हैं। उनके साथ करीब 20 अन्य किसान भी प्राकृतिक चिया सीड्स की खेती की पद्धति अपनाकर इसके उत्पादन और बाजार की संभावनाओं को समझ रहे हैं। उनका प्रयास है कि किसान परंपरागत खेती के साथ ऐसी वैकल्पिक फसलों पर भी विचार करें, जिनसे कम लागत में अतिरिक्त आय हासिल करने की संभावना बन सके।

5 एकड़ में खेती, ₹10 हजार की लागत और ₹72 हजार की आय

सूर्यभान सिंह के अनुसार, उन्होंने आत्मा परियोजना की संचालक डॉ. इंदिरा त्रिपाठी के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद नवाचार प्रदर्शन के तहत पांच एकड़ क्षेत्र में चिया सीड्स की खेती की। इस खेती पर कुल लगभग 10 हजार रुपये खर्च हुए। फसल तैयार होने के बाद उन्होंने इसका विक्रय नीमच मंडी में किया, जिससे उन्हें 72 हजार रुपये की आय प्राप्त हुई।

उनके बताए आंकड़ों के अनुसार, पांच एकड़ में खेती की लागत और बिक्री से प्राप्त राशि के बीच 62 हजार रुपये का अंतर रहा। हालांकि, इसे शुद्ध मुनाफा मानने से पहले यह स्पष्ट करना जरूरी है कि बिक्री की रकम में से सभी खर्च शामिल थे या नहीं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, यह अनुभव उनके लिए वैकल्पिक फसल की संभावनाओं को समझने का अवसर बना।

जैविक खाद तैयार कर प्राकृतिक खेती को दे रहे बढ़ावा

सूर्यभान सिंह चिया सीड्स की खेती में खुद तैयार की गई जैविक खाद का इस्तेमाल करते हैं। वे दूसरे किसानों को भी जैविक खाद बनाने और खेती में उसके उपयोग के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। उनका मानना है कि खेती में उपलब्ध स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग करके किसान बाहरी कृषि आदानों पर होने वाले खर्च को नियंत्रित करने की दिशा में काम कर सकते हैं।

प्राकृतिक खेती के प्रति उनका यह प्रयास ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब किसान उत्पादन लागत कम करने और खेती को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाए रखने के विकल्प तलाश रहे हैं। हालांकि, किसी भी फसल में लागत और लाभ मिट्टी, जलवायु, उत्पादन, बाजार भाव तथा अपनाई गई कृषि पद्धति के अनुसार बदल सकते हैं।

चिया सीड्स: किसानों के लिए एक वैकल्पिक फसल

चिया सीड्स को पोषण संबंधी उपयोगों के कारण बाजार में पहचान मिली है। इसके बीजों का उपयोग खाद्य पदार्थों और स्वास्थ्य-केंद्रित उत्पादों में किया जाता है। यही वजह है कि कुछ किसान इसे पारंपरिक फसलों के साथ एक वैकल्पिक फसल के रूप में देख रहे हैं।

लेकिन चिया की खेती शुरू करने से पहले किसानों को अपने क्षेत्र की जलवायु और मिट्टी की अनुकूलता, बीज की उपलब्धता, सिंचाई की जरूरत, फसल की कटाई एवं प्रसंस्करण और खरीदारों की उपलब्धता की जानकारी जुटानी चाहिए। केवल संभावित बाजार मांग के आधार पर बड़े क्षेत्र में खेती करना जोखिम भरा हो सकता है।

प्रशिक्षण और बाजार से जुड़ाव पर जोर

सूर्यभान सिंह का अनुभव बताता है कि कृषि नवाचार को आगे बढ़ाने में प्रशिक्षण, खेत पर प्रदर्शन और किसानों के बीच अनुभव साझा करने की अहम भूमिका है। आत्मा परियोजना से जुड़कर उन्होंने चिया सीड्स की खेती का प्रयोग किया और अब दूसरे किसानों को भी इस दिशा में जानकारी दे रहे हैं।

यदि किसानों को उपयुक्त तकनीकी मार्गदर्शन, प्रमाणिक उत्पादन जानकारी और बाजार से जुड़ाव मिलता है, तो चिया जैसी वैकल्पिक फसलें खेती में विविधता लाने का माध्यम बन सकती हैं। इसके लिए स्थानीय स्तर पर प्रदर्शन, लागत-लाभ का आकलन और विश्वसनीय खरीदारों से संपर्क जरूरी है।

सरांश

सूर्यभान सिंह का प्रयास किसानों को यह सोचने के लिए प्रेरित करता है कि खेती में नई संभावनाओं की तलाश केवल अधिक उत्पादन तक सीमित नहीं होनी चाहिए। फसल विविधीकरण, लागत प्रबंधन, प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग और बाजार की समझ को साथ लेकर चलना भी टिकाऊ कृषि की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

Source: Collector Jabalpur