बिहार में केयर इकोनॉमी को बढ़ावा देने पर जोर, महिला उद्यमिता और रोजगार के नए अवसरों पर चर्चा!
जीविका और यूनिसेफ की संयुक्त कार्यशाला में देखभाल सेवाओं को आजीविका से जोड़ने की रणनीति पर चर्चा
पटना, – बिहार में देखभाल आधारित अर्थव्यवस्था (केयर इकोनॉमी) को विकसित करने, रोजगार के नए अवसर पैदा करने और महिला-नेतृत्व वाले ग्रामीण उद्यमों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से बुधवार को पटना में जीविका और यूनिसेफ के संयुक्त तत्वावधान में कार्यशाला आयोजित की गई। “Building Bihar’s Care Economy: Services, Livelihoods and Pathways to Scale” विषय पर आयोजित इस कार्यशाला में देखभाल सेवाओं के विस्तार, उन्हें आजीविका के साधन के रूप में विकसित करने और बड़े स्तर पर प्रभावी ढंग से संचालित करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
कार्यशाला के दूसरे सत्र में नवाचार आधारित उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए परामर्श कार्यशाला भी आयोजित की गई। इसमें सरकारी संस्थानों, स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों, सामाजिक संगठनों, उद्यमियों और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने इस बात पर विचार किया कि देखभाल सेवाओं को सामाजिक कल्याण, महिला सशक्तीकरण और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन से किस प्रकार जोड़ा जा सकता है।
देखभाल सेवाओं को आजीविका से जोड़ने पर चर्चा
कार्यशाला के तकनीकी सत्र में केयर इकोनॉमी के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने, सेवाओं को संस्थागत स्वरूप देने और उनकी पहुंच व्यापक बनाने के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया गया। साथ ही, देखभाल से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने के लिए नए उद्यम विकसित करने और इनके माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करने पर जोर दिया गया।
केयर इकोनॉमी के अंतर्गत बच्चों, बुजुर्गों और जरूरतमंद लोगों की देखभाल, स्वास्थ्य सहायता तथा अन्य संबंधित सेवाओं को व्यवस्थित रूप से विकसित करने की संभावनाएं महत्वपूर्ण हैं। इस क्षेत्र में प्रशिक्षित सेवा प्रदाताओं, स्थानीय उद्यमों और सामुदायिक संस्थाओं की भागीदारी से रोजगार के नए रास्ते खुल सकते हैं। विशेष रूप से ग्रामीण महिलाओं के लिए ऐसे उद्यम आय के अवसर उपलब्ध कराने के साथ उनकी आर्थिक भागीदारी बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं।
वरिष्ठ अधिकारियों ने किया कार्यशाला का उद्घाटन
कार्यक्रम का शुभारंभ बिहार राजस्व परिषद की अध्यक्ष-सह-सदस्य हरजोत कौर बम्हरा, ग्रामीण विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव एच. आर. श्रीनिवासन, जीविका के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी हिमांशु शर्मा, जीविका की अपर मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी अनन्या सिंह और यूनिसेफ बिहार की फील्ड ऑफिस प्रमुख (प्रभारी) मोना सिन्हा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
कार्यशाला में शामिल प्रतिनिधियों ने देखभाल सेवाओं के विकास के लिए विभिन्न संस्थानों के बीच सहयोग, नवाचार आधारित समाधानों और रोजगारोन्मुखी पहलों की संभावनाओं पर चर्चा की। नवाचार आधारित उद्यमों पर केंद्रित सत्र में ऐसे मॉडल विकसित करने पर विचार हुआ, जिन्हें स्थानीय जरूरतों के अनुरूप अपनाया जा सके और भविष्य में बड़े स्तर पर लागू किया जा सके।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की संभावना
बिहार जैसे राज्य में ग्रामीण महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों और सामुदायिक संगठनों के माध्यम से देखभाल सेवाओं को आजीविका के नए विकल्प के रूप में विकसित करने की संभावनाएं हैं। इसके लिए कौशल विकास, प्रशिक्षण, सेवा की गुणवत्ता, संस्थागत सहयोग और उद्यमों की आर्थिक व्यवहार्यता पर ध्यान देना जरूरी होगा।
कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य केयर इकोनॉमी को सामाजिक जरूरतों तक सीमित रखने के बजाय इसे रोजगार, उद्यमिता और ग्रामीण विकास से जोड़ने के व्यावहारिक रास्तों की पहचान करना रहा। इसके माध्यम से बिहार में देखभाल सेवाओं को संस्थागत स्वरूप देने, महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों का विस्तार करने और आजीविका के नए अवसर विकसित करने के लिए आगे की कार्ययोजना पर सार्थक विमर्श हुआ।





























