October 27, 2026 3:39 PM

Krishi Times

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हैप्पी सीडर से पराली प्रबंधन तक, तकनीक पर जोर!

कृषि को आधुनिक और लाभकारी बनाने पर जोर, किसानों को नई तकनीकों से जोड़ने की पहल!

नई दिल्ली, – कृषि को आधुनिक, लाभकारी और टिकाऊ बनाने के साथ किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से किसानों को वैज्ञानिक तकनीकों, कृषि नवाचारों और आय के विविध स्रोतों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। इसी दिशा में कृषि रोडमैप कार्यक्रम 2026 के तहत 26 अक्टूबर को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली में कृषि भ्रमण दल के किसानों के साथ संवाद किया।

संवाद के दौरान उन्होंने कहा कि खेती को पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़ाकर आधुनिक तकनीकों से जोड़ना और किसानों के लिए खेती को अधिक लाभकारी बनाना सरकार का प्रमुख लक्ष्य है। उन्होंने किसानों को कृषि की नई पद्धतियां अपनाने, संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और उत्पादन लागत कम करने की दिशा में प्रयास करने के लिए प्रेरित किया।

खेती के साथ अन्य गतिविधियों से बढ़ेगी किसानों की आय

किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए फसल उत्पादन के साथ आय के अन्य स्रोत विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों को बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन और मधुमक्खी पालन जैसी गतिविधियां अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

इन गतिविधियों को खेती के साथ जोड़ने से किसानों को आय के अतिरिक्त अवसर मिल सकते हैं। साथ ही, किसी एक फसल या कृषि गतिविधि पर निर्भरता कम करने और जोखिम के बेहतर प्रबंधन में भी मदद मिल सकती है।

कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से खेतों तक पहुंचेगी तकनीक

कार्यक्रम में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अंतर्गत कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) और कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थानों (ATARI) की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया गया। इनके माध्यम से किसानों को नई कृषि तकनीकों, वैज्ञानिक पद्धतियों और आधुनिक नवाचारों से परिचित कराया जा रहा है।

इस पहल का उद्देश्य किसानों को केवल तकनीकी जानकारी देना ही नहीं, बल्कि उन्हें व्यावहारिक प्रशिक्षण के जरिए इन तकनीकों को अपने खेतों में अपनाने के लिए सक्षम बनाना भी है। सफल कृषि मॉडलों को गांवों तक पहुंचाकर अन्य किसानों को भी उनसे सीखने और लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया जा सकता है।

मशीन बैंक और पराली प्रबंधन तकनीकों का प्रदर्शन

कृषि भ्रमण के दौरान किसानों ने आधुनिक कृषि यंत्रों और खेती की उन्नत तकनीकों का व्यावहारिक प्रदर्शन देखा। इनमें प्रमुख रूप से शामिल रहे:

  • मशीन बैंक: कृषि यंत्रों की उपलब्धता बढ़ाकर किसानों को खेती के कार्यों में सहायता देना।

  • हैप्पी सीडर और सुपर सीडर: फसल अवशेषों के बेहतर प्रबंधन के साथ गेहूं की बुवाई जैसी गतिविधियों को सुविधाजनक बनाना।

  • डायरेक्ट सीडिंग: धान की सीधी बुवाई जैसी तकनीकों के माध्यम से पारंपरिक रोपाई के विकल्पों से परिचित कराना।

  • पराली प्रबंधन: फसल अवशेषों को खेत में उपयोग करने और उन्हें जलाने की आवश्यकता कम करने वाली तकनीकों को बढ़ावा देना।

इन तकनीकों का उचित उपयोग कृषि कार्यों में समय और श्रम की बचत करने, संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल तथा पर्यावरणीय दबाव को कम करने में सहायक हो सकता है। हालांकि, इनका लाभ स्थानीय परिस्थितियों, मिट्टी की स्थिति, उपलब्ध मशीनरी और किसानों के तकनीकी प्रशिक्षण पर निर्भर करता है।

वैज्ञानिकों और किसानों के समन्वय से बदलेगी खेती की तस्वीर

कृषि रोडमैप कार्यक्रम 2026 के तहत आयोजित यह संवाद कृषि अनुसंधान, तकनीकी प्रशिक्षण और किसानों के व्यावहारिक अनुभवों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। वैज्ञानिकों, कृषि विज्ञान केंद्रों और किसानों के संयुक्त प्रयासों से नई तकनीकों को खेतों तक पहुंचाने तथा सफल प्रयोगों को व्यापक स्तर पर अपनाने के अवसर बढ़ सकते हैं।

कृषि क्षेत्र के लिए संदेश स्पष्ट है: टिकाऊ खेती और किसानों की आय में सुधार के लिए केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। इसके साथ उत्पादन लागत पर नियंत्रण, फसल विविधीकरण, कृषि यंत्रों तक पहुंच, वैज्ञानिक मार्गदर्शन और बाजार की जरूरतों के अनुरूप उत्पादन को भी प्राथमिकता देनी होगी। यही समन्वित दृष्टिकोण खेती को अधिक लाभकारी और भविष्य की चुनौतियों के प्रति सक्षम बनाने में मदद कर सकता है।

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