October 30, 2026 3:36 PM

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सहकारिता को नई दिशा देंगे अमित शाह, NCDC की बड़ी तैयारी!

किसानों, पशुपालकों,डेयरी और मत्स्यपालन को मिलेगा सहकारी वित्तपोषण का सहारा

93वीं महापरिषद बैठक में अमित शाह ने दिए निर्देश; अक्टूबर 2026 तक ₹4.14 लाख करोड़ से अधिक की वित्तीय सहायता वितरित

नई दिल्ली, 29 अक्टूबर। राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) की महापरिषद की 93वीं बैठक केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में नई दिल्ली स्थित निगम के मुख्यालय में आयोजित हुई। बैठक में सहकारी संस्थाओं के वित्तपोषण का विस्तार, ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने, नई बहुराज्यीय सहकारी संस्थाओं के विकास और निगम की दीर्घकालिक रणनीति पर चर्चा की गई।

बैठक में अमित शाह ने NCDC को अगले 25 वर्षों के लिए व्यापक रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सहकारिता को देश के सर्वस्पर्शी और सर्वसमावेशी विकास का प्रभावी माध्यम बनाने के लिए संस्थागत ढांचे, पूंजी जुटाने की व्यवस्था और कार्यप्रणाली में आवश्यक बदलाव किए जाने चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन के अनुरूप सहकारी क्षेत्र को किसानों, पशुपालकों, मछुआरों, ग्रामीण महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की आय बढ़ाने से जोड़ने पर जोर दिया गया।

पांच वर्षों में NCDC का वित्तीय संवितरण लगभग पांच गुना बढ़ा

बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, सहकारिता मंत्रालय के गठन के बाद से 25 अक्टूबर 2026 तक NCDC ने सहकारी संस्थाओं को कुल ₹4,14,586 करोड़ की वित्तीय सहायता वितरित की है। वित्त वर्ष 2025-26 में निगम ने ₹1,55,408 करोड़ की परियोजनाओं को मंजूरी दी और ₹1,27,596 करोड़ की वित्तीय सहायता वितरित की।

वित्त वर्ष 2020-21 में निगम का वार्षिक वित्तीय संवितरण ₹24,733 करोड़ था, जो 2025-26 में बढ़कर ₹1,27,596 करोड़ हो गया। इस प्रकार पांच वर्षों में संवितरण लगभग पांच गुना बढ़ा है।

वित्त वर्ष 2025-26 में NCDC ने ₹1,475 करोड़ का शुद्ध लाभ अर्जित किया। निगम की ऋण वसूली दर 99.84 प्रतिशत रही, जबकि नेट नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) शून्य दर्ज किया गया। इन उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए अमित शाह ने निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रयासों की सराहना की।

प्रमुख वित्तीय आंकड़े

  • ₹4,14,586 करोड़: 25 अक्टूबर 2026 तक संचयी वित्तीय सहायता का संवितरण।
  • ₹1,27,596 करोड़: वित्त वर्ष 2025-26 में वित्तीय सहायता का संवितरण।
  • ₹1,475 करोड़: वित्त वर्ष 2025-26 में शुद्ध लाभ।
  • 99.84 प्रतिशत: ऋण वसूली दर।
  • शून्य: नेट NPA।
  • 14,881 सहकारी समितियां: वित्त वर्ष 2025-26 में स्वीकृत 3,339 इकाइयों एवं परियोजनाओं से लाभान्वित होने का प्रावधान।

सहकारिता में पेशेवर प्रबंधन और पारदर्शी वित्तीय व्यवस्था पर जोर

अमित शाह ने कहा कि सहकारी संस्थाओं का प्रशासन पेशेवर होना चाहिए, जबकि उनका मूल दृष्टिकोण सहकारिता के सिद्धांतों पर आधारित रहना चाहिए। उनके अनुसार, सहकारी संस्थाओं को केवल सरकारी सहायता और सरकारी बैंकों पर निर्भर रहने के बजाय वित्तीय संसाधन जुटाने के नए विकल्प विकसित करने चाहिए।

उन्होंने NCDC को अनुभवी सहकारी प्रतिनिधियों और पेशेवर विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श कर संस्थागत सुधार, वित्तीय स्वायत्तता, पूंजी जुटाने के वैकल्पिक माध्यमों और भविष्य के व्यावसायिक अवसरों पर विस्तृत योजना तैयार करने का सुझाव दिया। इस उद्देश्य से कार्यशाला आयोजित करने और अलग से विशेष बैठक में विस्तृत प्रस्तुतीकरण पर चर्चा करने की बात भी कही गई।

NCDC की सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों तक पहुंच को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए उन्होंने कहा कि अब वित्तीय सहायता का लाभ अंतिम छोर पर मौजूद छोटे किसानों, पशुपालकों, मछुआरों, ग्रामीण महिलाओं और वंचित समुदायों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना आवश्यक है।

2030 तक पूर्वोत्तर में दूध, अंडा, मछली और मांस उत्पादन में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य

बैठक में पूर्वोत्तर राज्यों के लिए सहकारी क्षेत्र आधारित विशेष परियोजनाएं तैयार करने पर जोर दिया गया। अमित शाह ने वर्ष 2030 तक पूर्वोत्तर को दूध, अंडा, मछली और मांस उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लक्ष्य के अनुरूप कार्य करने की आवश्यकता बताई।

उन्होंने कहा कि इन उत्पादों की स्थानीय मांग को पूरा करने के लिए क्षेत्र में उत्पादन क्षमता बढ़ाने की व्यापक संभावनाएं हैं। डेयरी, मत्स्यपालन और पशुपालन से जुड़ी सहकारी संस्थाओं को वित्तपोषण उपलब्ध कराने से स्थानीय उत्पादन बढ़ सकता है, बाहर से होने वाली आपूर्ति पर निर्भरता घट सकती है और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

उन्होंने NCDC के पूर्वोत्तर स्थित कार्यालयों को राज्य सरकारों के सहयोग से व्यावहारिक परियोजनाएं तैयार करने और उनके क्रियान्वयन पर ध्यान देने के निर्देश दिए।

डेयरी, मत्स्यपालन और छोटे उत्पादकों को मिलेगा वित्तपोषण का लाभ

अमित शाह ने कहा कि NCDC को बड़े सहकारी उपक्रमों को सहायता देने के साथ छोटे उत्पादकों की आजीविका में प्रत्यक्ष सुधार लाने पर भी ध्यान देना चाहिए।

मत्स्य क्षेत्र का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के लिए लगभग 100 ट्रॉलरों को NCDC के माध्यम से वित्तीय सहायता स्वीकृत की गई है। इस प्रकार की परियोजनाओं से मछुआरा परिवारों की आय बढ़ाने और उनके जीवन स्तर में सुधार की संभावनाएं बनती हैं।

डेयरी क्षेत्र के लिए भी नए वित्तपोषण मॉडल विकसित करने की आवश्यकता बताई गई। इसके अतिरिक्त NCDC को राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD), राज्य सहकारी बैंकों तथा वाणिज्यिक बैंकों के साथ कंसोर्टियम और सह-वित्तपोषण व्यवस्था विकसित करने पर काम करने का सुझाव दिया गया। इससे बड़ी परियोजनाओं के लिए संसाधन जुटाने और सहकारी संस्थाओं की वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिल सकती है।

सहकारी चीनी मिलों के लिए एथेनॉल और CNG आधारित नए अवसर

बैठक में सहकारी चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए चक्रीय अर्थव्यवस्था पर आधारित व्यावसायिक मॉडल विकसित करने पर भी चर्चा हुई।

अमित शाह ने एथेनॉल, CNG, रसायन और अन्य मूल्यवर्धित उत्पादों के लिए साझा प्रसंस्करण एवं औद्योगिक सुविधाएं विकसित करने की संभावनाओं पर जोर दिया। इससे उन सहकारी चीनी मिलों को भी आधुनिक तकनीक और मूल्यवर्धन का लाभ मिल सकता है, जो अपने स्तर पर बड़े निवेश करने में सक्षम नहीं हैं।

ऐसी साझा सुविधाओं से गन्ने और चीनी उत्पादन से जुड़े उप-उत्पादों का बेहतर उपयोग, अतिरिक्त राजस्व सृजन और संसाधनों की बर्बादी कम करने के अवसर पैदा हो सकते हैं। प्रस्तावित व्यवस्था में अर्जित लाभ संबंधित सहकारी चीनी मिलों तक पहुंचाने पर भी जोर दिया गया।

युवाओं को नई बहुराज्यीय सहकारी संस्थाओं से जोड़ने की पहल

सहकारी क्षेत्र में आधुनिक प्रबंधन और पेशेवर नेतृत्व को बढ़ावा देने के लिए ‘सहकार मित्र’ कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण और इंटर्नशिप पूरी करने वाले योग्य युवाओं को नई बहुराज्यीय सहकारी संस्थाओं से जोड़ने का सुझाव दिया गया।

बैठक में राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (NCEL), भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (BBSSL), राष्ट्रीय सहकारी ऑर्गेनिक्स लिमिटेड (NCOL), भारत टैक्सी, सहकार सारथी और शहरी सहकारी बैंकों के अम्ब्रेला संगठन NUCFDC जैसी पहलों में NCDC की भूमिका का उल्लेख किया गया।

इसके साथ ही बनास डेयरी के प्रबंधन मॉडल का अध्ययन कर उसके अनुभवों का उपयोग NCDC की कार्यप्रणाली और संस्थागत विकास में करने का सुझाव दिया गया। इसका उद्देश्य सहकारी संस्थाओं में व्यावसायिक दक्षता, आधुनिक प्रबंधन और प्रतिस्पर्धी क्षमता को बढ़ाना है।

अगले वर्षों में वित्तीय संवितरण बढ़ाने की योजना

बैठक में NCDC के लिए आगामी वर्षों के वित्तीय संवितरण लक्ष्यों को और महत्वाकांक्षी बनाने पर जोर दिया गया। अमित शाह ने निम्नलिखित लक्ष्यों की दिशा में काम करने की आवश्यकता बताई:

  • वित्त वर्ष 2026-27: ₹1.70 लाख करोड़, वित्त वर्ष 2027-28: ₹2.10 लाख करोड़, वित्त वर्ष 2028-29: ₹2.50 लाख करोड़, वित्त वर्ष 2029-30: लगभग ₹3.50 लाख करोड़, वित्त वर्ष 2030-31: ₹4 लाख करोड़

इन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए निगम को अपनी वित्तीय क्षमता, संसाधन जुटाने के विकल्प और संस्थागत भागीदारी का विस्तार करना होगा। डेयरी, मत्स्यपालन, सहकारी बैंकिंग और अन्य ग्रामीण आर्थिक गतिविधियों में बढ़ती जरूरतों को देखते हुए वित्तपोषण के नए मॉडल विकसित करने पर भी बल दिया गया।

NCDC संशोधन अधिनियम और पूंजी जुटाने के नए विकल्प

बैठक में राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) अधिनियम, 2026 के महत्व पर भी चर्चा की गई। उपलब्ध विवरण के अनुसार, यह अधिनियम 14 अगस्त 2026 को भारत के राजपत्र में प्रकाशित हुआ था। संशोधन से सहकारी विकास के लिए वित्तीय सहायता, संस्थागत भागीदारी और इक्विटी तथा शेयर पूंजी के माध्यम से निवेश के अवसरों का विस्तार हुआ है।

केंद्र सरकार ने NCDC के लिए ₹2,000 करोड़ की अनुदान सहायता मंजूर की है। इसके आधार पर निगम ने चार वर्षों में बाजार से ₹20,000 करोड़ जुटाने की व्यवस्था की है। इस पहल के अंतर्गत वित्त वर्ष 2025-26 में ₹9,380 करोड़ और वित्त वर्ष 2026-27 में 25 अक्टूबर तक ₹6,172 करोड़ का ऋण वितरण किया गया।

यह व्यवस्था सहकारी संस्थाओं को अधिक सुलभ वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने और निगम की वित्तपोषण क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

सहकार नवाचार योजना से सहकारी उद्यमों को प्रोत्साहन

सहकारी क्षेत्र में नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए NCDC ने ‘सहकार नवाचार योजना’ शुरू की है। इसके तहत पात्र सहकारी संस्थाओं को अधिकतम ₹25 लाख तक की शत-प्रतिशत अनुदान सहायता देने का प्रावधान है।

योजना के लिए ₹10 करोड़ का प्रारंभिक कोष बनाया गया है। इसमें 20 प्रतिशत राशि पूर्वोत्तर, पहाड़ी क्षेत्रों और कमजोर वर्गों की सहकारी संस्थाओं के लिए आरक्षित है। अब तक पांच सहकारी संस्थाओं को कुल ₹85 लाख की अनुदान सहायता स्वीकृत की गई है।

योजना के तहत वित्तीय सहायता के साथ व्यवसाय विकास, डिजिटल लेखांकन, वित्तीय प्रबंधन, ब्रांडिंग और बाजार से जुड़ाव के लिए मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे छोटी सहकारी संस्थाओं को अपने कारोबार का विस्तार करने और बाजार में प्रतिस्पर्धी बनने में मदद मिल सकती है।

प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पर भी ध्यान

सहकारी संस्थाओं के मानव संसाधन विकास के लिए NCDC की लक्ष्मणराव इनामदार राष्ट्रीय सहकारिता अनुसंधान एवं विकास अकादमी (LINAC) तथा क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र विभिन्न कार्यक्रम संचालित कर रहे हैं।

वित्त वर्ष 2025-26 में 227 प्रशिक्षण कार्यक्रमों में 21,688 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इसके अतिरिक्त NCDC और त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी (TSU) के बीच सहयोग को सहकारी संस्थाओं में आधुनिक प्रबंधन, डिजिटल तकनीक, वित्तीय अनुशासन और पेशेवर दक्षता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सहकारिता की भूमिका

93वीं महापरिषद बैठक में वित्त वर्ष 2025-26 के लेखापरीक्षित वार्षिक लेखों, वार्षिक रिपोर्ट, वित्तीय प्रदर्शन और आगामी वर्षों की कार्ययोजना की समीक्षा की गई। चर्चा का प्रमुख केंद्र सहकारी संस्थाओं की बढ़ती वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए NCDC की क्षमता का विस्तार करना रहा।

बैठक में सामने आए वित्तीय आंकड़े निगम के बढ़ते संवितरण और संस्थागत विस्तार को दर्शाते हैं। हालांकि, भविष्य की सफलता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि वित्तीय सहायता का लाभ छोटे उत्पादकों, ग्रामीण उद्यमियों और स्थानीय सहकारी समितियों तक कितनी प्रभावी ढंग से पहुंचता है।

NCDC के लिए अगले 25 वर्षों का रोडमैप तैयार करने की पहल इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण है। यदि वित्तपोषण, पेशेवर प्रबंधन, नवाचार और बाजार से जुड़ाव को साथ लेकर आगे बढ़ा जाता है, तो सहकारी संस्थाएं कृषि, डेयरी, मत्स्यपालन, ग्रामीण उद्योग और रोजगार सृजन में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं।