November 1, 2026 10:35 PM

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तिलहन किसानों को मिलेगा तकनीक और बाजार का साथ!

खाद्य तेल में आत्मनिर्भरता के लिए किसानों को तिलहन उत्पादन से जोड़ने पर जोर, NDDB ने KOF के साथ साझेदारी मजबूत करने की जताई प्रतिबद्धता

सूरजमुखी तेल की मार्केटिंग और पाम ऑयल परियोजना की प्रगति पर हुई चर्चा

भारत को खाद्य तेल के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और घरेलू तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए किसान-केंद्रित सहकारी मॉडल को मजबूत करने की जरूरत है। इसी दिशा में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) ने कर्नाटक कोऑपरेटिव ऑयलसीड्स ग्रोअर्स फेडरेशन लिमिटेड (KOF) के साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई है।

कर्नाटक कोऑपरेटिव ऑयलसीड्स ग्रोअर्स फेडरेशन लिमिटेड के ‘सफल’ (Safal) ब्रांड के उत्पादों को नए लोगो और आकर्षक पैकेजिंग के साथ लॉन्च किए जाने के अवसर पर NDDB के चेयरमैन डॉ. मीनेश शाह ने कहा कि देश में खाद्य तेल उत्पादन बढ़ाने के लिए किसानों को तिलहन की खेती से जोड़ना और सहकारी संस्थाओं को आर्थिक एवं तकनीकी रूप से सक्षम बनाना जरूरी है।

डॉ. शाह ने कहा कि NDDB घरेलू खाद्य तेल उत्पादन बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से KOF को निरंतर सहयोग दे रहा है। इसके तहत किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज, तकनीकी मार्गदर्शन, बाजार तक पहुंच और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

गुणवत्तापूर्ण बीज और वैज्ञानिक खेती पर जोर

NDDB के चेयरमैन ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और ICAR-भारतीय सरसों एवं रेपसीड अनुसंधान संस्थान के सहयोग से किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख किया। इन पहलों का उद्देश्य किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाले तिलहन बीज उपलब्ध कराना, तिलहन फसलों का रकबा बढ़ाना और प्रति हेक्टेयर उत्पादकता में सुधार करना है।

उन्होंने कहा कि तिलहन उत्पादन में वृद्धि के लिए केवल खेती का क्षेत्र बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। इसके साथ उन्नत किस्मों, वैज्ञानिक फसल प्रबंधन, बेहतर कृषि तकनीक और प्रभावी बाजार व्यवस्था को भी मजबूत करना होगा।

सूरजमुखी तेल की मार्केटिंग

कार्यक्रम में डॉ. शाह ने NDDB के सहयोग से KOF द्वारा ‘धारा’ ब्रांड के अंतर्गत सूरजमुखी तेल की सफल मार्केटिंग का भी उल्लेख किया। इसके साथ ही NDDB के समर्थन से संचालित पाम ऑयल परियोजना की प्रगति पर चर्चा की गई।

उन्होंने तिलहन उत्पादक किसानों को बेहतर आर्थिक प्रोत्साहन देने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में वृद्धि सहित सरकार की विभिन्न नीतिगत पहल किसानों को तिलहन की खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

सहकारी संस्थाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने की पहल

डॉ. शाह ने KOF और उससे संबद्ध सहकारी संघों की परिचालन क्षमता बढ़ाने के लिए NDDB की ओर से उपलब्ध कराए जा रहे मानव संसाधन सहयोग की जानकारी भी दी।

उन्होंने KOF में NDDB की सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) टीम के सहयोग से एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग (ERP) प्रणाली लागू किए जाने को महत्वपूर्ण पहल बताया। इस तकनीक से संस्थागत कार्यों, प्रबंधन, सूचनाओं के आदान-प्रदान और संचालन प्रक्रियाओं को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिल सकती है।

उन्होंने NDDB, KOF, क्षेत्रीय सहकारी संघों और कर्नाटक सरकार के बीच निरंतर समन्वय बनाए रखने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

खाद्य तेल आयात घटाने में सहकारिता की भूमिका

भारत में खाद्य तेल की बढ़ती मांग के बीच घरेलू उत्पादन को मजबूत करना कृषि अर्थव्यवस्था और किसानों की आय, दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। ऐसे में तिलहन उत्पादक किसानों, प्रसंस्करण इकाइयों, सहकारी संस्थाओं और बाजार के बीच मजबूत संबंध विकसित करने की जरूरत है।

NDDB और KOF की साझेदारी इस दिशा में सहकारी मॉडल के माध्यम से उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन को एक साथ जोड़ने का प्रयास है। यदि किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज, तकनीकी सहायता, उचित बाजार और बेहतर मूल्य उपलब्ध होते हैं, तो तिलहन खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है। इससे घरेलू खाद्य तेल उत्पादन बढ़ाने और आयात निर्भरता कम करने के राष्ट्रीय लक्ष्य को भी गति मिल सकती है।

Source: NDDB