September 27, 2026 3:14 AM

Krishi Times

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पूजा सामग्री से खाद, आईसीएआर की अनूठी पहल!

गणेश विसर्जन के बाद स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश, आईसीएआर संस्थानों में चला जागरूकता अभियान!

नई दिल्ली: ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान के तहत भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के विभिन्न संस्थानों में स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और जिम्मेदार कचरा प्रबंधन को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन गतिविधियों का विशेष फोकस गणेश विसर्जन के बाद सार्वजनिक स्थानों, आसपास के क्षेत्रों और जल स्रोतों की स्वच्छता बनाए रखने के साथ-साथ पूजा सामग्री एवं अन्य कचरे के उचित प्रबंधन पर रहा।

इन अभियानों के माध्यम से लोगों को यह संदेश दिया गया कि धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी भी जुड़ी हुई है। विसर्जन के दौरान और उसके बाद स्वच्छता बनाए रखने से न केवल सार्वजनिक स्थानों को साफ रखा जा सकता है, बल्कि जल संसाधनों और स्थानीय पर्यावरण पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को भी कम किया जा सकता है।

स्थानीय गणेश पंडाल में पर्यावरण अनुकूल विसर्जन को लेकर जागरूकता

गणेश विसर्जन के बाद सफाई और पर्यावरण संरक्षण को लेकर स्थानीय गणेश पंडाल में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में लोगों को पर्यावरण अनुकूल मिट्टी की मूर्तियों के इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित किया गया। साथ ही प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) अथवा हानिकारक रासायनिक रंगों से बनी मूर्तियों को पीने के पानी की टंकियों या अन्य जल स्रोतों में विसर्जित नहीं करने की सलाह दी गई।

लोगों से अपील की गई कि गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए प्रशासन द्वारा निर्धारित स्थानों का ही उपयोग करें और प्राकृतिक जल स्रोतों जैसे तालाब, नदी या अन्य जल निकायों में मूर्तियों एवं पूजा सामग्री का अनियंत्रित विसर्जन न करें।

कार्यक्रम में पूजा के दौरान निकलने वाले फूल, पत्तियां, कपड़े, प्लास्टिक, थर्मोकोल और सजावटी सामग्री को अलग-अलग एकत्र करने तथा उनका उचित निपटान करने पर भी जोर दिया गया।

कचरे का पृथक्करण और सुरक्षित निपटान

जागरूकता कार्यक्रम के दौरान यह समझाया गया कि विसर्जन स्थलों और उनके आसपास कचरा फैलने से रोकना सामुदायिक जिम्मेदारी है। लोगों को गीले और सूखे कचरे को अलग रखने तथा जैविक सामग्री को उपयोगी संसाधन में बदलने के लिए प्रेरित किया गया।

कार्यक्रम के बाद स्थानीय गणेश पंडाल के आसपास सफाई अभियान चलाया गया। एकत्रित कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया गया, जिससे जैविक और गैर-जैविक कचरे के सुरक्षित प्रबंधन में मदद मिली। इस दौरान जल स्रोतों के आसपास सुरक्षा और स्वच्छता संबंधी सावधानियों को भी रेखांकित किया गया।

पूजा सामग्री से तैयार की गई जैविक खाद

‘स्वच्छता ही सेवा’ के तहत आईसीएआर के संस्थानों ने कचरे को संसाधन में बदलने की दिशा में भी पहल की। आईसीएआर-एनआईएसए, रांची, झारखंड और आईसीएआर-सीआईआरसीओटी, मुंबई, महाराष्ट्र में फूलों तथा पूजा से निकलने वाली अन्य जैव-अवक्रमणीय सामग्री को एकत्र कर अलग किया गया।

खाद बनाने योग्य जैविक सामग्री को कंपोस्टिंग केंद्रों तक पहुंचाकर उससे जैविक खाद तैयार की गई। इस प्रक्रिया से पूजा और विसर्जन के बाद निकलने वाले जैविक कचरे का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करने के साथ उसे उपयोगी संसाधन में बदलने का प्रयास किया गया।

स्वच्छता से संसाधन संरक्षण तक

कृषि अनुसंधान से जुड़े संस्थानों द्वारा की गई यह पहल केवल सफाई अभियान तक सीमित नहीं है। जैविक कचरे से खाद तैयार करना परिपत्र अर्थव्यवस्था की उस अवधारणा से जुड़ा है, जिसमें कचरे को अंतिम उत्पाद मानने के बजाय उसे दोबारा उपयोगी संसाधन में बदला जाता है। ऐसी पहलें जैविक अपशिष्ट के बेहतर प्रबंधन, मिट्टी में जैविक पदार्थ की वापसी और स्थानीय स्तर पर स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने में उपयोगी हो सकती हैं।

गणेश विसर्जन जैसे सामुदायिक आयोजनों के बाद कचरे का पृथक्करण और जैविक सामग्री का कंपोस्टिंग के लिए उपयोग स्थानीय समुदायों में पर्यावरणीय जिम्मेदारी की भावना को मजबूत कर सकता है। खासतौर पर फूल और अन्य प्राकृतिक पूजा सामग्री को अलग एकत्र करने से उन्हें खुले में फेंकने या जल स्रोतों में जाने से रोकने में मदद मिलती है।

आईसीएआर संस्थानों की इन गतिविधियों ने स्वच्छता, कचरा पृथक्करण, पर्यावरण संरक्षण और जिम्मेदार नागरिक भागीदारी के महत्व को रेखांकित किया। साथ ही, लोगों को यह संदेश दिया गया कि धार्मिक आयोजनों की गरिमा बनाए रखते हुए पर्यावरण और जल संसाधनों की सुरक्षा भी सामूहिक जिम्मेदारी है।