रंगीलो काशी 2026: डेयरी, पशुपालन और ग्रामीण समृद्धि का संगम, किसानों की आय बढ़ाने पर जोर!
वाराणसी। उत्तर प्रदेश के पशुपालन एवं दुग्ध विकास क्षेत्र को नई दिशा देने के उद्देश्य से आयोजित ‘रंगीलो काशी 2026’ का शुभारंभ वाराणसी में हुआ। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के पशुपालन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह तथा राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) एवं एनडीडीबी डेयरी सर्विसेज के अध्यक्ष डॉ. मीनेश शाह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक और डेयरी क्षेत्र के विशेषज्ञ मौजूद रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए धर्मपाल सिंह ने कहा कि ‘रंगीलो काशी’ केवल एक प्रदर्शनी या आयोजन नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत की जीवंत तस्वीर है, जहां किसान, पशुपालक, वैज्ञानिक, उद्योग और नीति निर्माता एक मंच पर आकर अनुभव साझा करते हैं। उन्होंने कहा कि कृषि और पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था के दो मजबूत स्तंभ हैं और दोनों के समन्वित विकास से किसानों की आय में स्थायी वृद्धि संभव है।
अब लक्ष्य केवल अधिक दूध नहीं, अधिक मुनाफा भी
धर्मपाल सिंह ने कहा कि डेयरी क्षेत्र में सफलता का पैमाना केवल दूध उत्पादन बढ़ाना नहीं होना चाहिए, बल्कि कम लागत में अधिक उत्पादकता, बेहतर गुणवत्ता और किसानों की आय बढ़ाना होना चाहिए। इसके लिए पशु स्वास्थ्य, संतुलित आहार, नस्ल सुधार, वैज्ञानिक पशुपालन, समय पर उपचार और मजबूत विपणन व्यवस्था को प्राथमिकता देने की जरूरत है।
उन्होंने किसानों से अपील की कि वे खेती के साथ पशुपालन को भी नियमित आय के स्रोत के रूप में अपनाएं। उनका कहना था कि जलवायु परिवर्तन और कृषि लागत बढ़ने के दौर में डेयरी किसानों को अतिरिक्त आर्थिक सुरक्षा प्रदान कर सकती है।
देशी नस्लों के संरक्षण पर विशेष जोर
मंत्री ने साहीवाल, गिर, हरियाणवी, गंगातीरी और थारपारकर जैसी देशी नस्लों के संरक्षण और संवर्धन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तकनीकों और बेहतर प्रजनन प्रबंधन के माध्यम से इन नस्लों की उत्पादकता बढ़ाई जा सकती है।
उन्होंने कहा कि पशुओं की उत्पादकता सीधे उनके स्वास्थ्य से जुड़ी है। इसलिए टीकाकरण, रोग नियंत्रण, पोषण प्रबंधन और वैज्ञानिक देखभाल की सुविधाओं को गांव स्तर तक मजबूत बनाना समय की मांग है।
उत्तर प्रदेश में डेयरी क्षेत्र की अपार संभावनाएं
एनडीडीबी के अध्यक्ष डॉ. मीनेश शाह ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक राज्य है और यहां डेयरी क्षेत्र के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि ‘रंगीलो काशी’ जैसे आयोजन किसानों, सरकार, उद्योग और विशेषज्ञों को जोड़कर नवाचारों और समाधान आधारित चर्चाओं का अवसर प्रदान करते हैं।
डॉ. शाह ने बताया कि एनडीडीबी प्रदेश में डेयरी मूल्य शृंखला को मजबूत बनाने के लिए लगातार काम कर रहा है। वाराणसी दुग्ध संघ के आधुनिकीकरण और काशी मिल्क प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन (काशी डेयरी) के माध्यम से किसानों से दुग्ध संकलन बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं।
गिर परियोजना से किसानों को मिला लाभ
उन्होंने बताया कि भारत सरकार की राष्ट्रीय गोकुल मिशन योजना के तहत वाराणसी क्षेत्र में संचालित गिर परियोजना के माध्यम से किसानों को उच्च गुणवत्ता वाली गिर नस्ल के पशु उपलब्ध कराए गए हैं। इससे दूध उत्पादन बढ़ाने और पशुपालकों की आय में सुधार की संभावनाएं मजबूत हुई हैं।
डेयरी संयंत्रों के आधुनिकीकरण पर काम
डॉ. शाह के अनुसार एनडीडीबी कानपुर, कन्नौज और गोरखपुर के डेयरी संयंत्रों तथा अंबेडकरनगर स्थित कैटल फीड प्लांट के संचालन एवं क्षमता विस्तार पर भी काम कर रहा है। गोरखपुर संयंत्र पूर्ण क्षमता के साथ संचालित हो रहा है, जबकि अन्य संयंत्रों को भी चरणबद्ध तरीके से उनकी अधिकतम क्षमता तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने कहा कि एनडीडीबी का मूल उद्देश्य किसान को केंद्र में रखकर ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक और आर्थिक बदलाव लाना है। इसी सोच के तहत उत्तर प्रदेश सरकार और सहयोगी संस्थाओं के साथ मिलकर डेयरी क्षेत्र को किसानों की समृद्धि का मजबूत आधार बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
ज्ञान और नवाचार का मंच बना ‘रंगीलो काशी’
दो दिवसीय आयोजन में किसानों को बेहतर नस्ल के पशु, कृत्रिम गर्भाधान, पशु पोषण, रोग नियंत्रण, डेयरी प्रबंधन, आधुनिक तकनीक और सफल डेयरी मॉडल से जुड़ी जानकारी दी गई। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के आयोजन किसानों को नई तकनीकों और व्यावसायिक अवसरों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती
विशेषज्ञों के अनुसार भारत में कृषि क्षेत्र की विकास दर को गति देने में डेयरी और पशुपालन की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में ‘रंगीलो काशी 2026’ जैसे आयोजन न केवल किसानों को नई जानकारी प्रदान करते हैं, बल्कि डेयरी क्षेत्र में निवेश, नवाचार और संगठित बाजार व्यवस्था को भी प्रोत्साहित करते हैं। इससे ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने और आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था के निर्माण को बल मिलने की उम्मीद है।
कार्यक्रम में बीएचयू के कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी, एनडीडीबी डेयरी सर्विसेज के निदेशक दुर्गा शंकर मिश्रा, प्रो. गुरु प्रसाद सिंह, दुग्ध आयुक्त के. धनलक्ष्मी, पीसीडीएफ के प्रबंध निदेशक प्रकाश बिंदु, एनडीडीबी डेयरी सर्विसेज के प्रबंध निदेशक सी.पी. देवानंद तथा मदर डेयरी के प्रबंध निदेशक जे.टी. चारी सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
चित्र: सौजन्य NDDB

























