September 19, 2026 2:35 PM

Krishi Times

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पशुधन सुरक्षा के लिए राज्यों और निजी क्षेत्र की साझेदारी!

भारत 2030 तक एफएमडी-मुक्त बनने की दिशा में आगे बढ़ा, दिल्ली में बनी राज्यों और निजी क्षेत्र की संयुक्त रणनीति!

नई दिल्ली। भारत में पशुधन क्षेत्र को खुरपका-मुंहपका रोग (Foot and Mouth Disease-FMD) से मुक्त बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने प्रयास तेज कर दिए हैं। इसी कड़ी में पशुपालन एवं डेयरी विभाग (DAHD) ने विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन (WOAH) के सहयोग से 15 से 17 सितंबर 2026 तक राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर (NASC), नई दिल्ली में “भारत में एफएमडी-मुक्त क्षेत्र विकास” विषय पर तीन दिवसीय कार्यशाला आयोजित की।

कार्यशाला में 12 राज्यों के पशुपालन विभागों, राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB), आईसीएआर संस्थानों, केंद्रीय एवं क्षेत्रीय रोग निदान प्रयोगशालाओं, उद्योग प्रतिनिधियों, पशुधन मूल्य श्रृंखला से जुड़े हितधारकों तथा अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने भाग लिया। इसका उद्देश्य देश में एफएमडी-मुक्त क्षेत्रों और खंडों (Compartments) के विकास के लिए वैज्ञानिक, तकनीकी और प्रशासनिक रोडमैप तैयार करना था।

एफएमडी नियंत्रण में भारत की बड़ी उपलब्धि

उद्घाटन सत्र में पशुपालन एवं डेयरी विभाग के सचिव नरेश पाल गंगवार ने बताया कि पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम (LHDCP) के तहत भारत ने एफएमडी नियंत्रण में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।

उन्होंने बताया कि अब तक देशभर में 147.16 करोड़ से अधिक एफएमडी वैक्सीन की खुराक पशुओं को दी जा चुकी हैं, जिससे लगभग 8.04 करोड़ पशुपालक परिवारों को लाभ मिला है।

एफएमडी प्रकोपों में भी लगातार कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2019 में जहां 132 प्रकोप सामने आए थे, वहीं यह संख्या वर्ष 2025 में घटकर 40 रह गई और अगस्त 2026 तक केवल 20 मामलों की सूचना मिली। विशेषज्ञों के अनुसार यह व्यापक टीकाकरण, पशु पहचान, रोग निगरानी और प्रयोगशाला नेटवर्क को मजबूत करने का परिणाम है।

डेयरी और निर्यात क्षेत्र को मिलेगा बड़ा लाभ

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत के विभिन्न क्षेत्रों को चरणबद्ध तरीके से एफएमडी-मुक्त मान्यता मिलती है तो इससे दूध, दुग्ध उत्पादों, मांस और पशुधन आधारित उत्पादों के निर्यात को नया अवसर मिलेगा। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पशु स्वास्थ्य मानकों का पालन निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

कार्यशाला में यह भी रेखांकित किया गया कि एफएमडी-मुक्त क्षेत्र विकसित होने से पशुधन उत्पादकता बढ़ेगी, पशुपालकों की आय में सुधार होगा और रोग नियंत्रण पर होने वाला खर्च कम होगा।

राज्यों के लिए तैयार हुई कार्ययोजना

तीन दिवसीय विचार-विमर्श के दौरान नौ प्राथमिकता वाले राज्यों ने अपनी-अपनी कार्य योजनाएं प्रस्तुत कीं। इन योजनाओं में—

  • पशु टीकाकरण कवरेज बढ़ाना
  • रोग निगरानी तंत्र मजबूत करना
  • पशुओं की डिजिटल पहचान और ट्रेसबिलिटी व्यवस्था विकसित करना
  • जैव सुरक्षा उपायों को बढ़ावा देना
  • पशु आवागमन नियंत्रण प्रणाली सुदृढ़ करना
  • पशु चिकित्सा अवसंरचना को मजबूत बनाना

विशेषज्ञों ने प्रत्येक राज्य को तकनीकी सुझाव देते हुए योजनाओं को और अधिक व्यवहारिक तथा समयबद्ध बनाने पर जोर दिया।

केवल सरकारी नहीं, निजी क्षेत्र की भी अहम भूमिका

कार्यशाला का प्रमुख फोकस पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) रहा। विशेषज्ञों ने कहा कि एफएमडी उन्मूलन केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं होगा। इसके लिए वैक्सीन निर्माताओं, डेयरी कंपनियों, पशु उत्पादक संगठनों, पशु चिकित्सा सेवा प्रदाताओं और निजी प्रयोगशालाओं की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।

चर्चा में वैक्सीन आपूर्ति, रोग निदान, पशु पहचान, ट्रेसबिलिटी, मूल्य श्रृंखला विकास और जोखिम संचार जैसे क्षेत्रों में निजी क्षेत्र की भूमिका बढ़ाने पर विशेष बल दिया गया।

विदेशी वायरस स्ट्रेन पर भी नजर

बैठक में एफएमडी वायरस के SAT सीरोटाइप जैसे विदेशी स्ट्रेन के संभावित खतरे पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि भारत ऐसे उभरते जोखिमों से निपटने के लिए निगरानी और तैयारी को मजबूत कर रहा है ताकि पशुधन क्षेत्र को किसी बड़े आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके।

2030 तक एफएमडी-मुक्त भारत का लक्ष्य

समापन सत्र में पशुपालन आयुक्त डॉ. नवीना बी. महेश्वरप्पा ने कहा कि राज्यों को कार्यशाला के निष्कर्षों को स्पष्ट, साक्ष्य-आधारित और समयबद्ध योजनाओं में बदलना होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र और राज्यों के साथ-साथ निजी क्षेत्र की साझेदारी से भारत एफएमडी-मुक्त क्षेत्रों के विकास में तेजी से आगे बढ़ेगा।

विशेषज्ञों के अनुसार यह पहल वर्ष 2030 तक भारत को एफएमडी-मुक्त घोषित करने के राष्ट्रीय लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि राज्य स्तर पर तैयार की गई योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो भारत वैश्विक पशु स्वास्थ्य मानकों के अनुरूप एफएमडी-मुक्त क्षेत्रों की मान्यता प्राप्त करने की दिशा में मजबूत स्थिति में पहुंच सकता है।