September 18, 2026 2:17 PM

Krishi Times

Archive story

मछुआरों के लिए खुलेंगे समुद्र के नए द्वार!

गहरे समुद्र में मत्स्य पालन को मिलेगा नया बल, मछुआरों की आय बढ़ाने पर राष्ट्रीय कार्यशाला में जोर!

गांधीनगर, 17 सितंबर 2026। भारत सरकार के मत्स्य विभाग ने गुजरात के गांधीनगर में गहरे समुद्र में मत्स्य पालन (डीप-सी फिशिंग) को बढ़ावा देने और एक्सेस पास तथा प्राधिकृति पत्र (एलओए) धारकों के साथ संवाद के लिए राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला का उद्देश्य मछुआरों को विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) और खुले समुद्र में उपलब्ध उच्च मूल्य वाली मछली प्रजातियों, विशेषकर टूना और स्क्विड, के दोहन के लिए प्रोत्साहित करना तथा इस क्षेत्र की चुनौतियों और संभावनाओं पर हितधारकों के सुझाव प्राप्त करना था।

कार्यक्रम में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्रभाई पटेल, केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह, राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल, मत्स्य विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी सहित केंद्र एवं राज्य सरकारों, अनुसंधान संस्थानों, वित्तीय एजेंसियों, सहकारी समितियों और मछुआरा संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

गहरे समुद्र में मत्स्य पालन से बढ़ेगी आय

कार्यशाला में वक्ताओं ने कहा कि भारत के समुद्री क्षेत्र में टूना, स्क्विड और अन्य उच्च मूल्य वाली समुद्री प्रजातियों की बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं। यदि आधुनिक जहाजों, कोल्ड-चेन, प्रसंस्करण और निर्यात सुविधाओं को मजबूत किया जाए तो मछुआरों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।

मुख्यमंत्री भूपेंद्रभाई पटेल ने कहा कि देश की सबसे लंबी तटरेखा होने के कारण गुजरात गहरे समुद्र में मत्स्य पालन के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा सकता है। उन्होंने मछुआरों से केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ उठाने तथा कौशल विकास और प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी की अपील की।

रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा मछली उत्पादन और निर्यात

केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने बताया कि वर्ष 2024-25 में भारत का मछली उत्पादन बढ़कर 197.75 लाख टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। वहीं समुद्री खाद्य उत्पादों का निर्यात बढ़कर 73,890 करोड़ रुपये हो गया है, जो वैश्विक व्यापार चुनौतियों के बावजूद इस क्षेत्र की बढ़ती प्रतिस्पर्धात्मकता को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि ब्लू रिवोल्यूशन, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY), मत्स्य पालन एवं जलीय कृषि अवसंरचना विकास कोष (FIDF) सहित विभिन्न सरकारी पहलों के माध्यम से उत्पादन, अवसंरचना, तकनीक, मूल्य श्रृंखला और निर्यात क्षमता को मजबूत किया गया है। इन प्रयासों से मत्स्य पालन क्षेत्र में उत्पादन और निर्यात के साथ-साथ मछुआरों और मत्स्य किसानों के लिए आय तथा रोजगार के अवसरों को बढ़ाने की दिशा में भी काम हुआ है।

केंद्रीय मंत्री कहा कि सरकार द्वारा एक्सेस पास और एलओए जारी करने का उद्देश्य मछुआरों को पारंपरिक तटीय क्षेत्रों से आगे बढ़ाकर EEZ और खुले समुद्र में उपलब्ध संसाधनों तक पहुंच प्रदान करना है। इससे निर्यात बढ़ाने और आय में वृद्धि के नए अवसर खुलेंगे।

गहरे समुद्र में मत्स्य पालन के लिए तकनीक

मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने कहा कि गांधीनगर में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला ने गहरे समुद्र में मत्स्य पालन की संभावनाओं और चुनौतियों पर मछुआरों, विशेषज्ञों और विभिन्न संस्थानों के बीच संवाद का महत्वपूर्ण मंच उपलब्ध कराया। कार्यशाला में आधुनिक तकनीक अपनाने, कोल्ड-चेन अवसंरचना, मछली प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन, बाजार तक पहुंच और समुद्री खाद्य निर्यात बढ़ाने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।

प्रो. बघेल ने कहा कि मत्स्य पालन के लिए समर्पित विभाग का गठन, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY), नीली क्रांति और नीली अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने जैसी पहलों ने देश के मत्स्य क्षेत्र के विकास को गति दी है। इन प्रयासों के तहत मछली उत्पादन, उत्पादकता, निर्यात और रोजगार के अवसरों को बढ़ाने के लिए अवसंरचना और तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।

सहकारी समितियों को बड़ी राहत

कार्यशाला में यह जानकारी भी दी गई कि गहरे समुद्र में मत्स्य पालन के लिए सहकारी समितियों को मिलने वाले प्राधिकृति पत्र का शुल्क 25,000 रुपये से घटाकर 5,000 रुपये कर दिया गया है। इस कदम से छोटे मछुआरा समूहों और सहकारी संस्थाओं के लिए डीप-सी फिशिंग में भागीदारी आसान होगी।

मत्स्य क्षेत्र में डिजिटल और संस्थागत सुधारों पर जोर

मत्स्य विभाग ने मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों (FFPOs), मत्स्य सहकारी समितियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से मत्स्य क्षेत्र को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया। अधिकारियों ने कहा कि डिजिटल ट्रेसिबिलिटी, कैच डॉक्यूमेंटेशन और बाजार संपर्क जैसी व्यवस्थाएं निर्यात को बढ़ाने और वैश्विक मानकों का पालन सुनिश्चित करने में मदद करेंगी।

मछुआरों ने रखीं अपनी मांगें

एलओए और एक्सेस पास धारकों के साथ आयोजित संवाद सत्र में मछुआरों ने सरकार के निर्णयों की सराहना करते हुए कहा कि अब उन्हें गहरे समुद्र में जाकर उच्च मूल्य वाली प्रजातियों का दोहन करने का अवसर मिला है। हालांकि उन्होंने कोल्ड-चेन अवसंरचना, आधुनिक जहाजों, संचार प्रणालियों, वित्तीय सहायता और गुणवत्ता प्रबंधन प्रशिक्षण की आवश्यकता भी जताई।

मछुआरों का कहना था कि यदि बंदरगाहों पर कोल्ड स्टोरेज, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन सुविधाएं बढ़ाई जाएं तो समुद्री उत्पादों की बेहतर कीमत प्राप्त की जा सकती है और निर्यात को भी मजबूती मिलेगी।

पांच तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव

कार्यशाला में पांच तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें समुद्री संसाधनों का सतत उपयोग, आधुनिक जहाज तकनीक, कौशल विकास, वित्तपोषण, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और निर्यात बाजार तक पहुंच जैसे विषयों पर चर्चा हुई। सरकार, अनुसंधान संस्थानों, वित्तीय संगठनों, उद्योग जगत और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों सहित 19 विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।

आइसलैंड में भारत के राजदूत आर. रविंद्र ने आइसलैंड के उन्नत मत्स्य प्रबंधन मॉडल, स्वचालित प्रसंस्करण तकनीक और इलेक्ट्रॉनिक निगरानी प्रणालियों के अनुभव साझा किए। उन्होंने समुद्री संसाधनों के अधिकतम उपयोग और मूल्य संवर्धन के लिए आधुनिक तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया।

नीली अर्थव्यवस्था को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

मत्स्य विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने कहा कि भारत की गहरे समुद्र में मत्स्य पालन क्षमता का पूर्ण उपयोग तभी संभव है जब मछुआरे, सहकारी समितियां, एफएफपीओ, स्वयं सहायता समूह और महिला हितधारक सक्रिय रूप से इसमें भाग लें। उन्होंने प्रशिक्षण, वित्त तक पहुंच और सहकारी संस्थाओं को मजबूत बनाने को इस क्षेत्र की तीन प्रमुख प्राथमिकताएं बताया।

राष्ट्रीय कार्यशाला से प्राप्त सुझावों और सिफारिशों को भविष्य की नीतियों और कार्यक्रमों में शामिल किया जाएगा, जिससे गहरे समुद्र में मत्स्य पालन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ मछुआरों की आय, समुद्री खाद्य निर्यात और भारत की नीली अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सकेगी।