September 6, 2026 12:14 PM

Krishi Times

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मशरूम खेती से बढ़ेगी आदिवासी परिवारों की आय!

सिमडेगा में 35 आदिवासी परिवारों को मशरूम की खेती का प्रशिक्षण, खेती शुरू करने के लिए मिलेंगी 30-30 किट!

सिमडेगा। ग्रामीण और आदिवासी परिवारों की आय बढ़ाने तथा उन्हें स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में सिमडेगा जिले में मशरूम उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी उद्देश्य से सिमडेगा प्रखंड की कुल्लूकेरा पंचायत के दियापाथल गांव में 35 आदिवासी परिवारों के लिए पांच दिवसीय मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम उद्यान विकास योजना के तहत उद्यान निदेशालय की पहल पर विनायका एंटरप्राइजेज के माध्यम से आयोजित किया गया।

पांच दिनों तक चले इस प्रशिक्षण में किसानों को केवल मशरूम उत्पादन की सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं दी गई, बल्कि उन्हें उत्पादन की पूरी प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया। किसानों को बताया गया कि सीमित जगह और अपेक्षाकृत कम लागत में मशरूम उत्पादन शुरू कर किस तरह परिवार की अतिरिक्त आय का स्रोत तैयार किया जा सकता है।

मशरूम उपज की पूरी प्रक्रिया की दी गई जानकारी

प्रशिक्षण के दौरान किसानों को मशरूम की खेती के लिए जरूरी संसाधनों और सामग्री की जानकारी दी गई। इसके साथ ही मशरूम बेड तैयार करने, स्पॉन डालने, बेड की देखभाल और नमी बनाए रखने जैसी तकनीकी प्रक्रियाओं को विस्तार से समझाया गया।

किसानों को यह भी बताया गया कि उत्पादन के दौरान फसल को रोग और कीटों से किस तरह सुरक्षित रखा जाए। इसके अलावा मशरूम की सही अवस्था में तुड़ाई, उत्पादन के बाद रखरखाव और बाजार में बिक्री से जुड़ी जानकारी भी प्रशिक्षण का हिस्सा रही।

प्रशिक्षकों ने किसानों को इस बात पर जोर दिया कि मशरूम उत्पादन में बेहतर परिणाम के लिए स्वच्छता, तापमान, नमी और समय पर देखभाल का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। वैज्ञानिक तरीके से उत्पादन करने पर किसान बेहतर गुणवत्ता का मशरूम तैयार कर बाजार में बेच सकते हैं।

कम लागत और कम जगह में आय बढ़ाने का अवसर

कार्यक्रम में जिला उद्यान पदाधिकारी माधुरी टोप्पो ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि मशरूम की खेती ऐसे परिवारों के लिए उपयोगी गतिविधि बन सकती है, जिनके पास खेती के लिए सीमित भूमि उपलब्ध है। कम जगह और कम लागत में इसे शुरू किया जा सकता है और इससे परिवार की आय बढ़ाने का अवसर मिलता है।

उन्होंने किसानों से प्रशिक्षण के दौरान सीखी गई तकनीकों को व्यवहार में उतारने और नियमित रूप से मशरूम पैदावार करने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर उत्पादन और बाजार से जुड़ाव बढ़ने से किसानों को इसका आर्थिक लाभ मिल सकता है।

स्वरोजगार से जुड़ने के लिए किया प्रेरित

जिला योजना पदाधिकारी आशा मैक्सिमा खलखो ने किसानों को मशरूम उत्पादन को केवल खेती के रूप में नहीं, बल्कि स्वरोजगार और आय के स्थायी विकल्प के तौर पर देखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर ग्रामीण परिवार अपने घर या आसपास उपलब्ध सीमित स्थान में भी इस गतिविधि को शुरू कर सकते हैं।

उन्होंने प्रशिक्षण के बाद किसानों से उत्पादन को आगे बढ़ाने और दूसरे परिवारों को भी इसके बारे में जानकारी देने का आह्वान किया, ताकि गांव में स्वरोजगार के नए अवसर तैयार हो सकें।

किसानों से प्रशिक्षण का लाभ उठाकर पैदावार शुरू करने की अपील

कार्यक्रम में पंचायत की मुखिया हीरा मुनी देवी ने भी किसानों को मशरूम उत्पादन शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान किसानों को उत्पादन की आवश्यक जानकारी मिल चुकी है। अब जरूरी है कि वे इस ज्ञान का उपयोग करते हुए अपने स्तर पर मशरूम उत्पादन शुरू करें और इससे होने वाली आय का लाभ परिवार को दें।

35 परिवारों को मिलेंगी 30-30 मशरूम उत्पादन किट

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले सभी 35 परिवारों को 30-30 मशरूम उत्पादन किट उपलब्ध कराई जाएंगी। इन किटों की मदद से परिवार प्रशिक्षण समाप्त होने के बाद तत्काल मशरूम उत्पादन शुरू कर सकेंगे।

इस पहल से लाभार्थी परिवारों को उत्पादन शुरू करने के लिए शुरुआती संसाधन उपलब्ध होंगे। इससे प्रशिक्षण को केवल जानकारी देने तक सीमित रखने के बजाय उसे सीधे उत्पादन और आय सृजन से जोड़ने का प्रयास किया गया है।

आदिवासी परिवारों के लिए आय का नया माध्यम बनने की उम्मीद

दियापाथल में आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण और आदिवासी परिवारों को पारंपरिक कृषि गतिविधियों के साथ मशरूम उत्पादन जैसी वैकल्पिक आय गतिविधियों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। विशेष रूप से सीमित भूमि वाले परिवारों के लिए मशरूम उत्पादन अतिरिक्त आमदनी का माध्यम बन सकता है।

अब 35 परिवारों को उत्पादन किट उपलब्ध होने के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वे प्रशिक्षण में सीखी तकनीकों को किस तरह अपनाते हैं और स्थानीय बाजार से जुड़कर मशरूम उत्पादन को आय के प्रभावी साधन में कैसे बदलते हैं। यदि उत्पादन, गुणवत्ता और बाजार का बेहतर तालमेल बना रहता है, तो दियापाथल जैसे गांवों में मशरूम उत्पादन ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम बन सकता है।

source: Directorate of Agriculture, Jharkhand