September 4, 2026 11:18 PM

Krishi Times

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गांवों में बन रहे आधुनिक गोदाम, किसानों को मिलेगा फसल का बेहतर दाम!

सहकारिता मॉडल से मजबूत होगा ग्रामीण भंडारण तंत्र, 313 पैक्स में बन चुके 1.80 लाख टन क्षमता के गोदाम!

नई दिल्ली। देश में रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन और खाद्य सुरक्षा की बढ़ती जरूरतों के बीच केंद्र सरकार की ‘सहकारिता क्षेत्र में विकेंद्रित अनाज भंडारण योजना’ ग्रामीण कृषि अवसंरचना को नई दिशा दे रही है। वर्ष 2023 में शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) को भंडारण, प्रसंस्करण, खरीद और वितरण का केंद्र बनाकर किसानों को स्थानीय स्तर पर बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। जुलाई 2026 तक देशभर के 313 पैक्स में गोदाम निर्माण पूरा हो चुका है, जिससे 1.80 लाख मीट्रिक टन से अधिक भंडारण क्षमता तैयार हुई है।

सहकारिता मंत्रालय के अनुसार यह योजना किसानों को फसल बेचने की जल्दबाजी से बचाने, भंडारण सुविधाएं गांवों के नजदीक उपलब्ध कराने और कृषि उत्पादों की बर्बादी कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन ने बढ़ाई आधुनिक भंडारण की जरूरत

भारत का खाद्यान्न उत्पादन लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। तीसरे अग्रिम अनुमान 2025-26 के अनुसार देश का कुल खाद्यान्न उत्पादन 376.56 मिलियन टन रहा, जो पिछले वर्ष के 357.73 मिलियन टन की तुलना में करीब 18.8 मिलियन टन अधिक है।

दूसरी ओर, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत लगभग 80 करोड़ लोगों को खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है। ऐसे में उत्पादन से लेकर वितरण तक एक मजबूत और वैज्ञानिक भंडारण नेटवर्क की आवश्यकता पहले से अधिक महसूस की जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उत्पादन केंद्रों के पास ही पर्याप्त भंडारण सुविधा उपलब्ध हो तो किसानों को बेहतर मूल्य मिलेगा, परिवहन लागत घटेगी और खाद्यान्न की गुणवत्ता भी लंबे समय तक सुरक्षित रखी जा सकेगी।

2023 में शुरू हुई थी पायलट परियोजना

सहकारिता मंत्रालय ने 31 मई 2023 को इस योजना को पायलट परियोजना के रूप में शुरू किया था। शुरुआती चरण में 11 राज्यों के 11 पैक्स में गोदाम निर्माण किया गया, जिससे 9,750 मीट्रिक टन भंडारण क्षमता विकसित हुई।

पायलट परियोजनाएं महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, तमिलनाडु, तेलंगाना, असम, कर्नाटक और त्रिपुरा में स्थापित की गईं। इन परियोजनाओं की सफलता के बाद योजना का विस्तार राष्ट्रीय स्तर पर किया गया।

पैक्स बन रहे हैं ग्रामीण कृषि सेवा केंद्र

यह योजना केवल गोदाम निर्माण तक सीमित नहीं है। इसके तहत पैक्स को बहुउद्देश्यीय ग्रामीण कृषि सेवा केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। इनमें शामिल हैं—

  • अनाज भंडारण गोदाम और साइलो
  • खरीद केंद्र
  • प्राथमिक प्रसंस्करण इकाइयां
  • कस्टम हायरिंग सेंटर
  • उचित दर की दुकानें
  • कृषि मशीनरी किराया सेवाएं

इस मॉडल से किसानों को बीज, मशीनरी, प्रसंस्करण और विपणन जैसी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सकती हैं।

कई सरकारी योजनाओं का एकीकृत लाभ

योजना की खासियत यह है कि इसमें विभिन्न सरकारी योजनाओं को एक साथ जोड़ा गया है। इनमें शामिल हैं—

  • कृषि अवसंरचना कोष (AIF)
  • कृषि विपणन अवसंरचना योजना (AMI)
  • कृषि यंत्रीकरण उप-मिशन (SMAM)
  • प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME)

इन योजनाओं के समन्वय से पैक्स को वित्तीय सहायता, ब्याज सब्सिडी, पूंजीगत अनुदान और आधुनिक उपकरणों की सुविधा मिल रही है।

किसानों के लिए सस्ता ऋण, केवल 1% प्रभावी ब्याज दर

योजना को आकर्षक बनाने के लिए सरकार ने कई वित्तीय रियायतें दी हैं। एएमआई योजना के तहत पूंजीगत सब्सिडी को 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 33.33 प्रतिशत किया गया है, जबकि मार्जिन मनी की आवश्यकता 20 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दी गई है।

नाबार्ड की पुनर्वित्त सुविधा और कृषि अवसंरचना कोष के तहत मिलने वाली 3 प्रतिशत ब्याज सहायता को जोड़ने पर पैक्स के लिए प्रभावी ऋण ब्याज दर घटकर लगभग 1 प्रतिशत रह जाती है।

इसके अलावा भारतीय खाद्य निगम (FCI) को पात्र गोदामों को किराये पर लेने की अनुमति भी दी गई है, जिससे परियोजनाओं की वित्तीय व्यवहार्यता और मजबूत हुई है।

1,012 पैक्स की पहचान, तेजी से बढ़ रहा नेटवर्क

जुलाई 2026 तक देशभर में 1,012 पैक्स और सहकारी समितियों की पहचान योजना के लिए की जा चुकी थी। इनमें से 313 पैक्स में गोदाम निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि अन्य स्थानों पर कार्य प्रगति पर है।

यह विस्तार दर्शाता है कि सहकारी क्षेत्र अब केवल ऋण वितरण तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि ग्रामीण कृषि अवसंरचना के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

महाराष्ट्र का नेरपिंगलाई पैक्स बना मॉडल

महाराष्ट्र के अमरावती जिले स्थित नेरपिंगलाई पैक्स इस योजना की सफलता का उदाहरण बनकर उभरा है। यहां 3,000 मीट्रिक टन क्षमता का आधुनिक गोदाम बनाया गया है।

करीब 300 किसान इस गोदाम में 32,000 बोरियों में सोयाबीन का भंडारण कर रहे हैं। समिति किसानों को जमा उपज के बदले लगभग 4.50 करोड़ रुपये की अग्रिम राशि भी उपलब्ध करा चुकी है।

इससे किसानों को कम कीमत पर मजबूरी में फसल बेचने से राहत मिली है। समिति को गोदाम किराये और ब्याज आय से सालाना लाखों रुपये की अतिरिक्त आमदनी होने की उम्मीद है, जिससे उसकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है।

गुणवत्ता और पारदर्शिता पर विशेष जोर

योजना के तहत बनने वाले सभी गोदामों को वेयरहाउसिंग डेवलपमेंट एंड रेगुलेटरी अथॉरिटी (WDRA) के मानकों के अनुरूप बनाया जा रहा है। निर्माण गुणवत्ता, सुरक्षा, वेंटिलेशन और रखरखाव के लिए नियमित निरीक्षण और गुणवत्ता ऑडिट भी अनिवार्य किए गए हैं।

साथ ही सभी संरचनाओं पर एक समान ग्रेन स्टोरेज लोगो और निर्धारित ब्रांडिंग लागू की जा रही है, ताकि योजना की पहचान और पारदर्शिता बनी रहे।

खाद्य सुरक्षा और किसान आय दोनों को मिलेगा लाभ

विशेषज्ञों का मानना है कि विकेंद्रित भंडारण व्यवस्था से किसानों को बेहतर बाजार अवसर मिलेंगे, खाद्यान्न की बर्बादी कम होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। सहकारिता आधारित यह मॉडल भविष्य में कृषि मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

देश में तेजी से बढ़ रहे खाद्यान्न उत्पादन के बीच यह योजना ग्रामीण भारत में आधुनिक कृषि अवसंरचना निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जो किसानों, सहकारी समितियों और उपभोक्ताओं—तीनों के लिए लाभकारी साबित हो सकती है।