मध्य प्रदेश में MSP पर रिकॉर्ड मूंग खरीद, 5.33 लाख मीट्रिक टन उपज खरीदी गई: शिवराज सिंह चौहान!
कृषि भवन में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक
नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि भवन, नई दिल्ली से मध्य प्रदेश के कृषि एवं उद्यानिकी मंत्रियों के साथ वर्चुअल समीक्षा बैठक कर राज्य में ग्रीष्मकालीन मूंग खरीद, किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का लाभ और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में किसानों को समय पर भुगतान, पारदर्शी खरीद व्यवस्था और मौसम आधारित फसल बीमा प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया गया।
किसानों के हित में बढ़ाई गई खरीद सीमा
बैठक में केंद्रीय मंत्री ने बताया कि मध्य प्रदेश सरकार के अनुरोध पर भारत सरकार ने ग्रीष्मकालीन 2026 सीजन के लिए प्रारंभिक रूप से 4,54,580 मीट्रिक टन मूंग खरीद को मंजूरी दी थी। बाद में किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त 84,492 मीट्रिक टन खरीद की अनुमति भी प्रदान की गई। इस प्रकार राज्य के लिए कुल स्वीकृत खरीद सीमा 5,39,072 मीट्रिक टन हो गई।
उन्होंने कहा कि इस अतिरिक्त स्वीकृति से राज्य सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ा और अधिक किसानों को MSP का लाभ सुनिश्चित किया जा सका।
5.33 लाख मीट्रिक टन मूंग की हुई खरीद
केंद्रीय मंत्री के अनुसार, खरीद अवधि समाप्त होने तक मध्य प्रदेश में कुल 5.33 लाख मीट्रिक टन मूंग की खरीद की जा चुकी है, जो स्वीकृत सीमा के भीतर है। सभी इच्छुक एवं पंजीकृत किसानों से उपलब्ध मूंग की खरीद कर उन्हें MSP पर उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाया गया।
NAFED और NCCF ने संभाली खरीद व्यवस्था
राज्य में मूंग खरीद का संचालन मुख्य रूप से NAFED और NCCF के माध्यम से किया गया। खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता, त्वरित भुगतान और किसानों की सुविधा को प्राथमिकता दी गई। इससे न केवल किसानों को आर्थिक लाभ मिला, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में नकदी प्रवाह बढ़ने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली।
पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर प्रदर्शन
बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, ग्रीष्म 2025 में 4,19,692 मीट्रिक टन स्वीकृत मात्रा के मुकाबले 3,93,123.79 मीट्रिक टन मूंग की खरीद हुई थी। वहीं ग्रीष्म 2026 में स्वीकृत मात्रा और वास्तविक खरीद दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। केंद्रीय मंत्री ने इसे किसानों के प्रति सरकार के बढ़ते समर्थन और MSP प्रणाली में किसानों के भरोसे का प्रमाण बताया।
फसल बीमा योजना और RWBCIS पर भी हुई चर्चा
बैठक में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत मध्य प्रदेश में पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना (RWBCIS) के क्रियान्वयन की स्थिति पर भी विचार-विमर्श किया गया। राज्य सरकार द्वारा टर्म-शीट को अंतिम रूप देने के अनुरोध पर केंद्र सरकार ने आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध करा दिए हैं और शीघ्र क्रियान्वयन का आग्रह किया है।
WINDS प्रणाली लागू करने पर जोर
केंद्रीय मंत्री ने WINDS (Weather Information and Data Systems) प्रणाली की प्रगति की समीक्षा करते हुए कहा कि राज्य में इसका क्रियान्वयन अभी लंबित है। अधिकारियों ने बताया कि मौसम आधारित बीमा योजना को प्रभावी बनाने के लिए WINDS प्रणाली का लागू होना बेहद महत्वपूर्ण है। केंद्र सरकार इस संबंध में समय-समय पर राज्य सरकार को आवश्यक मार्गदर्शन और पत्राचार कर रही है।
तकनीकी आधारित उपज आकलन के साथ CCEs की सलाह
बैठक में तकनीकी आधारित उपज आकलन प्रणाली पर भी चर्चा हुई। वर्तमान में मध्य प्रदेश प्रमुख फसलों के लिए तकनीकी मॉडल का उपयोग कर रहा है। केंद्र सरकार ने सुझाव दिया कि क्रॉप कटिंग एक्सपेरिमेंट्स (CCEs) को पुनः अपनाया जाए, ताकि तकनीकी मॉडल की सटीकता की जांच और पुनः समायोजन (Recalibration) किया जा सके। इसके लिए तकनीकी और फील्ड आधारित आंकड़ों के समन्वय वाली ब्लेंडेड एप्रोच अपनाने की सलाह दी गई।
किसानों की आय बढ़ाने पर केंद्र और राज्य का फोकस
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर खरीद, भुगतान और फसल बीमा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि समय पर खरीद, MSP पर उचित मूल्य और प्रभावी बीमा सुरक्षा किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ कृषि क्षेत्र में भरोसा और स्थिरता भी सुनिश्चित करती है।

























