पोकरण में स्थापित होगी स्वचालित मौसम वेधशाला, किसानों को मिलेगी सटीक कृषि मौसम सलाह!
पोकरण (जैसलमेर)। पश्चिमी राजस्थान के किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल के तहत कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) पोकरण में भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) की कृषि स्वचालित मौसम वेधशाला (Agro-AWS) स्थापित की जाएगी। इस वेधशाला के शुरू होने से क्षेत्र के किसानों को वास्तविक समय के स्थानीय मौसम आंकड़े उपलब्ध होंगे, जिससे मौसम आधारित कृषि सलाह सेवाएं और अधिक प्रभावी एवं सटीक बन सकेंगी।
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कृषि विज्ञान केंद्र, पोकरण के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. दशरथ प्रसाद ने बताया कि पोकरण और जैसलमेर जिला मुख्यालय के बीच लगभग 110 किलोमीटर की दूरी होने के कारण किसानों को स्थानीय मौसम संबंधी सटीक जानकारी समय पर नहीं मिल पाती। वर्तमान में कृषि परामर्श के लिए मुख्य रूप से जैसलमेर के मौसम आंकड़ों पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे कई बार स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप सलाह देने में कठिनाई आती है।
लगातार प्रयासों से मिली सफलता
डॉ. दशरथ प्रसाद ने बताया कि क्षेत्र के किसानों को बेहतर कृषि मौसम सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा लंबे समय से भारत मौसम विज्ञान विभाग और मौसम विज्ञान केंद्र, जयपुर से पत्राचार किया जा रहा था। इसी प्रयास का परिणाम है कि अब केवीके परिसर में स्वचालित मौसम वेधशाला स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
इस संबंध में मौसम विज्ञान केंद्र, जयपुर के प्रमुख राधेश्याम शर्मा ने कृषि विज्ञान केंद्र, पोकरण का दौरा कर प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान वेधशाला स्थापना के लिए आवश्यक तकनीकी मानकों, भूमि की उपयुक्तता तथा अन्य व्यवस्थागत पहलुओं का विस्तृत मूल्यांकन किया गया।
एक महीने में पूरी होगी स्थापना प्रक्रिया
राधेश्याम शर्मा ने बताया कि यह वेधशाला भारत मौसम विज्ञान विभाग की 330 एग्रो ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन (Agro-AWS) परियोजना के तहत स्थापित की जाएगी। उन्होंने कहा कि स्थापना से जुड़ी सभी औपचारिकताएं और तकनीकी कार्यवाही अगले एक महीने के भीतर पूरी कर ली जाएगी।
उन्होंने कहा कि वेधशाला के शुरू होने के बाद जैसलमेर मुख्यालय के आंकड़ों पर निर्भरता कम होगी और किसानों को उनके क्षेत्र के अनुरूप मौसम आधारित कृषि सलाह उपलब्ध कराई जा सकेगी।
किसानों को मिलेगा बड़ा लाभ
स्वचालित मौसम वेधशाला के माध्यम से वर्षा, तापमान, सापेक्ष आर्द्रता, हवा की गति और दिशा सहित विभिन्न मौसमीय आंकड़े स्थानीय स्तर पर स्वतः रिकॉर्ड और प्रसारित किए जाएंगे। इन आंकड़ों के आधार पर कृषि वैज्ञानिक किसानों को अधिक सटीक और समयबद्ध सलाह दे सकेंगे।
विशेषज्ञों के अनुसार इससे किसानों को:
- फसल बुवाई का सही समय निर्धारित करने में मदद मिलेगी।
- सिंचाई प्रबंधन अधिक वैज्ञानिक तरीके से किया जा सकेगा।
- कीट एवं रोग प्रकोप की पूर्व चेतावनी मिल सकेगी।
- आंधी, लू, ओलावृष्टि या भारी वर्षा जैसी प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों से फसल सुरक्षा की बेहतर रणनीति बनाई जा सकेगी।
- जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए मौसम आधारित कृषि तकनीकों को अपनाने में सहायता मिलेगी।
जलवायु अनुकूल खेती को मिलेगा बढ़ावा
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि रेगिस्तानी एवं शुष्क क्षेत्रों में मौसम की सटीक जानकारी खेती की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। पोकरण में स्वचालित मौसम वेधशाला की स्थापना से न केवल कृषि मौसम सलाह सेवाएं मजबूत होंगी, बल्कि जलवायु अनुकूल खेती, प्राकृतिक संसाधन संरक्षण और उत्पादन जोखिम को कम करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।
क्षेत्र के किसानों ने भी इस पहल का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि स्थानीय मौसम आंकड़ों की उपलब्धता से खेती के निर्णय अधिक वैज्ञानिक और लाभकारी बन सकेंगे।
