September 23, 2026 3:06 PM

Krishi Times

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PMKSY 3.0 के तहत वाटरशेड विकास को मिलेगी नई दिशा!

जलवायु-अनुकूल खेती को बढ़ावा देने के लिए वाटरशेड विकास पर राष्ट्रीय मंथन!

पीएम कृषि सिंचाई योजना 3.0 के लिए तैयार हो रहे नए तकनीकी दिशानिर्देश, ओडिशा और कर्नाटक के अनुभवों पर आधारित होगी रणनीति

नई दिल्ली, 23 सितंबर। देश में वर्षा आधारित कृषि क्षेत्रों को अधिक उत्पादक, जल-सुरक्षित और जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीला बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के राष्ट्रीय वर्षा आधारित क्षेत्र प्राधिकरण (एनआरएए) ने नई दिल्ली स्थित एनएएससी परिसर में रिवार्ड (REWARD – Rejuvenating Watersheds for Agricultural Resilience through Innovative Development) कार्यक्रम के तहत राष्ट्रीय स्तर की तकनीकी समिति (NLTC) की बैठक आयोजित की।

बैठक की अध्यक्षता एनआरएए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. चंद्र शेखर कुमार ने की। इसमें भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), भूमि संसाधन विभाग (डीओएलआर), ओडिशा और कर्नाटक सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, कृषि विश्वविद्यालयों, आईआईटी, वैज्ञानिक संस्थानों, गैर-सरकारी संगठनों और तकनीकी भागीदारों सहित लगभग 45 विशेषज्ञों ने भाग लिया।

क्यों महत्वपूर्ण है REWARD कार्यक्रम?

भारत के लगभग 52 प्रतिशत कृषि क्षेत्र वर्षा पर निर्भर हैं। बदलते जलवायु परिदृश्य, अनियमित वर्षा, भूजल स्तर में गिरावट और मिट्टी की गुणवत्ता में कमी जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए वाटरशेड आधारित विकास को कृषि क्षेत्र का महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। REWARD कार्यक्रम का उद्देश्य आधुनिक तकनीक, डेटा विश्लेषण और वैज्ञानिक प्रबंधन के माध्यम से जल एवं भूमि संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है।

डेटा आधारित योजना और निर्णय प्रणाली पर जोर

बैठक में डॉ. चंद्र शेखर कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय तकनीकी दिशानिर्देश (NTG) में शामिल सभी निष्कर्षों और दावों का आधार वास्तविक और सत्यापित आंकड़े होने चाहिए। उन्होंने ओडिशा और कर्नाटक सरकारों को वाटरशेड डेटा तथा डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (DSS) को सभी हितधारकों के साथ साझा करने की सलाह दी, ताकि भविष्य की योजनाएं अधिक सटीक और प्रभावी बन सकें।

भूमि संसाधन और जल विज्ञान के एकीकरण की आवश्यकता

आईसीएआर के उप महानिदेशक (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन) डॉ. ए.के. नायक ने कहा कि वाटरशेड परियोजनाओं की बेहतर योजना के लिए भूमि संसाधन सूची (LRI) और हाइड्रोलॉजिकल डेटा का एकीकृत उपयोग आवश्यक है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि राष्ट्रीय तकनीकी दिशानिर्देशों में अपनाई गई कार्यप्रणालियों का स्पष्ट उल्लेख किया जाए, ताकि राज्यों और कार्यान्वयन एजेंसियों को एक समान मार्गदर्शन मिल सके।

डीपीआर तैयारी की अवधि घटाने का सुझाव

भूमि संसाधन विभाग में संयुक्त सचिव नितिन खाडे ने सुझाव दिया कि परियोजनाओं के क्रियान्वयन को गति देने के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने की अवधि छह माह से घटाकर तीन माह करने पर विचार किया जा सकता है। उन्होंने कृषि, जल संरक्षण, वानिकी और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों के बीच बेहतर अभिसरण (Convergence) को भी भविष्य के दिशानिर्देशों में शामिल करने की आवश्यकता बताई।

भविष्य की वाटरशेड परियोजनाओं का आधार बनेगा NTG

बैठक में एनआरएए की तकनीकी विशेषज्ञ एवं REWARD कार्यक्रम की प्रमुख अन्वेषक डॉ. सुसमा सुधिश्री ने राष्ट्रीय तकनीकी दिशानिर्देश (NTG) के दूसरे मसौदे में किए गए संशोधनों की जानकारी दी। उन्होंने ओडिशा और कर्नाटक की राज्य स्तरीय नोडल एजेंसियों से अनुरोध किया कि वे एकत्रित डेटा को विश्लेषण और सत्यापन के लिए साझा करें।

विशेषज्ञों के अनुसार, तैयार किया जा रहा राष्ट्रीय तकनीकी दिशानिर्देश (NTG) प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) 3.0 के वाटरशेड विकास घटक के तहत भविष्य की परियोजनाओं के लिए मार्गदर्शक दस्तावेज बनेगा। इससे जल संरक्षण, मिट्टी सुधार, फसल उत्पादकता वृद्धि और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

किसानों के लिए क्या होगा लाभ?

  • वर्षा जल का बेहतर संरक्षण और उपयोग।
  • सूखा एवं अनियमित वर्षा से होने वाले नुकसान में कमी।
  • मिट्टी की उर्वरता और नमी संरक्षण में सुधार।
  • फसल विविधीकरण और उत्पादकता बढ़ाने के अवसर।
  • जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने में ग्रामीण समुदायों की क्षमता मजबूत होगी।
  • दीर्घकाल में किसानों की आय और ग्रामीण आजीविका को मजबूती मिलेगी।

यह पहल ऐसे समय में हो रही है जब देश में जलवायु-अनुकूल कृषि (Climate Smart Agriculture) को बढ़ावा देने और प्राकृतिक संसाधनों के टिकाऊ प्रबंधन को कृषि विकास की प्राथमिकता बनाया जा रहा है। REWARD कार्यक्रम से प्राप्त अनुभव और डेटा आने वाले वर्षों में वाटरशेड आधारित कृषि विकास की नई दिशा तय कर सकते हैं।