October 1, 2026 12:06 AM

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गन्ना किसानों को मिले उन्नत किस्मों के नए विकल्प!

यूपी में गन्ना खेती को मिलेगी नई रफ्तार: 4 नई उन्नत किस्में मंजूर, पुरानी 6 किस्में होंगी चरणबद्ध तरीके से बाहर

अधिक उपज, बेहतर चीनी परता और रोग प्रतिरोधक क्षमता वाली नई किस्मों पर लगी मुहर, किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम

लखनऊ, 30 सितंबर 2026। उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए राज्य की बीज गन्ना एवं गन्ना किस्म स्वीकृति उप समिति ने चार नई उन्नत गन्ना किस्मों को खेती के लिए मंजूरी दे दी है। इनमें उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद, शाहजहांपुर द्वारा विकसित को.शा.23232, को.शा.19235 और को.शा.18232 तथा भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (आईआईएसआर), लखनऊ द्वारा विकसित को.लख.21201 शामिल हैं। नई किस्मों को मंजूरी मिलने से प्रदेश के लाखों गन्ना किसानों को अधिक उत्पादन, बेहतर चीनी परता और रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले विकल्प उपलब्ध होंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि नई किस्मों के विस्तार से उत्तर प्रदेश की चीनी उद्योग श्रृंखला को मजबूती मिलेगी और किसानों की प्रति हेक्टेयर आय में वृद्धि का मार्ग प्रशस्त होगा।

गन्ना आयुक्त की अध्यक्षता में हुई महत्वपूर्ण बैठक

गन्ना आयुक्त कार्यालय, लखनऊ में आयोजित “बीज गन्ना एवं गन्ना किस्म स्वीकृति उप समिति” की बैठक में प्रदेश की आयुक्त, गन्ना एवं चीनी ने अध्यक्षता की। बैठक में उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद, शाहजहांपुर एवं भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ के वैज्ञानिकों, विभिन्न क्षेत्रों के प्रगतिशील किसानों, चीनी मिल प्रतिनिधियों तथा विभागीय अधिकारियों ने भाग लिया।

बैठक में नई गन्ना किस्मों के बहुवर्षीय परीक्षणों, उपज क्षमता, चीनी परता, रोग प्रतिरोधकता तथा पेड़ी प्रदर्शन के आंकड़ों का विस्तृत परीक्षण किया गया। आंकड़ों के आधार पर समिति ने चार नई किस्मों को खेती के लिए अवमुक्त करने का निर्णय लिया।

को.शा.23232: लोकप्रिय को.0238 का मजबूत विकल्प बनने की संभावना

उपज और चीनी परता दोनों में बेहतर प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद, शाहजहांपुर द्वारा विकसित अगेती गन्ना किस्म को.शा.23232 बैठक का प्रमुख आकर्षण रही। परीक्षण परिणामों के अनुसार इस किस्म की औसत पौधा गन्ना उपज 95.56 टन प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई, जो वर्तमान में किसानों के बीच लोकप्रिय किस्म को.0238 से लगभग 9.44 प्रतिशत अधिक है।

इसके अलावा नवंबर, जनवरी और मार्च में पोल प्रतिशत (गन्ने में शर्करा की मात्रा) भी को.0238 की तुलना में अधिक पाया गया। पेड़ी फसल की औसत उपज 80.57 टन प्रति हेक्टेयर रही, जो मानक किस्म से बेहतर है।

वैज्ञानिकों ने बताया कि यह किस्म लाल सड़न (रेड रॉट) रोग के प्रति प्रतिरोधी है तथा इसकी पेड़ी क्षमता भी उत्कृष्ट है। यही कारण है कि समिति ने इसे पूरे प्रदेश में खेती के लिए मंजूरी प्रदान की।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह किस्म बड़े स्तर पर अपनाई जाती है तो गन्ना उत्पादन के साथ-साथ चीनी उत्पादन में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी संभव है।

को.लख.21201: बेहतर रिकवरी और मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता

भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ द्वारा विकसित अगेती किस्म को.लख.21201 को भी पूरे उत्तर प्रदेश के लिए अवमुक्त किया गया है।

इस किस्म की औसत उपज 86.57 टन प्रति हेक्टेयर रही, जो लोकप्रिय किस्म को.0238 के लगभग बराबर है। हालांकि इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसका उच्च पोल प्रतिशत है। परीक्षणों में इसका पोल प्रतिशत 13.94 दर्ज किया गया, जो को.0238 से अधिक है।

विशेषज्ञों के अनुसार यह किस्म लाल सड़न रोग के प्रति उच्च प्रतिरोधक क्षमता रखती है तथा इसकी पेड़ी भी मजबूत होती है। यही कारण है कि इसे भविष्य की महत्वपूर्ण व्यावसायिक किस्म माना जा रहा है।

मध्य एवं देर से पकने वाली दो नई किस्मों को भी मिली मंजूरी

को.शा.19235 से बढ़ेगा प्रजातीय संतुलन

समिति ने मध्य एवं देर से पकने वाली किस्म को.शा.19235 को भी मंजूरी दी। परीक्षणों में इस किस्म की औसत उपज 87.58 टन प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई, जो मानक किस्म को.शा.767 की तुलना में 21.01 प्रतिशत अधिक है।

इसका पोल प्रतिशत भी नवंबर से मार्च तक लगातार बेहतर पाया गया। पेड़ी उपज 73.90 टन प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई, जो मानक किस्म से काफी अधिक है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह किस्म प्रदेश में गन्ना प्रजातियों के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

को.शा.18232 ने दिखाया सबसे प्रभावशाली प्रदर्शन

मध्य-देर से पकने वाली दूसरी नई किस्म को.शा.18232 ने उपज के मामले में सबसे प्रभावशाली परिणाम दिए।

इसकी औसत पौधा गन्ना उपज 92.38 टन प्रति हेक्टेयर रही, जो मानक किस्म को.शा.767 की तुलना में 26.51 प्रतिशत अधिक है। पेड़ी उपज 82.06 टन प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई, जो मानक किस्म से लगभग 24 प्रतिशत अधिक है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह किस्म भविष्य में प्रदेश के कई गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में तेजी से लोकप्रिय हो सकती है।

एक और नई किस्म पर अगली बैठक में होगा फैसला

बैठक में शाहजहांपुर गन्ना शोध परिषद द्वारा विकसित अगेती किस्म को.शा.23231 पर भी चर्चा हुई। इस किस्म के उपज और शर्करा प्रतिशत के आंकड़े उत्साहजनक पाए गए, लेकिन रोग प्रतिरोधकता संबंधी सभी आंकड़े अभी उपलब्ध नहीं हैं।

इसी कारण समिति ने इस किस्म पर अंतिम निर्णय अगली बैठक में लेने का फैसला किया है, जो जनवरी-फरवरी 2027 में प्रस्तावित है।

केंद्र द्वारा अधिसूचित 8 किस्मों को भी मिली मंजूरी

बैठक में भारत सरकार द्वारा पहले से अधिसूचित आठ गन्ना किस्मों को भी प्रदेश में खेती के लिए अंगीकृत किया गया।

अगेती किस्में, को.पी.16437, को.पी.11438, को.लख.16466
मध्य एवं देर से पकने वाली किस्में
  • को.16030, को.17018, को.18022, को.पीबी.17215 (को.पीबी.99), को.पीबी.18213 (को.पीबी.100)

इनमें को.पी.16437 और को.पी.11438 को पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए उपयुक्त माना गया है, जबकि अन्य किस्मों को पश्चिमी एवं मध्य उत्तर प्रदेश के लिए अनुशंसित किया गया है।

पुरानी और अलोकप्रिय 6 किस्में घोषित हुईं अनुपयुक्त

अगले दो वर्षों में खेती से होंगी बाहर

गन्ना क्षेत्र में प्रजातीय सुधार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से समिति ने छह पुरानी एवं कम उपयोग वाली किस्मों को अनुपयुक्त घोषित कर दिया है।

इनमें शामिल हैं: को.शा.95255, को.शा.97264, को.शा.96275, को.शा.97261, को.से.96436, को.से.98231

इन किस्मों को अगले दो वर्षों में चरणबद्ध तरीके से अस्वीकृत कर दिया जाएगा, ताकि किसान नई और अधिक उत्पादक किस्मों को अपना सकें।

प्रदेश की चीनी अर्थव्यवस्था को मिलेगा लाभ

उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य है। राज्य की अर्थव्यवस्था में गन्ना और चीनी उद्योग की महत्वपूर्ण भूमिका है। विशेषज्ञों का कहना है कि नई किस्मों के उपयोग से न केवल किसानों की उत्पादकता बढ़ेगी बल्कि चीनी मिलों को अधिक रिकवरी वाला गन्ना भी मिलेगा।

बेहतर रिकवरी का सीधा असर चीनी उत्पादन पर पड़ेगा, जिससे उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी। साथ ही किसानों को अधिक उपज और बेहतर भुगतान मिलने की संभावना भी मजबूत होगी।

किसानों के लिए क्या है संदेश?

कृषि वैज्ञानिकों का सुझाव है कि किसान नई स्वीकृत किस्मों के बारे में अपने क्षेत्र के गन्ना विकास विभाग, शोध संस्थानों और चीनी मिलों से जानकारी प्राप्त करें। रोग प्रतिरोधी एवं उच्च उपज वाली किस्मों को अपनाने से उत्पादन लागत कम करने और आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

नई किस्मों की मंजूरी को उत्तर प्रदेश में गन्ना खेती के आधुनिकीकरण और उत्पादकता वृद्धि की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिसका लाभ आने वाले वर्षों में लाखों गन्ना किसानों को मिल सकता है।