प्रयागराज में सीड हेल्थ फैसिलिटी का लोकार्पण, रबी फसलों की उत्पादकता बढ़ाने पर मंथन!
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने प्रयागराज स्थित सैम हिगिनबॉटम कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (SHUATS) में अत्याधुनिक सीड हेल्थ फैसिलिटी का लोकार्पण किया। इस सुविधा को बीजों की गुणवत्ता, बीज जनित रोगों की पहचान और स्वस्थ बीज सामग्री उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
बीजों की गुणवत्ता जांच में मिलेगी मदद
सीड हेल्थ फैसिलिटी के माध्यम से बीजों की गुणवत्ता जांच, बीज जनित रोगों की पहचान तथा प्रमाणन से जुड़ी गतिविधियों को वैज्ञानिक आधार पर मजबूती मिलने की उम्मीद है। बीज की गुणवत्ता सीधे फसल के अंकुरण, पौधों के स्वास्थ्य और उत्पादन क्षमता को प्रभावित करती है। ऐसे में वैज्ञानिक परीक्षण की सुविधा किसानों तक बेहतर गुणवत्ता वाले बीज पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
इस तरह की सुविधा से बीजों में मौजूद संभावित रोगजनकों की समय रहते पहचान करने, गुणवत्ता मानकों को बनाए रखने और स्वस्थ बीज उत्पादन की प्रक्रिया को मजबूत करने में मदद मिल सकती है। इसका व्यापक उद्देश्य कृषि उत्पादन की गुणवत्ता और उत्पादकता में सुधार करना है।
बीज विधायन संयंत्र का किया निरीक्षण
कार्यक्रम के दौरान कृषि मंत्री ने विश्वविद्यालय के बीज विधायन संयंत्र का भी निरीक्षण किया। उन्होंने बीजों की सफाई, ग्रेडिंग, उपचार और भंडारण में इस्तेमाल की जा रही आधुनिक तकनीकों का अवलोकन किया।
निरीक्षण के दौरान बीज गुणवत्ता प्रबंधन को और मजबूत करने तथा वैज्ञानिक प्रक्रियाओं के प्रभावी इस्तेमाल पर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। बीज विधायन की बेहतर व्यवस्था से विभिन्न फसलों के बीजों की गुणवत्ता बनाए रखने, उनकी उपयोगिता बढ़ाने और किसानों को बेहतर रोपण सामग्री उपलब्ध कराने में सहायता मिल सकती है।
12वीं रबी ग्रुप मीटिंग में रबी फसलों पर चर्चा
कृषि मंत्री ने विश्वविद्यालय में आयोजित 12वीं रबी ग्रुप मीटिंग में भी सहभागिता की। बैठक में आगामी रबी सीजन को ध्यान में रखते हुए रबी फसलों की उत्पादकता बढ़ाने, उन्नत बीजों के इस्तेमाल, संतुलित उर्वरक प्रबंधन और जलवायु-अनुकूल कृषि तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बदलते मौसम और कृषि लागत की चुनौतियों के बीच रबी फसलों में ऐसी तकनीकों को बढ़ावा देने पर जोर महत्वपूर्ण है, जिनसे उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग हो और फसल उत्पादन अधिक स्थिर बनाया जा सके। उन्नत बीजों के साथ संतुलित पोषण, उचित सिंचाई, रोग एवं कीट प्रबंधन तथा स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप कृषि तकनीकों का इस्तेमाल उत्पादन क्षमता को प्रभावित करता है।
किसानों को वितरित किए बकला के बीज
कार्यक्रम के दौरान किसानों को बकला के उन्नत बीज भी वितरित किए गए। इसका उद्देश्य किसानों को उन्नत किस्मों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना और रबी मौसम में बेहतर उत्पादन की संभावनाओं को बढ़ाना है।
किसानों तक उन्नत बीज पहुंचाने के साथ यदि वैज्ञानिक सलाह, बीज उपचार, उचित पोषण प्रबंधन और फसल प्रबंधन की जानकारी भी उपलब्ध कराई जाए, तो नई किस्मों का लाभ अधिक प्रभावी तरीके से खेतों तक पहुंच सकता है।
कृषि अनुसंधान और किसान के बीच मजबूत होगा संपर्क
प्रयागराज में आयोजित इन गतिविधियों में बीज स्वास्थ्य, बीज प्रसंस्करण और रबी फसल अनुसंधान को एक साथ जोड़ने का प्रयास दिखाई दिया। विश्वविद्यालयों, कृषि अनुसंधान संस्थानों और किसानों के बीच बेहतर समन्वय से प्रयोगशाला में विकसित तकनीकों और उन्नत कृषि पद्धतियों को खेतों तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
कार्यक्रम में आईसीएआर के उप महानिदेशक डॉ. डी.के. यादव, SHUATS के कुलपति डॉ. आई.आर. जोनाथन ए. लाल, कुलसचिव डॉ. सी. जॉन वेसली, निदेशक शोध डॉ. एस.डी. मेकाटी, निदेशक बीज एवं प्रक्षेत्र डॉ. रामकांत दुबे, पादप प्रजनन एवं आनुवंशिकी विभागाध्यक्ष डॉ. वैद्युर्य प्रताप शाही तथा प्रमुख अन्वेषक डॉ. प्रशांत कुमार राय सहित अन्य संबंधित अधिकारी एवं वैज्ञानिक उपस्थित रहे।
सारांश
बीज गुणवत्ता से लेकर खेत की उत्पादकता तक, कृषि उत्पादन की पूरी श्रृंखला में गुणवत्तापूर्ण बीज की भूमिका आधारभूत है। प्रयागराज में सीड हेल्थ फैसिलिटी, बीज विधायन संयंत्र और रबी ग्रुप मीटिंग को एक साथ देखें तो फोकस केवल उन्नत बीज उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि बीज परीक्षण, रोग पहचान, प्रसंस्करण, वैज्ञानिक प्रबंधन और किसान तक तकनीक पहुंचाने की पूरी व्यवस्था को मजबूत करने पर है। इसका वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि इन वैज्ञानिक सुविधाओं और सिफारिशों का लाभ कितनी प्रभावी तरीके से किसानों के खेतों तक पहुंचता है।

























