September 30, 2026 4:01 AM

Krishi Times

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किसानों के लिए बड़ा फैसला, 10 राज्यों को ₹1200 करोड़ की मंजूरी!

राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन 2026: रबी सीजन की तैयारी पर केंद्र और राज्यों ने बनाया साझा रोडमैप, ‘खेत बचाओ अभियान’ से लेकर कृषि निर्यात तक पर बड़ा फोकस

10 राज्यों को 1200 करोड़ रुपये से अधिक की मंजूरी, हर माह होगी कृषि समीक्षा, नकली बीज-खाद पर सख्ती और दलहन उत्पादन बढ़ाने की रणनीति पर जोर

नई दिल्ली। देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत बनाने, किसानों की आय बढ़ाने और आगामी रबी सीजन की तैयारियों को अंतिम रूप देने के उद्देश्य से आयोजित राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन–रबी अभियान 2026 के दूसरे दिन नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर (पूसा) में केंद्र और राज्यों के कृषि मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों, कृषि वैज्ञानिकों तथा विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने व्यापक मंथन किया। सम्मेलन की अध्यक्षता केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की।

सम्मेलन में रबी फसलों की रणनीति, कृषि विकास, मिट्टी के स्वास्थ्य, डिजिटल कृषि, कृषि निर्यात, प्राकृतिक खेती, दलहन उत्पादन, कृषि विपणन और किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए गए।

किसानों के हित सर्वोपरि, ‘टीम एग्रीकल्चर’ के रूप में काम करने का आह्वान

अपने संबोधन में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कृषि केवल एक आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा और करोड़ों किसानों की आजीविका से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्यों को राजनीतिक सीमाओं से ऊपर उठकर कृषि विकास के लिए एक टीम के रूप में कार्य करना होगा।

उन्होंने कहा कि सरकारें बदल सकती हैं, लेकिन किसान और देश स्थायी हैं। इसलिए कृषि नीति और किसान कल्याण के मुद्दों पर सभी राज्यों को मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए वैज्ञानिक संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके), किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और किसानों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया।

पीएम-आरकेवीवाई के तहत 10 राज्यों को मिली बड़ी वित्तीय सहायता

सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (PM-RKVY) के अंतर्गत 10 राज्यों को 1200 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं के स्वीकृति पत्र प्रदान किए गए।

स्वीकृत राशि में पश्चिम बंगाल को 290 करोड़ रुपये, हरियाणा को 198 करोड़ रुपये, छत्तीसगढ़ को 181 करोड़ रुपये, अरुणाचल प्रदेश को 154 करोड़ रुपये, बिहार को 114 करोड़ रुपये, कर्नाटक को 104 करोड़ रुपये, मिजोरम को 75 करोड़ रुपये, हिमाचल प्रदेश को 64 करोड़ रुपये, झारखंड को 58 करोड़ रुपये तथा पंजाब को 43 करोड़ रुपये शामिल हैं।

कृषि मंत्रालय का मानना है कि इन परियोजनाओं के माध्यम से कृषि अवसंरचना, आधुनिक तकनीक, जल प्रबंधन, उत्पादकता वृद्धि और किसान प्रशिक्षण कार्यक्रमों को गति मिलेगी।

कृषि विकास दर में सुधार और उत्पादन वृद्धि का दावा

सम्मेलन में कृषि क्षेत्र की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया गया कि पिछले दशक में कृषि विकास दर में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वर्ष 2015 के बाद कृषि विकास दर लगभग 3 प्रतिशत से बढ़कर 4.5 प्रतिशत तक पहुंची है।

उन्होंने बताया कि खाद्यान्न उत्पादन में वार्षिक वृद्धि पहले की तुलना में दोगुने से अधिक स्तर पर पहुंची है। साथ ही पिछले दो वर्षों में रबी खाद्यान्न उत्पादन में 205 लाख टन की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय किसानों, वैज्ञानिकों और राज्यों के कृषि विभागों के संयुक्त प्रयासों को दिया।

केंद्र और राज्यों के बीच बनेगा नया समन्वय तंत्र

सम्मेलन की सबसे महत्वपूर्ण घोषणाओं में से एक कृषि क्षेत्र के लिए नया समन्वय तंत्र रहा। इसके तहत अब केंद्र और राज्यों के बीच नियमित वर्चुअल समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएंगी।

राज्य स्तर पर कृषि मंत्री, कृषि सचिव, कृषि विश्वविद्यालय, आईसीएआर संस्थान, कृषि विज्ञान केंद्र, एफपीओ, प्रगतिशील किसान, प्रोसेसर और निर्यातकों को जोड़कर “स्टेट एग्रीकल्चर टीम” बनाई जाएगी। वहीं जिला स्तर पर जिला प्रशासन, कृषि विभाग, वैज्ञानिकों, बैंकर्स और किसानों की नियमित बैठकें आयोजित होंगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी बेहतर होगी और जमीनी स्तर की समस्याओं का समाधान तेजी से किया जा सकेगा।

खरीफ और रबी के लिए स्थायी वार्षिक कैलेंडर

कृषि मंत्रालय ने खरीफ और रबी दोनों मौसमों की तैयारियों के लिए स्थायी कैलेंडर भी घोषित किया है।

  • खरीफ फसलों के लिए हर वर्ष 10 मई को जिला स्तरीय और 17 मई को राज्य स्तरीय बैठक होगी।
  • रबी सीजन के लिए 10 सितंबर को जिला स्तरीय तथा 17 सितंबर को राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी।

इसके अलावा पूरे देश में एक ही दिन कृषि विभाग, वैज्ञानिकों और किसानों की संयुक्त बैठक आयोजित करने की भी योजना बनाई गई है, ताकि कृषि संबंधी चुनौतियों और समाधान पर एक साथ चर्चा हो सके।

22 अक्टूबर से 30 नवंबर तक चलेगा ‘खेत बचाओ अभियान’

सम्मेलन में मिट्टी के स्वास्थ्य और टिकाऊ कृषि को लेकर विशेष चिंता व्यक्त की गई। इसी के मद्देनजर 22 अक्टूबर से 30 नवंबर तक देशव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ चलाने की घोषणा की गई।

अभियान का मुख्य उद्देश्य मिट्टी की उर्वरता बनाए रखना, रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा देना और कृषि भूमि की उत्पादकता को लंबे समय तक सुरक्षित रखना है।

इस अभियान में कृषि वैज्ञानिक, कृषि विश्वविद्यालय, केवीके, राज्य कृषि विभाग और किसान संगठन सक्रिय भूमिका निभाएंगे। सॉइल हेल्थ कार्ड के आधार पर उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे खेती की लागत कम करने और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिल सके।

पूर्वी भारत में बढ़ेगा दलहन उत्पादन

सम्मेलन में पूर्वी भारत के राज्यों—बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल—में धान कटाई के बाद खाली रहने वाले खेतों का उपयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

कृषि मंत्रालय ने ‘राइस फेलो’ क्षेत्रों में दलहन फसलों की खेती को बढ़ावा देने की रणनीति प्रस्तुत की। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे देश में दालों के उत्पादन में वृद्धि होगी, किसानों को अतिरिक्त आय मिलेगी और आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।

रबी सीजन के लिए वैज्ञानिक खेती पर जोर

केंद्रीय मंत्री ने राज्यों को निर्देश दिया कि किसानों को मिट्टी में उपलब्ध नमी और जल संसाधनों के आधार पर ही फसल चयन और बीजों की सिफारिश की जाए।

इसके साथ ही कीट एवं रोग प्रबंधन, गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्धता, किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) कवरेज और फसल बीमा योजना के तहत पारदर्शी क्रॉप कटिंग एक्सपेरिमेंट (CCE) सुनिश्चित करने पर बल दिया गया।

नकली खाद, बीज और कीटनाशकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई

सम्मेलन में किसानों के हितों को प्रभावित करने वाले नकली कृषि आदानों के मुद्दे पर भी गंभीर चर्चा हुई।

केंद्रीय मंत्री ने राज्यों को निर्देश दिए कि नकली खाद, नकली बीज और घटिया कीटनाशकों की बिक्री के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि किसानों के साथ धोखाधड़ी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि गुणवत्तापूर्ण बीज और उर्वरक उपलब्ध होने से उत्पादन बढ़ाने के साथ किसानों का जोखिम भी कम होगा।

प्राकृतिक खेती, एकीकृत कृषि और विविधीकरण पर जोर

जलवायु परिवर्तन और बढ़ती उत्पादन लागत की चुनौतियों को देखते हुए सम्मेलन में प्राकृतिक खेती, एकीकृत कृषि प्रणाली (Integrated Farming System) और फसल विविधीकरण को भविष्य की कृषि रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया।

विशेषज्ञों का कहना है कि फसल विविधीकरण से किसानों की आय के स्रोत बढ़ते हैं और मौसम संबंधी जोखिम कम होते हैं। वहीं पशुपालन, बागवानी, मत्स्य पालन और कृषि आधारित उद्यमों को खेती से जोड़कर अतिरिक्त आय के अवसर भी पैदा किए जा सकते हैं।

किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने के लिए नई रणनीति

सम्मेलन में किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने के लिए पोस्ट हार्वेस्ट प्रबंधन, वैज्ञानिक भंडारण (वेयरहाउसिंग), प्रसंस्करण और बाजार संपर्क को मजबूत बनाने की रणनीति पर चर्चा हुई।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि तुअर, उड़द और मसूर जैसी दलहनी फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद सुनिश्चित की जाएगी और भुगतान प्रक्रिया को तेज किया जाएगा। इससे दलहन उत्पादक किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

कृषि निर्यात बढ़ाने पर विशेष फोकस

सम्मेलन में कृषि निर्यात को किसानों की आय बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया गया। फलों, सब्जियों, अनाज और मूल्य संवर्धित कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने पर जोर दिया गया।

विशेषज्ञों के अनुसार यदि उत्पादन, गुणवत्ता, भंडारण, कोल्ड चेन और निर्यात अवसंरचना को मजबूत किया जाए तो भारत वैश्विक कृषि व्यापार में अपनी हिस्सेदारी और बढ़ा सकता है।

डिजिटल कृषि और पीएम-आशा पर भी चर्चा

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव अतीश चंद्रा ने रबी सीजन की तैयारियों की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने डिजिटल कृषि, किसान डेटाबेस, संतुलित उर्वरक उपयोग, पीएम-आशा योजना, कृषि निर्यात, बजट प्रबंधन और सप्त धारा कार्यक्रम सहित कई विषयों पर जानकारी दी।

रबी सीजन 2026-27 के लिए दिशा तय

राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन–रबी अभियान 2026 का दूसरा दिन केवल समीक्षा बैठक तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने आने वाले रबी सीजन के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय कृषि रोडमैप प्रस्तुत किया। केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय, वैज्ञानिक खेती, मिट्टी स्वास्थ्य, कृषि निर्यात, दलहन उत्पादन और किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने पर बने साझा एजेंडे से उम्मीद है कि आगामी रबी सीजन में उत्पादन, उत्पादकता और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे।