September 26, 2026 3:09 AM

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मालदीव पहुंची गुलबर्गा तुअर दाल, किसानों की बढ़ी कमाई!

मालदीव पहुंची जीआई टैग वाली गुलबर्गा तुअर दाल, किसानों को मिला 82 रुपये प्रति किलो का भाव

एपीडा की पहल से खुला अंतरराष्ट्रीय बाजार, किसानों को घरेलू बाजार से 30% अधिक कीमत

नई दिल्ली/कलबुर्गी। भारत के जीआई (Geographical Indication) टैग वाले कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने कर्नाटक की प्रसिद्ध गुलबर्गा तुअर दाल की एक मीट्रिक टन खेप मालदीव निर्यात कराने में सहयोग प्रदान किया है। 24 सितंबर 2026 को रवाना की गई यह खेप न केवल भारतीय कृषि उत्पादों की ग्लोबल पहचान को मजबूत करेगी, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने का भी नया रास्ता खोलेगी।

निर्यात से किसानों को मिला बेहतर दाम

इस पहल की सबसे बड़ी उपलब्धि किसानों को मिलने वाला बेहतर मूल्य है। वर्तमान में स्थानीय बाजार में तुअर दाल का भाव लगभग 60 रुपये प्रति किलो है, जबकि निर्यात के माध्यम से किसानों को 82 रुपये प्रति किलो का मूल्य प्राप्त हुआ। यानी किसानों को घरेलू बाजार की तुलना में 30 प्रतिशत से अधिक अतिरिक्त लाभ मिला है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसे निर्यात मॉडल को बड़े स्तर पर अपनाया जाए तो किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है।

एफपीओ आधारित ब्रांड को मिला ग्लोबल मंच

मैसूर स्थित सिल्केन ग्लोबल एक्सपोर्ट्स एंड इम्पोर्ट्स ने अपने एफपीओ (किसान उत्पादक संगठन) आधारित ब्रांड के माध्यम से इस खेप का निर्यात किया है। यह पहल दर्शाती है कि किसान उत्पादक संगठन अब केवल उत्पादन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ब्रांडिंग, मूल्य संवर्धन और निर्यात जैसे क्षेत्रों में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।

क्या है गुलबर्गा तुअर दाल की खासियत?

कर्नाटक के कलबुर्गी (पूर्व में गुलबर्गा) क्षेत्र में उत्पादित तुअर दाल अपने विशिष्ट स्वाद, गुणवत्ता, पकने की क्षमता और पोषण गुणों के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। इसी विशिष्टता को देखते हुए वर्ष 2019 में इसे जीआई टैग प्रदान किया गया था।

कलबुर्गी क्षेत्र देश के प्रमुख तुअर उत्पादक क्षेत्रों में गिना जाता है और यहां की कृषि अर्थव्यवस्था में दलहन फसलों की महत्वपूर्ण भूमिका है। जीआई टैग मिलने के बाद इस उत्पाद को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अलग पहचान मिली है।

मालदीव में बढ़ेगी भारतीय दालों की पहुंच

एपीडा का मानना है कि यह निर्यात मालदीव में गुलबर्गा तुअर दाल की नियमित आपूर्ति का आधार बनेगा। इससे भविष्य में निर्यात की मात्रा बढ़ने की संभावना है और कर्नाटक के किसानों एवं निर्यातकों के लिए नए बाजार अवसर तैयार होंगे।

एपीडा के अध्यक्ष अभिषेक देव ने कहा कि जीआई टैग वाले कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाना किसानों के लिए मजबूत बाजार संपर्क बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उनके अनुसार, गुलबर्गा तुअर दाल का यह निर्यात उत्पाद की अंतरराष्ट्रीय पहचान बढ़ाने के साथ-साथ नए बाजारों के द्वार भी खोलेगा।

कृषि निर्यात को मिलेगी नई गति

केंद्र सरकार और एपीडा लगातार ऐसे उत्पादों को बढ़ावा दे रहे हैं जिनकी क्षेत्रीय पहचान मजबूत है। जीआई टैग वाले उत्पादों का निर्यात न केवल किसानों को बेहतर मूल्य दिलाता है, बल्कि भारत की कृषि विविधता और गुणवत्ता को वैश्विक मंच पर स्थापित करने में भी मदद करता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अन्य राज्यों के जीआई टैग वाले कृषि उत्पादों को भी इसी तरह अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ा जाए, तो कृषि निर्यात बढ़ाने के साथ-साथ किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को भी गति मिल सकती है।