वैज्ञानिक पोल्ट्री उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम, ओडिशा के 20 पशु चिकित्सा अधिकारियों ने लिया विशेष प्रशिक्षण
कटक (ओडिशा)। देश में बढ़ती पोल्ट्री मांग, पशु स्वास्थ्य प्रबंधन और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने के उद्देश्य से केंद्रीय पोल्ट्री विकास संगठन (पूर्वी क्षेत्र) [CPDO (ER)], तालागढ़, कटक में 21 से 25 सितंबर 2026 तक “पोल्ट्री डेवलपमेंट एंड हैचरी मैनेजमेंट” विषय पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का तीसरा बैच सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण में मत्स्य एवं पशु संसाधन विकास विभाग, ओडिशा सरकार के 20 पशु चिकित्सा अधिकारियों ने भाग लिया और आधुनिक पोल्ट्री उत्पादन से जुड़ी तकनीकों का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में पोल्ट्री क्षेत्र कृषि और पशुपालन आधारित अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुका है। अंडा और मांस उत्पादन में लगातार वृद्धि के साथ-साथ यह क्षेत्र ग्रामीण युवाओं और किसानों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर भी पैदा कर रहा है। ऐसे में तकनीकी रूप से प्रशिक्षित पशु चिकित्सा अधिकारियों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।
आधुनिक पोल्ट्री प्रबंधन की बारीकियां सिखाई गईं
पांच दिनों तक चले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को वैज्ञानिक पोल्ट्री उत्पादन, हैचरी प्रबंधन, फीड एवं पोषण विश्लेषण, फार्म संचालन, जैव-सुरक्षा उपायों और गुड हैचरी प्रैक्टिसेज के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य अधिकारियों को ऐसी तकनीकी दक्षता प्रदान करना था, जिससे वे राज्य के पोल्ट्री किसानों को बेहतर सलाह और मार्गदर्शन दे सकें।
विशेषज्ञों ने बताया कि पोल्ट्री उद्योग में उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए केवल अच्छी नस्लें ही पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि संतुलित पोषण, बेहतर आवास व्यवस्था, रोग नियंत्रण और वैज्ञानिक प्रबंधन भी उतने ही आवश्यक हैं। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को आधुनिक हैचरी इकाइयों का भ्रमण कराया गया और अंडों के चयन से लेकर चूजों के उत्पादन तक की पूरी प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रदर्शन भी किया गया।
जैव-सुरक्षा और रोग नियंत्रण पर विशेष जोर
प्रशिक्षण में पोल्ट्री फार्मों में रोगों की रोकथाम और जैव-सुरक्षा उपायों को लेकर विशेष सत्र आयोजित किए गए। विशेषज्ञों ने बताया कि एवियन इन्फ्लुएंजा और अन्य संक्रामक रोगों से बचाव के लिए फार्म स्तर पर स्वच्छता, नियमित निगरानी और वैज्ञानिक प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है।
प्रतिभागियों को यह भी बताया गया कि यदि बायोसिक्योरिटी मानकों का सही तरीके से पालन किया जाए तो रोगों के प्रकोप को काफी हद तक रोका जा सकता है। इससे उत्पादन लागत कम होती है और किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ मिलता है।
किसानों तक पहुंचेगी आधुनिक तकनीक
प्रशिक्षण कार्यक्रम का एक प्रमुख उद्देश्य यह भी था कि प्रशिक्षित अधिकारी अपने-अपने कार्यक्षेत्रों में जाकर किसानों को आधुनिक पोल्ट्री तकनीकों के बारे में जागरूक करें। ओडिशा में पोल्ट्री क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है और राज्य सरकार भी अंडा तथा मांस उत्पादन बढ़ाने के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही है।
विशेषज्ञों ने कहा कि तकनीकी रूप से प्रशिक्षित पशु चिकित्सा अधिकारी किसानों को नस्ल चयन, चूजा प्रबंधन, टीकाकरण, पोषण और बाजार प्रबंधन जैसे विषयों पर बेहतर सलाह दे सकेंगे। इससे पोल्ट्री उद्यमों की सफलता दर बढ़ेगी और किसानों की आय में भी सकारात्मक वृद्धि होगी।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती
पोल्ट्री व्यवसाय को कम लागत में शुरू किया जा सकने वाला और त्वरित आय देने वाला उद्यम माना जाता है। यही कारण है कि छोटे और सीमांत किसान भी तेजी से इस क्षेत्र की ओर आकर्षित हो रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वैज्ञानिक तकनीकों को जमीनी स्तर तक पहुंचाया जाए तो पोल्ट्री क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभा सकता है।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने फीड गुणवत्ता परीक्षण, उत्पादन लागत प्रबंधन, हैचिंग दक्षता बढ़ाने और चूजों की जीवित रहने की दर सुधारने से जुड़े कई तकनीकी पहलुओं को भी सीखा।
प्रमाण पत्र वितरण के साथ हुआ समापन
कार्यक्रम का समापन एक विशेष वैलेडिक्टरी सत्र के साथ हुआ। इस अवसर पर सभी 20 प्रतिभागी पशु चिकित्सा अधिकारियों को प्रशिक्षण प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। अधिकारियों ने प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे उन्हें पोल्ट्री क्षेत्र की नई तकनीकों और प्रबंधन प्रणालियों को समझने का अवसर मिला।
आयोजकों ने कहा कि इस तरह के क्षमता निर्माण कार्यक्रम भविष्य में भी जारी रहेंगे, ताकि देश में एक कुशल और तकनीकी रूप से सक्षम पशु चिकित्सा कार्यबल तैयार किया जा सके। यह पहल न केवल पोल्ट्री उत्पादन बढ़ाने में मदद करेगी, बल्कि किसानों की आय वृद्धि, रोजगार सृजन और सतत पशुपालन विकास के राष्ट्रीय लक्ष्य को भी मजबूती प्रदान करेगी।
पोल्ट्री विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षित मानव संसाधन और बेहतर प्रबंधन के समन्वय से भारत का पोल्ट्री क्षेत्र आने वाले वर्षों में और अधिक प्रतिस्पर्धी तथा आत्मनिर्भर बन सकता है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।

























