अविकानगर में डॉ. एम.एल. जाट, पशुपालन तकनीकों के विस्तार पर जोर!

आईसीएआर महानिदेशक का दौरा: ‘अविषान’ भेड़ नस्ल के देशव्यापी विस्तार पर जोर, किसानों से सीधे संवाद कर दिए अहम निर्देश!

अविकानगर (राजस्थान), 21 अगस्त 2026। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक एवं कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के सचिव डॉ. एम.एल. जाट ने आईसीएआर–केन्द्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान (CSWRI), अविकानगर के दौरे के दौरान पशुधन एवं प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी का निरीक्षण किया। उन्होंने देशी पशुधन नस्लों के संरक्षण, वैज्ञानिक अनुसंधान को किसानों तक पहुंचाने तथा पशुपालन क्षेत्र में नवाचारों के विस्तार पर विशेष बल दिया।

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इस अवसर पर डीएआरई के अपर सचिव एवं आईसीएआर के सचिव ज्ञानेंद्र देव त्रिपाठी, आईसीएआर के उप महानिदेशक (पशु विज्ञान) डॉ. राघवेंद्र भट्टा, संस्थान के निदेशक डॉ. अरुण कुमार तोमर सहित देशभर के 10 क्षेत्रीय आईसीएआर संस्थानों के निदेशक और वरिष्ठ वैज्ञानिक उपस्थित रहे।

उत्कृष्ट पशुधन नस्लों का किया अवलोकन

डॉ. जाट ने प्रदर्शनी में संस्थान द्वारा विकसित एवं संरक्षित विभिन्न पशुधन नस्लों का अवलोकन किया। इनमें अविषान, अविकलिन, पाटनवाड़ी, मालपुरा और डुम्बा भेड़, सिरोही बकरी तथा ब्रॉयलर खरगोश प्रमुख रहे। उन्होंने इन नस्लों की उत्पादन क्षमता, आनुवंशिक विशेषताओं तथा किसानों के बीच इनके प्रसार के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों की जानकारी प्राप्त की।

उन्होंने कहा कि भारतीय पशुधन नस्लें ग्रामीण अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण धुरी हैं और इनके संरक्षण के साथ-साथ व्यावसायिक विस्तार पर भी समान रूप से ध्यान देने की आवश्यकता है।

‘अविषान’ नस्ल को देशभर के किसानों तक पहुंचाने का लक्ष्य

महानिदेशक ने विशेष रूप से ‘अविषान’ भेड़ नस्ल की उपलब्धियों की सराहना की। यह नस्ल बेहतर मांस उत्पादन, तेज वृद्धि दर और विभिन्न जलवायु परिस्थितियों में अनुकूलन क्षमता के लिए जानी जाती है। उन्होंने वैज्ञानिकों को निर्देश दिया कि इस नस्ल के प्रचार-प्रसार को राष्ट्रीय स्तर पर तेज किया जाए ताकि अधिक से अधिक पशुपालक इसका लाभ उठा सकें।

वैज्ञानिकों से संवाद, तकनीकों के व्यावसायीकरण पर जोर

प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी के दौरान डॉ. जाट ने वैज्ञानिकों से बातचीत कर पशुपालकों के लिए विकसित नई तकनीकों, प्रबंधन प्रणालियों और अनुसंधान उपलब्धियों की जानकारी ली। उन्होंने अनुसंधान को केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित न रखते हुए उसके व्यावसायिक उपयोग और किसानों तक त्वरित हस्तांतरण पर बल दिया।

डूंगरपुर पशु चिकित्सा महाविद्यालय के विद्यार्थियों से संवाद करते हुए उन्होंने उन्हें आधुनिक पशुधन तकनीकों को गांव-गांव तक पहुंचाने और पशुपालन क्षेत्र में नवाचारों को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया।

‘परिसंवाद’ में कर्मचारियों की समस्याएं सुनीं, त्वरित समाधान का भरोसा

संस्थान में आयोजित ‘परिसंवाद’ कार्यक्रम के दौरान डॉ. जाट ने वैज्ञानिकों, तकनीकी कर्मचारियों और अन्य स्टाफ के साथ खुला संवाद किया। उन्होंने युवा वैज्ञानिकों को विश्वस्तरीय और अग्रणी अनुसंधान करने के लिए प्रोत्साहित करते हुए प्रशासनिक एवं वित्तीय सहयोग का पूरा आश्वासन दिया।

बैठक में कर्मचारियों द्वारा उठाए गए कई मुद्दों का मौके पर ही समाधान किया गया, जबकि अन्य मामलों को समयबद्ध कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों को भेजा गया। उन्होंने कहा कि एक उत्तरदायी और संवेदनशील संस्थान ही कृषि एवं पशुपालन क्षेत्र में बेहतर परिणाम दे सकता है।

किसानों के साथ ‘चौपाल पर चर्चा’, समस्याओं के समाधान का आश्वासन

दौरे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा राजस्थान और हिमाचल प्रदेश के किसानों के साथ आयोजित ‘चौपाल पर चर्चा’ रहा। इस संवाद में किसानों ने खेती और पशुपालन से जुड़े अपने अनुभव, चुनौतियां, नवाचार और सफलता की कहानियां साझा कीं।

किसानों ने आईसीएआर की किसान-केंद्रित अनुसंधान परियोजनाओं और कल्याणकारी पहलों की सराहना की। डॉ. जाट ने आश्वासन दिया कि आईसीएआर संस्थानों द्वारा विकसित आधुनिक तकनीकें और गुणवत्तापूर्ण बीज सीधे किसानों तक पहुंचाए जाएंगे।

“लैब टू लैंड और लैंड टू मार्केट” मॉडल को मजबूत करने पर जोर

डॉ. जाट ने कहा कि कृषि अनुसंधान की वास्तविक सफलता तभी है जब उसका लाभ खेत तक पहुंचे और किसानों को बेहतर बाजार भी उपलब्ध हो। उन्होंने “Lab to Land and Land to Market” मॉडल को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल देते हुए संबंधित संस्थानों को किसानों की समस्याओं पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए।

सतत कृषि को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने किसानों से रासायनिक उर्वरकों के उपयोग में कमी लाने और जैव उर्वरकों एवं प्राकृतिक खेती को अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने उन किसानों की सराहना की जो पहले से ही पर्यावरण-अनुकूल खेती की दिशा में काम कर रहे हैं।

पशुपालन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि भेड़, बकरी और खरगोश जैसी पशुधन आधारित गतिविधियां छोटे और सीमांत किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। ऐसे में सीएसडब्ल्यूआरआई द्वारा विकसित नस्लों और तकनीकों का व्यापक विस्तार ग्रामीण रोजगार, ऊन एवं मांस उत्पादन तथा पशुपालकों की आय में वृद्धि का आधार बन सकता है।

डॉ. जाट का यह दौरा अनुसंधान संस्थानों, वैज्ञानिकों और किसानों के बीच संवाद को मजबूत करने तथा पशुपालन क्षेत्र को अधिक उत्पादक और लाभकारी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

Source: icar