केवीके का अभियान: मिट्टी स्वस्थ तो किसान समृद्ध!

बाजरा खेती पर फोकस, टिकाऊ कृषि की ओर कदम 📍 पोकरण (राजस्थान)। मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके) पोकरण ने मोडरडी गांव में संतुलित उर्वरक उपयोग पर एक जनजागरण कार्यक्रम आयोजित किया। इस अभियान में बड़ी संख्या में ग्रामीण किसान और महिला कृषकों ने भाग … Read more

अब सिर्फ यूरिया नहीं, संतुलित खेती का दौर!

संतुलित उर्वरक उपयोग अभियान: 700 गांवों तक पहुंचेगा IARI मिशन !! हापुड़, 28 अप्रैल 2026। -किसानों को मृदा स्वास्थ्य और टिकाऊ खेती के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से भा.कृ.अ.प.-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली ने उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के जसरोपनगर गोयाना गांव में “मेरा गांव–मेरा गौरव” कार्यक्रम के तहत एक व्यापक … Read more

भारत अब उर्वरकों में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

उर्वरकों में आत्मनिर्भर भारत की ओर बड़ा कदम: नीति, तकनीक और मृदा स्वास्थ्य पर जोर! नई दिल्ली: राष्ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी (एनएएएस) ने देश को उर्वरकों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार करने की दिशा में अहम कदम उठाते हुए उच्चस्तरीय विचार-मंथन सत्र आयोजित किया। इस सत्र में केंद्र सरकार … Read more

मिट्टी की सेहत ही खेती की असली ताकत है !!

मिट्टी की सेहत से कृषि में नई क्रांति: हैदराबाद में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम !! हैदराबाद, -कृषि उत्पादन बढ़ाने, लागत कम करने और किसानों की आय सुरक्षित करने के लिए मिट्टी की सेहत को मजबूत करना बेहद जरूरी माना जा रहा है। इसी दिशा में ICRISAT ने तेलंगाना सरकार के सहयोग से हैदराबाद के पाटनचेरु स्थित … Read more

NCONF संगोष्ठी: 2047 के विकसित भारत के लिए खेती का नया मॉडल!

राष्ट्रीय संगोष्ठी-सह-प्रदर्शनी: जैविक एवं प्राकृतिक खेती को मिला नया राष्ट्रीय मंच !! 📍 गाजियाबाद/नई दिल्ली, 25 मार्च 2026 : कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत राष्ट्रीय जैविक एवं प्राकृतिक खेती केन्द्र (NCONF), गाजियाबाद द्वारा देश में टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए 24-25 मार्च 2026 को … Read more

उर्वरकों का संतुलन ही टिकाऊ कृषि टिकाऊ कृषि की कुंजी!

संतुलित उर्वरीकरण से मृदा स्वास्थ्य, उत्पादकता और टिकाऊ कृषि को नई दिशा नई दिल्ली। फसल की पोषण आवश्यकताओं, मृदा की उर्वरता स्थिति और बदलती जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप उर्वरकों का वैज्ञानिक एवं विवेकपूर्ण उपयोग ही संतुलित उर्वरीकरण कहलाता है। इसके अंतर्गत सभी आवश्यक मैक्रोन्यूट्रिएंट्स (नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश आदि) तथा माइक्रोन्यूट्रिएंट्स (जिंक, आयरन, बोरॉन आदि) को … Read more

पराली जलाना मिट्टी की सेहत का सबसे बड़ा दुश्मन!

पराली जलाने से मिट्टी हो जाती है निर्जीव : मिट्टी की सजीवता पहचानने के वैज्ञानिक संकेत बताए डॉ. एस. के. सिंह समस्तीपुर – डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के पोस्ट ग्रेजुएट विभागाध्यक्ष (प्लांट पैथोलॉजी एवं नेमेटोलॉजी) एवं सह-निदेशक (अनुसंधान) प्रोफेसर (डॉ.) एस. के. सिंह ने कहा है कि पराली जलाना न केवल पर्यावरण … Read more

खेती की दुनिया को लेकर भारत-जर्मनी के बीच संवाद

भारत-जर्मनी कृषि सहयोग: जैविक खेती और डिजिटल कृषि में नई संभावनाएं ग्लोबल लेवल पर भारत कृषि जगत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जर्मनी के साथ कृषि सहयोग को लेकर संवाद हुआ। जर्मनी के राजदूत डॉ. फिलिप एकरमैन ने कृषि भवन में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय (एमओएएंडएफडब्‍ल्‍यू) के सचिव डॉ. देवेश चतुर्वेदी से मुलाकात की। … Read more