अब सिर्फ यूरिया नहीं, संतुलित खेती का दौर!

संतुलित उर्वरक उपयोग अभियान: 700 गांवों तक पहुंचेगा IARI मिशन !!

हापुड़, 28 अप्रैल 2026। -किसानों को मृदा स्वास्थ्य और टिकाऊ खेती के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से भा.कृ.अ.प.-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली ने उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के जसरोपनगर गोयाना गांव में “मेरा गांव–मेरा गौरव” कार्यक्रम के तहत एक व्यापक कृषक संगोष्ठी का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में 300 से अधिक किसानों, वैज्ञानिकों और कृषि अधिकारियों ने भाग लेकर संतुलित उर्वरक उपयोग पर गहन चर्चा की।

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देशव्यापी अभियान: 700 गांवों तक पहुंचेगी पहल !!

यह पहल केवल एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया जा रहा है। IARI के लगभग 600 वैज्ञानिकों की 129 टीमें देशभर के करीब 700 गांवों में जाकर किसानों से सीधे संवाद करेंगी। इसका उद्देश्य किसानों को संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, जलवायु अनुकूल खेती और आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ना है।

केवल यूरिया नहीं, संतुलित पोषण जरूरी !!

मुख्य अतिथि IARI के निदेशक डॉ. सी.एच. श्रीनिवास राव ने स्पष्ट कहा कि खेती में केवल यूरिया पर निर्भर रहना नुकसानदायक है। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि मृदा परीक्षण के आधार पर नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश का संतुलित उपयोग करें। इससे न केवल उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी लंबे समय तक बनी रहेगी।
जैविक और आधुनिक तकनीकों पर जोर

कार्यक्रम में किसानों को हरित खाद, वर्मी कम्पोस्ट, जैव उर्वरक, मल्चिंग और संरक्षित खेती जैसी तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही, फसल अवशेषों को जलाने के बजाय जैविक खाद में बदलने पर विशेष जोर दिया गया, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ लागत भी घटेगी।

नई तकनीकों का प्रदर्शन !!

संगोष्ठी में पूसा एसटीएफआर मीटर, पूसा डीकम्पोजर और जैव उर्वरकों के उपयोग पर लाइव डेमो दिया गया। इसके अलावा फसल विविधीकरण, दलहनी फसलों की उन्नत तकनीक और प्राकृतिक खेती जैसे विषयों पर विशेष सत्र आयोजित किए गए।

किसानों की आय बढ़ाने पर फोकस !!

विशेषज्ञों ने बताया कि संतुलित उर्वरक उपयोग से उत्पादन लागत घटती है और गुणवत्ता बढ़ती है, जिससे बाजार में बेहतर दाम मिलते हैं। साथ ही, किसानों को एफपीओ (किसान उत्पादक संगठन) से जुड़ने की सलाह दी गई, ताकि सामूहिक विपणन से उनकी आय में वृद्धि हो सके।

क्यों है यह पहल महत्वपूर्ण ?

* मृदा स्वास्थ्य सुधारकर दीर्घकालिक उत्पादकता सुनिश्चित
* रासायनिक उर्वरकों की लागत में कमी
* जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने में मदद
* पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण
* किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में ठोस कदम

सारांश !!

हापुड़ से शुरू हुआ यह अभियान देशभर के किसानों के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है। वैज्ञानिकों और किसानों के बीच सीधा संवाद कृषि क्षेत्र में नई क्रांति ला सकता है, जिससे टिकाऊ खेती और बेहतर आय का रास्ता मजबूत होगा।