बिहार में श्री अन्न से बदलेगी किसानों की तकदीर!

बिहार में मोटे अनाज (श्री अन्न) की खेती को नई उड़ान, कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने सराहा ICRISAT और साझेदार संस्थानों का प्रयास !!

गया (बिहार), – बिहार में श्री अन्न (मोटे अनाज) की खेती, प्रसंस्करण और विपणन को बढ़ावा देने के लिए चल रहे प्रयासों को उस समय नई मजबूती मिली, जब बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने गया जिले के मायापुर स्थित बिहार सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर मिलेट वैल्यू चेन (BCoEMVC) का दौरा किया। यह दौरा केंद्र सरकार के राष्ट्रव्यापी “खेत बचाओ अभियान” के तहत आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य मृदा स्वास्थ्य संरक्षण तथा प्राकृतिक एवं टिकाऊ खेती को बढ़ावा देना है।

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श्री अन्न केवल पोषण नहीं, रोजगार और आय का भी मजबूत माध्यम !! 

दौरे के दौरान कृषि मंत्री ने महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार किए गए विभिन्न मिलेट उत्पादों का अवलोकन किया और उनके स्वाद का अनुभव भी लिया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि श्री अन्न केवल पोषण और पर्यावरणीय स्थिरता का माध्यम नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाला अवसर भी है। उन्होंने कहा कि उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण और विपणन तक की पूरी श्रृंखला में श्री अन्न रोजगार सृजन, ग्रामीण उद्यमिता और किसानों की आय बढ़ाने की अपार संभावनाएं रखता है। यदि स्थानीय स्तर पर मिलेट वैल्यू चेन को सुदृढ़ किया जाए तो बिहार के गांवों में नए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर पैदा किए जा सकते हैं।

ICRISAT, आरपीसीएयू और बिहार कृषि विश्वविद्यालय की साझेदारी !!

यह महत्वाकांक्षी परियोजना जुलाई 2023 में शुरू की गई थी, जिसका संयुक्त संचालन ICRISAT, डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (RPCAU), बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU) तथा बिहार कृषि विभाग द्वारा किया जा रहा है। यह पहल केंद्र सरकार की टिकाऊ कृषि नीति और बिहार सरकार के खेत बचाओ अभियान के उद्देश्यों के अनुरूप कार्य कर रही है। दौरे के दौरान कृषि मंत्री ने वैज्ञानिकों, परियोजना भागीदारों और अधिकारियों के साथ संवाद कर परियोजना की प्रगति की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।

तीन वर्षों में उल्लेखनीय उपलब्धियां !!

परियोजना के प्रधान अन्वेषक एवं ICRISAT के जीनबैंक प्रमुख डॉ. कुलदीप सिंह ने बताया कि केवल तीन वर्षों में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की गई हैं—

सात प्रकार के मिलेट्स में 37 उन्नत लाइनों की पहचान, जो वर्तमान में राष्ट्रीय परीक्षण प्रक्रिया में हैं। 2,700 किलोग्राम से अधिक गुणवत्तापूर्ण बीज का उत्पादन। आठ जिलों के 696 किसानों की सक्रिय भागीदारी। सात महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा सामुदायिक बीज उत्पादन का संचालन। धान-गेहूं प्रणाली के विकल्प के रूप में आठ जलवायु-स्मार्ट फसल प्रणालियों का परीक्षण। पांच मिलेट प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना। बाजार के लिए तैयार पांच मिलेट आधारित उत्पादों का विकास। 1,000 से अधिक किसानों का प्रशिक्षण, जिनमें 73 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं। दक्षिण बिहार में चार पारंपरिक जल संरक्षण प्रणालियों (आहर एवं पाइन) का पुनरुद्धार। आठ जिलों में मिलेट, तिलहन और दलहन आधारित 7,000 से अधिक फसल प्रदर्शन परीक्षण।

महिलाओं को बनाया गया मिलेट क्रांति का केंद्र !!

परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता महिलाओं की सक्रिय भागीदारी रही है। महिला स्वयं सहायता समूहों को बीज उत्पादन, उत्पाद निर्माण, पोषण जागरूकता और उद्यमिता विकास से जोड़कर उन्हें स्थानीय मिलेट अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। इससे महिलाओं की आय बढ़ने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिला है।

चौथे कृषि रोडमैप को मिल रही मजबूती !!

परियोजना के तहत शून्य जुताई (Zero Till) तकनीक, छोटे कृषि यंत्रों के उपयोग तथा परती एवं कम उपयोग वाली भूमि को पुनः खेती के दायरे में लाने जैसे नवाचारों का भी प्रदर्शन किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ये प्रयास बिहार के चौथे कृषि रोडमैप के लक्ष्यों को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

बिहार में मिलेट आधारित उद्यमिता को मिलेगा नया आयाम !!

ICRISAT के सहायक महानिदेशक संजय अग्रवाल ने कहा कि यह पहल अनुसंधान, विस्तार, मूल्य संवर्धन, उद्यमिता और बाजार संपर्क को एक ही मंच पर जोड़ने वाली देश की चुनिंदा परियोजनाओं में से एक है। पिछले तीन वर्षों में इस साझेदारी ने बिहार में मिलेट उत्पादन और उपभोग को बढ़ाने की मजबूत नींव तैयार की है। वहीं ICRISAT के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक ने बिहार सरकार और सभी सहयोगी संस्थानों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह पहल मिलेट पारिस्थितिकी तंत्र के प्रत्येक घटक को जोड़ने वाला एक अनूठा मॉडल बनकर उभरी है और कम समय में इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।

किसानों की आय, पोषण और टिकाऊ खेती को मिलेगा लाभ !!

विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर मिलेट वैल्यू चेन की यह पहल राज्य में मोटे अनाजों को मुख्यधारा में लाने, किसानों की आय बढ़ाने, पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने तथा टिकाऊ कृषि प्रणाली विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। आने वाले वर्षों में यह मॉडल बिहार के साथ-साथ देश के अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन सकता है।