भू-राजस्व अभिलेखों से होगा गन्ना क्षेत्रफल का सत्यापन, एसजीके पोर्टल पर फर्जी आंकड़ों पर लगेगी रोक!
लखनऊ, 25 जुलाई 2026। उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देशों के तहत गन्ना सर्वेक्षण एवं सट्टा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, त्रुटिरहित और किसान हितैषी बनाने के लिए गन्ना विकास विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। विभाग अब स्मार्ट गन्ना किसान (एसजीके) पोर्टल पर उपलब्ध गन्ना क्षेत्रफल के आंकड़ों का भू-राजस्व अभिलेखों से एपीआई (API) के माध्यम से मिलान और सत्यापन कराएगा। इससे वास्तविक गन्ना क्षेत्रफल की पुष्टि होगी और फर्जी प्रविष्टियों पर प्रभावी रोक लग सकेगी।
इसी क्रम में शनिवार को लखनऊ स्थित न्यू स्कॉलर हॉस्टल सभागार में अयोध्या, देवीपाटन, गोरखपुर एवं देवरिया परिक्षेत्र के अधिकारियों और फील्ड कार्मिकों के लिए स्मार्ट गन्ना किसान पोर्टल के डाटा की राजस्व अभिलेखों से मैपिंग संबंधी वर्चुअल प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में उप गन्ना आयुक्त, जिला गन्ना अधिकारी, ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक, गन्ना विकास निरीक्षक, सचिव एवं गन्ना पर्यवेक्षकों को डाटा सत्यापन की प्रक्रिया, तकनीकी पहलुओं और मैपिंग प्रणाली की विस्तृत जानकारी दी गई।
पहले चरण में बड़े गन्ना क्षेत्रफल का होगा सत्यापन
विभाग ने बताया कि विशेष सत्यापन अभियान के प्रथम चरण में एक हेक्टेयर से अधिक गन्ना क्षेत्रफल वाले किसानों के आंकड़ों की जांच की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य बड़े क्षेत्रफल के नाम पर दर्ज फर्जी प्रविष्टियों की पहचान करना और तथाकथित गन्ना माफियाओं पर प्रभावी अंकुश लगाना है। सत्यापन के बाद केवल वास्तविक एवं पात्र किसानों का गन्ना क्षेत्रफल ही पोर्टल पर दर्ज रहेगा, जिससे गन्ना आपूर्ति और भुगतान व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी।
एसजीके पोर्टल पर बढ़ेगी शुद्धता और पारदर्शिता
गन्ना विकास विभाग के अनुसार, इस अभियान का मुख्य उद्देश्य स्मार्ट गन्ना किसान पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों की शुद्धता सुनिश्चित करना तथा फर्जी एवं त्रुटिपूर्ण डाटा का पूर्ण उन्मूलन करना है। भू-राजस्व अभिलेखों और पोर्टल के आंकड़ों के तकनीकी समन्वय से गन्ना सर्वेक्षण, सट्टा निर्धारण और गन्ना आपूर्ति संबंधी प्रक्रियाएं अधिक सटीक एवं विश्वसनीय बनेंगी।
किसानों को मिलेगी 63 बिंदुओं की जानकारी
अभियान के दौरान किसानों को उनके गन्ना सर्वे एवं सट्टा से जुड़े 63 महत्वपूर्ण बिंदुओं की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही, सर्वेक्षण या सट्टा संबंधी किसी भी आपत्ति अथवा शिकायत का मौके पर ही निस्तारण सुनिश्चित किया जाएगा। इससे किसानों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और उन्हें समयबद्ध राहत मिलेगी।
जनप्रतिनिधियों और समितियों का भी लिया जाएगा सहयोग
गन्ना आयुक्त ने बताया कि अभियान को सफल बनाने के लिए सहकारी गन्ना विकास समितियों के अध्यक्षों और जनप्रतिनिधियों का सहयोग भी लिया जाएगा। विभाग का मानना है कि भू-राजस्व अभिलेखों और स्मार्ट गन्ना किसान पोर्टल के आंकड़ों के एकीकरण से गन्ना सर्वेक्षण प्रणाली और अधिक मजबूत, पारदर्शी तथा किसान-केंद्रित बनेगी। इससे वास्तविक गन्ना किसानों के हितों की बेहतर सुरक्षा होगी और प्रदेश में गन्ना विकास की प्रक्रिया को नई गति मिलेगी।


























