September 19, 2026 2:38 PM

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हैदराबाद कृषि कॉन्फ्रेंस में बड़ा संदेश: समय पर पूरे करें वादे, किसानों तक पहुंचे नतीजे!

हैदराबाद में दक्षिणी राज्यों की कृषि कॉन्फ्रेंस: कृषि रोडमैप, फार्मर आईडी और रबी रणनीति पर जोर!

हैदराबाद। दक्षिण भारत के राज्यों के लिए आयोजित क्षेत्रीय कृषि कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि क्षेत्र से जुड़े लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर जोर देते हुए कहा कि बैठकों और चर्चाओं का वास्तविक महत्व तभी है, जब उनका परिणाम जमीन पर दिखाई दे। उन्होंने राज्यों से कृषि सुधारों, डिजिटल कृषि ढांचे और किसान-केंद्रित योजनाओं को तय समयसीमा में लागू करने का आग्रह किया।

कॉन्फ्रेंस के समापन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें, कृषि वैज्ञानिक, कृषि विश्वविद्यालय, कृषि विभाग और किसान मिलकर “टीम एग्रीकल्चर” का हिस्सा हैं। यदि सभी पक्ष समन्वय के साथ काम करें तो कृषि क्षेत्र में बड़े बदलाव संभव हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सम्मेलन में किए गए वादों और प्रतिबद्धताओं को समय पर पूरा करना आवश्यक है, अन्यथा पूरी कवायद का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा।

केवल बैठक नहीं, खेतों तक दिखना चाहिए परिणाम

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए आयोजित बैठकों का उद्देश्य केवल चर्चा करना नहीं, बल्कि किसानों तक लाभ पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि यदि कॉन्फ्रेंस के बाद तय कार्यों पर अमल नहीं हुआ तो इसका कोई अर्थ नहीं रहेगा। राज्यों को अपने-अपने कृषि कार्यक्रमों की नियमित समीक्षा करते हुए प्रगति सुनिश्चित करनी होगी।

उन्होंने विकसित कृषि संकल्प अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि कृषि वैज्ञानिकों को गांवों और खेतों तक पहुंचाना जरूरी है। वैज्ञानिक, किसान और कृषि अधिकारी एक साथ बैठकर स्थानीय समस्याओं पर चर्चा करेंगे तो शोध का लाभ तेजी से किसानों तक पहुंचेगा।

फार्मर आईडी और एग्रीस्टैक पर तेजी से काम करने की जरूरत

केंद्रीय मंत्री ने डिजिटल कृषि मिशन के तहत एग्रीस्टैक और फार्मर आईडी को भविष्य की कृषि व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि तेलंगाना और कर्नाटक जैसे राज्य किसान पहचान पत्र (Farmer ID) बनाने में 75 प्रतिशत से अधिक प्रगति कर चुके हैं, जबकि केरल, तमिलनाडु और अंडमान-निकोबार को इस दिशा में और प्रयास करने होंगे।

उन्होंने कहा कि भविष्य में कृषि योजनाओं, सब्सिडी, फसल बीमा और अन्य सेवाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए किसान डेटाबेस महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसलिए सभी राज्यों को निर्धारित समयसीमा के भीतर यह कार्य पूरा करना चाहिए।

भूमि रिकॉर्ड और किसान रजिस्ट्री को जोड़ने पर जोर

कॉन्फ्रेंस में भूमि अभिलेखों को किसान रजिस्ट्री से जोड़ने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जिन राज्यों में भूमि पार्सल और किसान रिकॉर्ड का समन्वय अभी पूरा नहीं हुआ है, वहां इस प्रक्रिया को तेज किया जाना चाहिए।

उन्होंने विशेष रूप से दक्षिण भारत के राज्यों में बड़ी संख्या में मौजूद बटाईदार और किरायेदार किसानों के लिए स्पष्ट कार्यप्रणाली (SOP) तैयार करने और उसे अधिसूचित करने की आवश्यकता बताई, ताकि ऐसे किसानों को भी सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सके।

13 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध होगी कृषि सलाह

किसानों को उनकी मातृभाषा में तकनीकी सलाह उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ‘भारत विस्तार’ प्लेटफॉर्म का विस्तार किया जाएगा। फिलहाल यह सेवा हिंदी और अंग्रेजी में उपलब्ध है, लेकिन जल्द ही इसे तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम सहित 13 भारतीय भाषाओं में शुरू करने की योजना है।

इस व्यवस्था के तहत किसान मोबाइल के माध्यम से अपनी भाषा में सवाल पूछ सकेंगे और विशेषज्ञों से उसी भाषा में जवाब प्राप्त कर सकेंगे। कृषि मंत्रालय का मानना है कि स्थानीय भाषा में जानकारी उपलब्ध होने से तकनीकों और योजनाओं की पहुंच बढ़ेगी।

लैब से लैंड तक पहुंचनी चाहिए तकनीक

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आईसीएआर, कृषि विश्वविद्यालयों और कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) में होने वाला शोध तभी सफल माना जाएगा जब उसका लाभ किसानों तक पहुंचे। उन्होंने राज्यों को 15 से 20 दिन के विशेष अभियान चलाने का सुझाव दिया, जिसमें वैज्ञानिक सीधे गांवों में जाकर किसानों से संवाद करें।

उन्होंने कहा कि देश में हजारों कृषि वैज्ञानिक उपलब्ध हैं और उनकी विशेषज्ञता का लाभ खेत स्तर तक पहुंचाना समय की मांग है। इससे नई किस्मों, आधुनिक तकनीकों और जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों को तेजी से अपनाने में मदद मिलेगी।

रबी सीजन की तैयारी पर बनेगी राष्ट्रीय रणनीति

कॉन्फ्रेंस के दौरान यह भी जानकारी दी गई कि 28 और 29 सितंबर को नई दिल्ली स्थित पूसा संस्थान में राष्ट्रीय रबी कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएगी। इसमें सभी राज्यों के कृषि मंत्री और अधिकारी आगामी रबी सीजन की फसल योजना लेकर शामिल होंगे।

बैठक में गेहूं, चना, सरसों, जौ और अन्य रबी फसलों के संभावित रकबे, बीज उपलब्धता, उर्वरक आवश्यकता और सिंचाई प्रबंधन पर अंतिम निर्णय लिए जाएंगे। इससे राज्यों की मांग के अनुसार संसाधनों की अग्रिम व्यवस्था सुनिश्चित की जा सकेगी।

बड़े राज्यों की गैरमौजूदगी रही चर्चा का विषय

दक्षिणी राज्यों की इस महत्वपूर्ण कृषि कॉन्फ्रेंस में कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे बड़े राज्यों की सीमित भागीदारी और संबंधित कृषि मंत्रियों की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय रही। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्रीय कृषि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी राज्यों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।

कृषि क्षेत्र में डिजिटल बदलाव, वैज्ञानिक खेती, किसान डेटाबेस और क्षेत्रीय भाषाओं में सलाह जैसी पहलें आने वाले वर्षों में भारतीय कृषि की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। केंद्र सरकार का फोकस अब केवल उत्पादन बढ़ाने पर नहीं, बल्कि तकनीक, डेटा और ज्ञान आधारित कृषि व्यवस्था विकसित करने पर भी है।