मिथुन पशुपालन में एआई की एंट्री: अब रियल-टाइम में होगी पशुओं के व्यवहार की निगरानी, 99.5% सटीकता हासिल!
नई दिल्ली। पशुधन अनुसंधान और प्रबंधन के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए नागालैंड स्थित आईसीएआर-राष्ट्रीय मिथुन अनुसंधान केंद्र (NRC on Mithun) के वैज्ञानिकों ने मिथुन पशुओं के व्यवहार की रियल-टाइम पहचान और ट्रैकिंग के लिए एआई आधारित उन्नत प्रणाली विकसित की है। यह तकनीक पशुओं के स्वास्थ्य, कल्याण, प्रजनन प्रबंधन और नस्ल सुधार कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी बनाने में मददगार साबित हो सकती है।
हाल ही में प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका इंजीनियरिंग रिसर्च एक्सप्रेस में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, यह एआई-आधारित प्रणाली बिना किसी शारीरिक संपर्क के मिथुन (Bos frontalis) के व्यवहार की लगातार निगरानी कर सकती है। पूर्वोत्तर भारत में “पहाड़ों के मवेशी” के रूप में प्रसिद्ध मिथुन जनजातीय समुदायों की आजीविका, संस्कृति और खाद्य सुरक्षा से गहराई से जुड़ा हुआ है।
24 घंटे निगरानी के लिए लगाए गए हाई-टेक कैमरे
पारंपरिक पशु निगरानी व्यवस्था मुख्य रूप से मानवीय अवलोकन पर आधारित होती है, जो समय लेने वाली और सीमित होती है। इस चुनौती को दूर करने के लिए वैज्ञानिकों ने आईसीएआर-एनआरसी ऑन मिथुन फार्म के दो शेडों में 12 हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए। इन्फ्रारेड तकनीक से लैस ये कैमरे दिन और रात दोनों समय पशुओं की गतिविधियों को रिकॉर्ड करते हैं।
रिकॉर्ड किए गए वीडियो डेटा के आधार पर शोधकर्ताओं ने 3,000 से अधिक मैन्युअली वर्गीकृत तस्वीरों का डेटासेट तैयार किया, जिसमें मिथुन के चार प्रमुख व्यवहार—भोजन करना, खड़े रहना, बैठना और माउंटिंग—को शामिल किया गया।
YOLOv8n और DeepSORT तकनीक का इस्तेमाल
इस उन्नत प्रणाली में व्यवहार पहचान के लिए YOLOv8n मॉडल तथा पशुओं की पहचान और गतिविधियों को लगातार ट्रैक करने के लिए DeepSORT तकनीक का उपयोग किया गया। इससे न केवल यह पता चलता है कि पशु क्या कर रहा है, बल्कि प्रत्येक मिथुन की अलग पहचान भी बनी रहती है।
अध्ययन के दौरान YOLOv8n मॉडल ने 99.5 प्रतिशत मीन एवरेज प्रिसीजन (mAP@0.5) और 99.6 प्रतिशत रिकॉल दर्ज किया। वहीं NVIDIA RTX 3060 ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट पर यह प्रणाली लगभग 31 फ्रेम प्रति सेकंड की गति से कार्य करती पाई गई, जो वास्तविक समय में उपयोग के लिए उपयुक्त मानी जाती है।
चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी प्रभावी
वैज्ञानिकों ने इस एआई प्रणाली का परीक्षण फार्म की कठिन परिस्थितियों में भी किया। इनमें पशुओं का आंशिक रूप से दृश्य से ओझल होना, गीली और ऊबड़-खाबड़ जमीन, छाया, मोशन ब्लर, बैकग्राउंड अव्यवस्था तथा रात के समय इन्फ्रारेड फुटेज जैसी स्थितियां शामिल थीं। इन सभी परिस्थितियों में भी प्रणाली ने संतोषजनक प्रदर्शन किया।
स्वास्थ्य और प्रजनन प्रबंधन में मिलेगी मदद
विशेषज्ञों का मानना है कि पशुओं के खाने, खड़े रहने और बैठने के पैटर्न में बदलाव से स्वास्थ्य और शारीरिक स्थिति का शुरुआती संकेत मिल सकता है। वहीं माउंटिंग व्यवहार की पहचान से प्रजनन चक्र और एस्ट्रस प्रबंधन को बेहतर बनाया जा सकता है। इससे पशुपालकों को समय रहते निर्णय लेने में सहायता मिलेगी और उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
भविष्य में बीमारी और आक्रामकता की भी होगी पहचान
शोधकर्ताओं के अनुसार फिलहाल इस प्रणाली का परीक्षण केवल एक फार्म पर किया गया है। विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों, मौसमों और फार्म स्थितियों में इसके व्यापक परीक्षण की आवश्यकता है। भविष्य में इस एआई फ्रेमवर्क को और विकसित कर पशुओं के अन्य व्यवहारों जैसे आक्रामकता, शरीर की सफाई, बीमारी के कारण सुस्ती और असामान्य गतिविधियों की पहचान भी की जाएगी।
इसके अलावा एज कम्प्यूटिंग आधारित उपकरणों और बड़े डेटासेट के माध्यम से इसे और अधिक सटीक तथा व्यावहारिक बनाने की योजना है।
तकनीक आधारित पशुपालन की दिशा में बड़ा कदम
विशेषज्ञों का कहना है कि यह अध्ययन पशुधन विज्ञान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कंप्यूटर विजन के सफल एकीकरण का उत्कृष्ट उदाहरण है। ऐसी तकनीकें भविष्य में प्रिसिजन लाइवस्टॉक फार्मिंग को नई दिशा दे सकती हैं और किसानों तथा पशुपालकों को डेटा आधारित निर्णय लेने में सक्षम बनाकर उनकी आय और पशु कल्याण दोनों को मजबूत कर सकती हैं।
यह शोध आईसीएआर-राष्ट्रीय मिथुन अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों द्वारा एनआईटी नागालैंड, नागालैंड यूनिवर्सिटी और क्राइस्ट (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी) के शोधकर्ताओं के सहयोग से पूरा किया गया है। अध्ययन इंजीनियरिंग रिसर्च एक्सप्रेस के वॉल्यूम-8 (2026) में प्रकाशित हुआ है।

























