September 5, 2026 9:26 AM

Krishi Times

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चंपारण में दूध क्रांति की नई शुरुआत!

कृषि, पशुपालन और मत्स्य क्षेत्र को नई गति देगा चंपारण, 350 करोड़ रुपये के डेयरी प्लांट का प्रस्ताव!

मोतिहारी (बिहार)। पूर्वी चंपारण के किसानों, पशुपालकों और मत्स्य उद्यमियों के लिए नई संभावनाओं का द्वार खोलते हुए मोतिहारी में आयोजित कृषि, पशुपालन एवं मत्स्य उद्यमी उन्नति मेला में डेयरी विकास, नस्ल सुधार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की कई महत्वपूर्ण योजनाओं की घोषणा की गई। कार्यक्रम में सांसद राधा मोहन सिंह, राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के अध्यक्ष डॉ. मीनेश शाह तथा बिहार सरकार के सचिव शीर्षत कपिल अशोक सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांसद राधा मोहन सिंह ने कहा कि पूर्वी चंपारण में कृषि के साथ पशुपालन और मत्स्यपालन को बढ़ावा देकर किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में पशुओं की नस्ल सुधार परियोजना शुरू की जाएगी, जिसके तहत चंपारण के 300 गांवों में उन्नत प्रजनन सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसका उद्देश्य दुग्ध उत्पादन बढ़ाकर पशुपालकों की आमदनी में वृद्धि करना है।

उन्होंने कहा कि यदि किसी गाय का औसत दूध उत्पादन 5 लीटर प्रतिदिन है तो वैज्ञानिक नस्ल सुधार और बेहतर प्रबंधन के माध्यम से इसे 8 से 10 लीटर प्रतिदिन तक बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा क्षेत्र में एक बड़े डेयरी संयंत्र की स्थापना भी प्रस्तावित है, जिससे दूध उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन को नई मजबूती मिलेगी।

बापूधाम मिल्क प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन बना किसानों की ताकत

एनडीडीबी के अध्यक्ष डॉ. मीनेश शाह ने बताया कि वर्ष 2017 में किसानों को दूध का उचित मूल्य और सुनिश्चित बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बापूधाम मिल्क प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन की स्थापना की गई थी। आज यह संगठन चंपारण और आसपास के जिलों के 1,500 से अधिक गांवों से प्रतिदिन लगभग 1.5 लाख लीटर दूध का संग्रह कर रहा है।

उन्होंने बताया कि संस्था से 67,000 से अधिक किसान जुड़े हुए हैं और पिछले नौ वर्षों में दूध बिक्री के बदले किसानों के बैंक खातों में 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे हस्तांतरित की जा चुकी है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ किसानों की नियमित आय सुनिश्चित हुई है।

4 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता वाला नया डेयरी प्लांट

दूध उत्पादन और संग्रहण में लगातार वृद्धि को देखते हुए क्षेत्र में एक अत्याधुनिक डेयरी संयंत्र स्थापित करने की योजना बनाई गई है। प्रस्तावित प्लांट की प्रसंस्करण क्षमता 4 लाख लीटर प्रतिदिन होगी और इस परियोजना में लगभग 350 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना से न केवल प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि दूध संग्रहण, परिवहन, प्रसंस्करण और विपणन से जुड़ी पूरी आपूर्ति श्रृंखला को भी नई ऊर्जा मिलेगी।

डेयरी सहकारिता और तकनीकी सुविधाओं का विस्तार

एनडीडीबी द्वारा बिहार में डेयरी सहकारी समितियों के गठन और सुदृढ़ीकरण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इस दिशा में ऑटोमैटिक मिल्क कलेक्शन सिस्टम (AMCS), बल्क मिल्क कूलर (BMC) तथा अन्य आधुनिक डेयरी अवसंरचना सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। इस कार्य में कॉम्फेड-सुधा भी महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान कर रही है।

पशुधन नस्ल सुधार के लिए नया सीमन स्टेशन

पशुधन की उत्पादकता बढ़ाने के लिए बिहार में पूर्णिया के अलावा एक नए सीमन स्टेशन की स्थापना की जा रही है। यहां सामान्य सीमन के साथ सेक्स-सॉर्टेड सीमन की सुविधा भी उपलब्ध होगी। इससे बेहतर प्रजनन सेवाओं को बढ़ावा मिलेगा और पशुओं की आनुवंशिक गुणवत्ता तथा दुग्ध उत्पादकता में सुधार होगा।

डेयरी और मत्स्य क्षेत्र बनेगा ग्रामीण विकास का आधार

बिहार सरकार के सचिव शीर्षत कपिल अशोक ने कहा कि चंपारण में डेयरी और मत्स्य क्षेत्र ग्रामीण विकास के प्रमुख आधार बन सकते हैं। उन्होंने बताया कि बिहार सरकार के ‘सात निश्चय-3’ कार्यक्रम और केंद्र सरकार के ‘सहकार से समृद्धि’ अभियान के तहत गांव-गांव में डेयरी सहकारी समितियों का गठन तथा सुधा बिक्री केंद्रों का विस्तार किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि प्रस्तावित डेयरी संयंत्र के साथ स्थानीय स्तर पर मजबूत सप्लाई चेन, आधुनिक विपणन व्यवस्था और मूल्य संवर्धन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, जिससे किसानों और पशुपालकों की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित हो सकेगी।

किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम

विशेषज्ञों के अनुसार चंपारण में डेयरी अवसंरचना, नस्ल सुधार, सहकारिता और बाजार पहुंच को मजबूत करने की यह पहल कृषि आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकती है। इससे किसानों को फसल उत्पादन के साथ पशुपालन और मत्स्यपालन से अतिरिक्त आय के अवसर मिलेंगे तथा क्षेत्र में रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।