August 31, 2026 10:49 AM

Krishi Times

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अब डेटा बताएगा कहां कितनी चाहिए खाद!

iFMS से बदल रही उर्वरक व्यवस्था: 14 करोड़ किसानों, 2.5 लाख विक्रेताओं और ₹2 लाख करोड़ सब्सिडी का डिजिटल प्रबंधन

डेटा आधारित उर्वरक प्रबंधन की ओर भारत का बड़ा कदम, उत्पादन से लेकर सब्सिडी भुगतान तक पूरी श्रृंखला डिजिटल निगरानी में

नई दिल्ली। भारत सरकार का इंटीग्रेटेड फर्टिलाइज़र मैनेजमेंट सिस्टम (iFMS) देश में उर्वरक प्रबंधन और सब्सिडी वितरण की व्यवस्था को नई दिशा दे रहा है। उर्वरक विभाग और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) द्वारा विकसित यह प्लेटफॉर्म अब केवल उर्वरक बिक्री का रिकॉर्ड रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्पादन, आयात, परिवहन, भंडारण, खुदरा बिक्री और सब्सिडी भुगतान की पूरी प्रक्रिया को एकीकृत डिजिटल नेटवर्क से जोड़ रहा है।

देशभर में संचालित इस प्रणाली से 14 करोड़ से अधिक आधार-लिंक्ड किसान, 2.5 लाख से ज्यादा खुदरा विक्रेता और प्रतिवर्ष लगभग 7 करोड़ मीट्रिक टन उर्वरक बिक्री जुड़ी हुई है। इसके माध्यम से हर साल करीब ₹2 लाख करोड़ की उर्वरक सब्सिडी के प्रबंधन और निगरानी को भी अधिक पारदर्शी बनाया जा रहा है।

केवल लेन-देन नहीं, अब निर्णय लेने का भी प्रमुख प्लेटफॉर्म

उर्वरक विभाग ने हाल के वर्षों में iFMS को एक डिसीजन सपोर्ट सिस्टम के रूप में विकसित करना शुरू किया है। इसके लिए नए डैशबोर्ड और विश्लेषणात्मक (Analytics) टूल तैयार किए गए हैं, जिनसे केंद्र, राज्य, जिला और खुदरा विक्रेता स्तर तक उर्वरक की उपलब्धता, बिक्री और खपत की वास्तविक समय (Real-Time) निगरानी संभव हो रही है।

इन डिजिटल टूल्स की मदद से अधिकारियों को उत्पादन, आयात, डिस्पैच, परिवहन, स्टॉक और बिक्री की एकीकृत जानकारी मिलती है। इससे किसी क्षेत्र में उर्वरक की कमी, असामान्य मांग या आपूर्ति बाधाओं की पहचान शुरुआती चरण में ही की जा सकती है।

किसान, भूमि और फसल डेटा से जुड़ रहा उर्वरक प्रबंधन

iFMS की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक इसका किसान, भूमि और फसल डेटाबेस के साथ एकीकरण है।

हरियाणा की “मेरी फसल मेरा ब्यौरा” (MFMB) योजना और केंद्र सरकार के एग्रीस्टैक (AgriStack) प्लेटफॉर्म के साथ एकीकरण के माध्यम से उर्वरक खरीद को किसानों की भूमि और फसल संबंधी जानकारी से जोड़ा जा रहा है।

इससे यह समझने में मदद मिल रही है कि कौन-सा किसान किस फसल के लिए कितनी मात्रा में उर्वरक खरीद रहा है और वास्तविक आवश्यकता के मुकाबले उसकी खपत का स्तर क्या है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह व्यवस्था भविष्य में संतुलित उर्वरक उपयोग (Balanced Fertilization) और पोषक तत्व आधारित खेती को बढ़ावा देने में सहायक होगी।

मोबाइल ऐप से उर्वरक बुकिंग की नई व्यवस्था

उर्वरक विभाग ने फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइज़र सेल (FFS) नामक नई डिजिटल पहल शुरू की है।

इसके तहत किसान अपने AgriStack ID के आधार पर मोबाइल ऐप के जरिए उर्वरक की अग्रिम बुकिंग कर सकता है। भूमि और स्वामित्व का सत्यापन होने के बाद एक QR कोड आधारित बुकिंग तैयार होती है, जिसे बाद में PoS मशीन पर सत्यापित किया जाता है।

इस व्यवस्था से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि वास्तविक किसान को उसकी जरूरत के अनुरूप उर्वरक मिले तथा बुकिंग और वास्तविक खरीद के बीच पारदर्शिता बनी रहे।

प्रति हेक्टेयर उर्वरक खपत का होगा विश्लेषण

FFS प्रणाली के जरिए पहली बार विभाग को यह विश्लेषण करने में मदद मिल रही है कि—

  • प्रति हेक्टेयर उर्वरक खपत कितनी है।
  • विभिन्न भूमि आकार वाले किसानों की खपत में क्या अंतर है।
  • कौन-सी फसल के लिए किस उर्वरक का अधिक उपयोग हो रहा है।
  • बुकिंग के समय बताई गई आवश्यकता और वास्तविक खरीद में कितना अंतर है

विशेषज्ञों के अनुसार यह डेटा भविष्य में उर्वरक नीति निर्माण और संसाधनों के बेहतर आवंटन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

VLTS से उर्वरक परिवहन की रियल-टाइम निगरानी

उर्वरक आपूर्ति श्रृंखला को और अधिक मजबूत बनाने के लिए व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम (VLTS) लागू किया गया है।

यह प्रणाली उर्वरक की खेपों को परिवहन के दौरान ट्रैक करती है और वाहन की वास्तविक स्थिति की जानकारी उपलब्ध कराती है। इससे परिवहन में देरी, मार्ग परिवर्तन और अन्य असामान्य गतिविधियों की पहचान की जा सकती है।

iFMS में पहले से उपलब्ध डिस्पैच और स्टॉक डेटा के साथ VLTS को जोड़ने से अब विभाग को फैक्ट्री से गोदाम और गोदाम से खुदरा विक्रेता तक उर्वरक की पूरी यात्रा पर निगरानी रखने की क्षमता मिल रही है।

इलेक्ट्रॉनिक सब्सिडी प्रोसेसिंग से बढ़ी पारदर्शिता

1 जनवरी 2026 से उर्वरक सब्सिडी दावों के इलेक्ट्रॉनिक प्रोसेसिंग सिस्टम को और मजबूत किया गया है।

PFMS और e-Bill प्रणाली के साथ एकीकरण के कारण अब सब्सिडी दावों और भुगतान की पूरी प्रक्रिया डिजिटल रूप से ट्रैक की जा रही है। इससे मैनुअल हस्तक्षेप कम हुआ है, भुगतान प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनी है और ऑडिट की सुविधा भी मजबूत हुई है।

इसके साथ ही DBT आधारित बिक्री और सब्सिडी दावों की जांच के लिए रैंडम वेरिफिकेशन तथा उन्नत डेटा एनालिटिक्स का उपयोग भी शुरू किया गया है।

कृषि क्षेत्र के लिए क्यों महत्वपूर्ण है iFMS?

भारत दुनिया के सबसे बड़े उर्वरक उपभोक्ता देशों में शामिल है। ऐसे में उर्वरक की समय पर उपलब्धता, संतुलित उपयोग और सब्सिडी का प्रभावी प्रबंधन कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

iFMS के माध्यम से अब सरकार केवल उर्वरक की बिक्री दर्ज नहीं कर रही, बल्कि यह भी समझ रही है कि—

  • उर्वरक कहाँ उपलब्ध है,
  • किस क्षेत्र में उसकी मांग बढ़ रही है,
  • कौन किसान कितना उर्वरक खरीद रहा है,
  • किस फसल के लिए कितना उपयोग हो रहा है,
  • और सरकारी सब्सिडी का लाभ वास्तविक किसानों तक किस प्रकार पहुंच रहा है।

डिजिटल कृषि शासन की ओर बड़ा कदम

उर्वरक विभाग के अनुसार iFMS अब एक साधारण ट्रांजैक्शन प्लेटफॉर्म से आगे बढ़कर भारत के उर्वरक इकोसिस्टम का एकीकृत डिजिटल कमांड सेंटर बनता जा रहा है। किसान डेटा, भूमि रिकॉर्ड, फसल जानकारी, लॉजिस्टिक्स, खुदरा बिक्री और सब्सिडी भुगतान को जोड़कर यह प्रणाली कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता, दक्षता और डेटा-आधारित निर्णय लेने की नई संस्कृति स्थापित कर रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में iFMS देश में उर्वरक प्रबंधन, सब्सिडी सुधार और स्मार्ट कृषि शासन (Smart Agri Governance) का आधार स्तंभ बन सकता है।